Case LawSupreme Court › [1980] 1 S.C.R. 696

Malabar Fisheries Co., Calicut v. Commissioner Of Income Tax, Kerala

Supreme Court [1980] 1 S.C.R. 696 19 Sep 1979 In favour of: Assessee
Forum / Bench
Supreme Court
Parties
Malabar Fisheries Co., Calicut v. Commissioner Of Income Tax, Kerala
Date of order
19 Sep 1979
Assessment year(s)
Outcome
Allowed

Case summary

In Malabar Fisheries Co., Calicut v. Commissioner Of Income Tax, Kerala, the Supreme Court (1979) allowed the appeal under Section 2 of the Income-tax Act. The decision went in favour of the assessee.

Issue: (a) whether there was only an adjustment of the mutual rights of the partners and the provisions of s.

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Sections referenced in this judgment

The order — as passed by the Supreme Court

Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) मालाबार फिशरीज कं., कालककट बनाम आयकर आयुक, क केरल 19 सितंबर, 1979 (पक. एन. भगवतक, वक. डी. तुलजापुरकर और आर. एि. पाठक, ज के. ज के.) िम्म ववघफटत हुई- भागकदरं क के बकच पररिंपव्तियं का ववतरण हुआ-ववतरण- कया य के असभवयवक आयकर असर अधिसनयम, 1961 की र अधिारा 34 (3)(ख) में वरण्मतानुिार पररिंपव्तियं क के ‘‘अनयथा हसतांतरण‘‘ क के रूप में मानकरंजाएगक। शब्ं और वाकयांशं क के अथ्म- हसतांतरण- इिका अथ्म- भागकदक के बकच पररिंपव्तियं का ववतरण- कया यह हसतांतरण ह - आयकरअसर अधिसनयम 1961 की र अधिारा 2 (47). अपकलाथ्, म मूल रूप ि के 1 अप् ल, 1959 को गफठत एक ववघफटत िम्म,रजिमें चार भागकदर शासमल थ के और ववसभनन नामं और श सलयं मेंअलग-अलग वयविाय करत के थ के। िम्म को 31 माच्म, 1963 को भंग करफदाया गया था और भागकदरं दारा और उनक के बकच सनिषपाफदात ववघटन ववल केख क के तहत, पहलक वयाविासयक िंसथा को भागकदरं में ि के एक दारा ल केसलया गया था, श केष िंसथा को दाो अनय भागकदरं दारा और चार थ केभागकदर को िम्म क के िभक वयविायं की पररिंपव्तियं में उनक के ववसशषश केयरं क के बदाल के में रासश प्ाप्त हुई थक। चार सनर अधिा्मरण वषर्धारण वर्षों 1960- 61 ि कें को सथावपत1963- 64 क के दाौरान िम्म न के मशकनरी की ववसभनन वसतफकया था, रजिक के िंबंर अधि में उि के असर अधिसनयम र अधिारा 33 क के तहत अपन केिंबंसर अधित कर सनर अधिा्मरणं में ववकाि छ मूट प्ाप्त हुई थक। 31 माच्म, 1963 को िम्म क के ववघटन पर, आयकर असर अधिकारी न के यहमाना फक मामल के में असर अधिसनयम की र अधिारा 34(3) (ख) लाग मू होतक ह कयंफकिम्म दारा उक र अधिारा में सनफदा्मष अवसर अधि क के भकतर मशकनरी की वबनर की बिक याहसतांतरण फकया गया था और उि असर अधिकारी न के असर अधिसनयम की 155 (5)क के काय्म करत के हुए उक म मयांकन वषर्धारण वर्षों क के सलए िम्म को दाी गई ववकाि छ मूटको वापि ल के सलया और इि प्कार भंग िम्म क के रखलाि िंशोर अधिन आदा केशपाररत फकए गए। ववघफटत िम्म दारा अपन के प मूव्मवत् भागकदरं में ि के एक क के मा के माधयम ि केकी गई अपकलं को अपकलकय िहायक आयुक दारा खाररज कर फदाया गयाथा और माना फक असर अधिसनयम की र अधिारा 155 (5) का उसचत रूप ि के लाग मूकी गई थक कयंफक मामलें में र अधिारा 34 (3)(ख) लाग मू होतक ह । आयकर अपकलकय नयायासर अधिकरण न के ववघफटत िम्म की अपकलं को यह मानत के हुए सवककार कर सलया फक असर अधिसनयम की र अधिारा 34(3)(ख) क के अथ्मक के भकतर ववघफटत िम्म क के भागकदरं क के असर अधिकारं क के िमायोजन ि के जुजुड़ केल केनदा केन में फकिक भक वबनर की बिक या हसतांतरण का कोई िवाल उ उतपनन ही नहींहोता, ल केफकन राजसव (प् उतयथ्) क के कहन के पर कान मून क के दाो प्रशं को उको उरंनयायालय को िंदासभ्मत फकया गया जो फक सनिमन ह न- (क) कया भागकदक के पारसपररक असर अधिकारं और प्ावर अधिानं में क केवल िमायोजन फकया गया थारजि कारणवश असर अधिसनयम की र अधिारा 34(3) क के प्ावर अधिान लाग मू मूनहीं थ के,और (ख) कया असर अधिसनयम की र अधिारा 34(3)(ख) में वरण्मत ‘अनयथाहसतांतररत‘ शब्ं क के अथ्म क के भकतर उक पररिंपव्तियं का हसतांतरण फकयागया था। उको उ नयायालय न के दा मूिर के प्रश का उ्तिर िकारा उतमक और सनर अधिा्मररतक क के रखलाि दा केत के हुए कहा फक फकिक िम्म का ववघटन िाझ केदरी की पररिंपव्तियंमें िम्म क के असर अधिकारं को िमाप्त करन के क के बराबर ह और तदानुिारअसर अधिसनयम की र अधिारा 2 (47) क के अथ्म क के भकतर यह एक हसतांतरण था औरइिसलए असर अधिसनयम की र अधिारा 34(3)(ख) क के प्ावर अधिान लाग मू फकए गए। इि नयायालय में अपकलं को अनुमसत दा केत के हुए, नयायालय न केअसभसनर अधिा्मररत फकया फक 1. िाझ केदरी िम्म क के ववघटन पर िाझ केदरी पररिंपव्तियं क के ववतरण क के िमय िम्म क के असर अधिकारं का उनम मूलन होन के पर भक पररिंपव्तियं का कोईहसतांतरण शासमल नहीं होता ह । 2. असर अधिसनयम की र अधिारा 34 (3) (ख) मामल के पर लाग मू नहीं होतक ह और नयायासर अधिकरण क के दृवषकोण को बरकरार रखा गया। 3. िाझ केदरी की पररिंपव्तियं में िम्म का अपना कोई अलग असर अधिकारनहीं होता ह , ल केफकन िाझ केदर ही िाझ केदरी की िंपव्तियं क के िंयुक रूप ि केमासलक होत के हैं और इिसलए, िाझ केदरं को िंपव्ति क के ववतरण, ववभाजन याआवंटन का पररणाम जो दा केनदररयं क के सनव्महन क के बादा प्वाफहत होता ह वहववघटन कु छ और नहीं बरूलक भागकदरं क के बकच असर अधिकारं का एकपारसपररक िमायोजन ह और असर अधिसनयम की र अधिारा 2(47) क के अथ्म क केभकतर पररिंपव्तियं क के हसतांतरण क के बराबर िाझ केदरी पररिंपव्तियं में िम्मक के असर अधिकारं क के िमाप्त होन के का कोई िवाल ही नहीं उठता ह । 4. र अधिारा 34(3)(ख) को पढ़न के पर यह सपष प्तकत होगा फक इि Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) MALABAR FISHERIES qo., CALICUT A v. COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA September 19, 1979 [P. N. BHAGWATI, V. D. TULZAPURKAR AND R. S. PATHAK, JJ.] 'B Firnz dissolred-Assets distributed among partner~Distribution-lf amounts to transfer of assets within the mecining of expression "otlierlvise transferred" in S. 34(3) (b) Income Tax Act 1961. Words and PhraSes-'Trarufer'-Meaning of-Distribution of assets c1nong partners-U[7]hether amounts to transfer-Income Tax Act 1961, S. 2(4i). c The appellant, a dissolved firm as originally constituted on April 1, 1959, consisted of four partners: and carried on different business in different names and styles. The firm was dissolved on March 31, 1963 and under the deed of dissolution executed by and between the partners, the first business concern was taken over by one of the partners, the remaining concerns by two of the other partners and the fourth partner received, a sum of money in lieu of his respec-tive shares in the assets of all the businesses of the firm. During the four assessment years 1960-61 to 1963-64 the firm had installed various items of machinery in respect of which it received development rebate in its respective tax assessments under s. 33 of the Acr. On dissolution of the firm on March 31, 1963, the Income-tax Officer took the view that s. 34(3)(b) of the Aot applied on the ground that there was a sale or transfer of the machinery by the firm within the period mentioned in that section and accordingly acting under s. 155(5) of the Act he withdrew the development rebate allowed to the firm for the said assessment years, the amending orders being passed against the dissolved firm. D E The appeals preferred by the dissolved firm through one of its erstwhile partners, were dismissed by the Appellate Assistant Commissioner who held F ·thats. 155(5) was rightly resorted to since s. 34(3)(b) of the Act applied to the case. The Income-tax Appellate Tribunal allowed the appeals by the dissolved firm holding that there was no question of any sale or transfer within the meaning of s. 34(3)(b) in a transaction involving the adjustment of the rights of the partners of a dissolved firm, but at the instance of the Revenue (Respon-dent) referred two questions of law to the iHigh Court viz. (a) whether there was only an adjustment of the mutual rights of the partners and the provisions of s. 34(3) were not applicable and (b) whether there was a transfer of assets within the meaning of the words 'otherwise transferred' occurring ins. 34(3) (b) of the Act .. G The High Court .answered the second question in the affirmative and against the assessee holding that a dissolution of-a firm amounted to extinguishment of the rights of the firm in the assets of the partnership and accordingly was a transfer within the meaning of s. 2(47) of the Act and that, therefore the provisions ,of s. 34(3)(b) applied to the case. n • > Allowing the appeals to this Court, l-JELD : 1. There is no transfer of assets involved even in the sense of any .... ·xtinguishn1cnt of the firm's rights in the partnership assets when distribution takes place upon dissolution. [709 F] 2. Section 34(3) (b) of the Act is not applicable to the case and the view of the Tribunal is upheld. [710 El 3. The firm as such has no separate rights of its own in the partnership assets but it is the partners who own jointly in common the assets of the· partner ship and, therefore, the consequence of the distribution, division or allotment of assets to the partners which flows upon dissolution after discharge of liabilities 1.is nothing but a mutual adjustment of rights between the partners and there is no question of any extinguishment of the firm's rights in the partnership 2.ssets :a.mounting to a transfer of assets within the meaning of s. 2(47) of the Act. [709 EJ Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) ਮਾਲਾਬਾਰ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਕੰਪਨੀ, ਕਾਲੀਕਟ ਬਨਾਮ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਕਮਮਸ਼ਨਰ, ਕੇਰਲ ਸਤੰਬਰ 19,1979 [ਪੀ. ਐੱਨ. ਭਾਗਵਤੀ, ਵੀ. ਡੀ. ਤੁਲਜਾਪੁਰਕਰ ਅਤੇ ਆਰ. ਐੱਸ. ਪਾਠਕ, ਜੇ. ਜੇ.] ਫਰਮ ਭੰਗ-ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਿੱਚ ਵੰਡੀਆਂ ਗਈਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ-ਵੰਡ-ਜੇ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਅਵਧਵਨਯਮ 1961 ਵਵਿੱਚ "ਹੋਰ ਤਬਦੀਲ" ਸਮੀਕਰਨ ਦੇ ਅਰਥ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਤਬਾਦਲੇ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ। ਸ਼ਬਦ ਅਤੇ ਵਾਕਾਂਸ਼-'ਤਬਾਦਲਾ'-ਦਾ ਅਰਥ-ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਿੱਚ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ-ਭਾਵੇਂ ਟਰਾਂਸਫਰ ਦੀ ਰਕਮ ਹੋਵੇ-ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਅਵਧਵਨਯਮ 1961, ਧਾਰਾ 2 (47)। ਅਪੀਲਕਰਤਾ, ਇਿੱਕ ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ, ਵਜਸ ਦਾ ਗਠਨ ਅਸਲ ਵਵਿੱਚ 1 ਅਪਰੈਲ, 1959 ਨ ੰ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ, ਵਵਿੱਚ ਚਾਰ ਭਾਈਵਾਲ ਸਨ ਅਤੇ ਵਿੱਖ-ਵਿੱਖ ਨਾਵਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ੈਲੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਵਿੱਖ-ਵਿੱਖ ਕਾਰੋਬਾਰ ਕਰਦੇ ਸਨ। ਫਰਮ ਨ ੰ 31 ਮਾਰਚ, 1963 ਨ ੰ ਭੰਗ ਕਰ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਸੀ ਅਤੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੁਆਰਾ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਵਵਚਕਾਰ ਲਾਗ ਕੀਤੇ ਗਏ ਭੰਗ ਕਰਨ ਦੇ ਦਸਤਾਵੇਜ਼ ਦੇ ਤਵਹਤ, ਪਵਹਲੀ ਵਪਾਰਕ ਵਚੰਤਾ ਨ ੰ ਇਿੱਕ ਭਾਈਵਾਲ ਦੁਆਰਾ ਸੰਭਾਵਲਆ ਵਗਆ ਸੀ, ਬਾਕੀ ਵਚੰਤਾਵਾਂ ਨ ੰ ਦੋ ਹੋਰ ਪਾਵਰਨਰਾਂ ਅਤੇ ਚੌਥੇ ਭਾਈਵਾਲ ਦੁਆਰਾ ਪਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ। ਫਰਮ ਦੇ ਸਾਰੇ ਕਾਰੋਬਾਰਾਂ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਉਸ ਦੇ ਵਵਸ਼ੇਸ਼ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੇ ਬਦਲੇ ਵਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਰਕਮ। ਚਾਰ ਮੁਲਾਂਕਣ ਸਾਲਾਂ 1960-61 ਤੋਂ 1963-64 ਦੌਰਾਨ ਫਰਮ ਨੇ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਦੀਆਂ ਵਿੱਖ-ਵਿੱਖ ਵਸਤਾਂ ਸਥਾਵਪਤ ਕੀਤੀਆਂ ਸਨ ਵਜਨਹਾਂ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਵਿੱਚ ਇਸ ਨ ੰ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 33 ਦੇ ਤਵਹਤ ਆਪਣੇ ਸਬੰਧਤ ਟੈਕਸ ਮੁਲਾਂਕਣਾਂ ਵਵਿੱਚ ਵਵਕਾਸ ਛੋਟ ਪਰਾਪਤ ਹੋਈ ਸੀ। 31 ਮਾਰਚ, 1963 ਨ ੰ ਫਰਮ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ 'ਤੇ ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਵਧਕਾਰੀ ਨੇ ਇਹ ਵਵਚਾਰ ਰਿੱਵਖਆ ਵਕ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਇਸ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਲਾਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਕ ਫਰਮ ਦੁਆਰਾ ਉਸ ਧਾਰਾ ਵਵਿੱਚ ਦਿੱਸੀ ਗਈ ਵਮਆਦ ਦੇ ਅੰਦਰ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਦੀ ਵਵਕਰੀ ਜਾਂ ਤਬਾਦਲਾ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ ਅਤੇ ਉਸ ਅਨੁਸਾਰ ਧਾਰਾ ਦੇ ਤਵਹਤ ਕੰਮ ਕਰ ਵਰਹਾ ਸੀ। ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 155 (5) ਵਵਿੱਚ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਕਵਥਤ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣ ਸਾਲਾਂ ਲਈ ਫਰਮ ਨ ੰ ਵਦਿੱਤੀ ਗਈ ਵਵਕਾਸ ਛੋਟ ਨ ੰ ਵਾਪਸ ਲੈ ਵਲਆ, ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੇ ਵਵਰੁਿੱਧ ਸੋਧ ਦੇ ਆਦੇਸ਼ ਪਾਸ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸਨ। ਭੰਗ ਕੀਤੀ ਗਈ ਫਰਮ ਦੁਆਰਾ ਆਪਣੇ ਪੁਰਾਣੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ ਰਾਹੀਂ ਪੇਸ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਅਪੀਲਾਂ ਨ ੰ ਅਪੀਲ ਸਹਾਇਕ ਕਵਮਸ਼ਨਰ ਦੁਆਰਾ ਖਾਰਜ ਕਰ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਸੀ, ਵਜਸ ਨੇ ਵਕਹਾ ਸੀ ਵਕ ਧਾਰਾ 155 (5) ਦਾ ਸਹੀ ਸਹਾਰਾ ਵਲਆ ਵਗਆ ਸੀ। ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਕੇਸ ਉੱਤੇ ਲਾਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਇਨਕਮ-ਫੈਕਸ ਅਪੀਲ ਵਟਰਵਬਊਨਲ ਨੇ ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੀਆਂ ਅਪੀਲਾਂ ਨ ੰ ਇਹ ਕਵਹੰਦੇ ਹੋਏ ਮਨਜ਼ ਰੀ ਦੇ ਵਦਿੱਤੀ ਵਕ ਦੇ ਅਰਥ ਦੇ ਅੰਦਰ ਵਕਸੇ ਵੀ ਵਵਕਰੀ ਜਾਂ 'ਟਰਾਂਸਫਰ' ਦਾ ਕੋਈ ਸਵਾਲ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। 34 (3) (ਬੀ) ਇਿੱਕ ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਦੇ ਸਮਾਯੋਜਨ ਨਾਲ ਜੁਡੇ ਇਿੱਕ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਵਵਿੱਚ, ਪਰ ਮਾਲ (ਜਵਾਬ) ਦੇ ਇਸ਼ਾਰੇ 'ਤੇ ਕਾਨ ੰਨ ਦੇ ਦੋ ਸਵਾਲ ਉੱਚ ਅਦਾਲਤ ਨ ੰ ਭੇਜੇ ਗਏ ਹਨ। (ਏ) ਕੀ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੇ ਆਪਸੀ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਅਤੇ ਐਸ ਦੇ ਪਰਬੰਧਾਂ ਵਵਿੱਚ ਵਸਰਫ ਇਿੱਕ ਵਵਵਸਥਾ ਸੀ। 34 (3) ਲਾਗ ਨਹੀਂ ਸਨ ਅਤੇ (ਬੀ) ਕੀ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਵਵਿੱਚ ਆਉਣ ਵਾਲੇ 'ਹੋਰ ਤਬਦੀਲ' ਸ਼ਬਦਾਂ ਦੇ ਅਰਥ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦਾ ਤਬਾਦਲਾ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ। ਉੱਚ ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਦ ਜੇ ਸਵਾਲ ਦਾ ਜਵਾਬ ਹਾਂ ਵਵਿੱਚ ਅਤੇ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੇ ਵਵਰੁਿੱਧ ਵਦਿੱਤਾ ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਵਕਹਾ ਵਗਆ ਸੀ ਵਕ ਇਿੱਕ ਫਰਮ ਦਾ ਭੰਗ ਹੋਣਾ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਫਰਮ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਨ ੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਅਨੁਸਾਰ ਦੇ ਅਰਥ ਦੇ ਅੰਦਰ ਇਿੱਕ ਤਬਾਦਲਾ ਸੀ। ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 2 (47) ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਦੇ ਉਪਬੰਧ ਮਾਮਲੇ 'ਤੇ ਲਾਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। 696 ਇਸ ਅਦਾਲਤ ਵਵਿੱਚ ਅਪੀਲਾਂ ਦੀ ਆਵਗਆ ਵਦੰਦੇ ਹੋਏ, ਆਯੋਵਜਤ: 1. ਜਦੋਂ ਵੰਡ ਭੰਗ ਹੋਣ ਉੱਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਭਾਈਵਾਲੀ ਸੰਪਤੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਫਰਮ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਨ ੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਦੇ ਅਰਥ ਵਵਿੱਚ ਵੀ ਸ਼ਾਮਲ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦਾ ਕੋਈ ਤਬਾਦਲਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ। [709 -ਐਫ] 2. ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਕੇਸ ਉੱਤੇ ਲਾਗ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਅਤੇ ਵਟਰਵਬਊਨਲ ਦੇ ਵਦਰਸ਼ਟੀਕੋਣ ਨ ੰ ਬਰਕਰਾਰ ਰਿੱਵਖਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। [710-ਈ] 3. ਇਸ ਤਰਹਾਂ ਫਰਮ ਦਾ ਭਾਈਵਾਲੀ ਸੰਪਤੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਵਿੱਖਰਾ ਅਵਧਕਾਰ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਉਹਨਾਂ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਨ ੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਭਾਈਵਾਲ ਜਹਾਜ਼ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਮਾਲਕ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ, ਵੰਡ ਦਾ ਨਤੀਜਾ, ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਨ ੰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਜਾਂ ਵੰਡ ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਲਾਇਵਬਲਟੀ ਦੇ ਵਡਸਚਾਰਜ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਭੰਗ ਹੋਣ 'ਤੇ ਘਿੱਟ ਇਹ ਹੋਰ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਬਲਵਕ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਦੀ ਆਪਸੀ ਵਵਵਸਥਾ ਹੈ। ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਚਕਾਰ ਅਤੇ ਵਕਸੇ ਦਾ ਵੀ ਕੋਈ ਸਵਾਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕੰਪਨੀ ਵਵਿੱਚ ਕੰਪਨੀ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਨ ੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਆਰਵਸ਼ਪ ਸੰਪਤੀਆਂ ਜੋ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਤਬਾਦਲੇ ਲਈ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 2 (47) ਦਾ ਅਰਥ ਦਿੱਸੋ।[709-ਈ] Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) 1980-1-696-710 നിരാകരണപത്രം പ്രാദേശികഭാഷയില്‍ വിവര്‍ത്തനം ചെയ്ത വിധിന്യായം നിര്‍മ്മിത ബുദ്ധ്യാധിഷ്ഠിത വിവര്‍ത്തന ഉപകരണത്തിന്‍റെ സഹായത്തോടെ കേരള ഹൈക്കോടതിയിലെ ഐ.റ്റി. ഡയറക്ടറേറ്റ് സാധൂകരിച്ചിട്ടുള്ളതാണ്. എന്നിരുന്നാലും, ഇതിന്‍റെ ഉളളടക്കത്തില്‍ ആശയപരമായോ സാംഗത്യപരമായോ വ്യാകരണപരമായോ ആഖ്യാനപരമായോ തെറ്റുകള്‍ കടന്നു കൂടാന്‍ സാധ്യതയുളളതാണ്. ഈ തര്‍ജ്ജമ കേവലം വ്യവഹാരകക്ഷികളുടെയും പൊതുജനങ്ങളുടെയും പൊതുവായ അറിവിലേക്ക് ഉപയോഗപ്പെടുത്തുവാന്‍ വേണ്ടി മാത്രം ഉദ്ദേശിച്ചിട്ടുള്ളതുമാണ്‌. ഔദ്യോഗികവും പ്രായോഗികവുമായ എല്ലാ ആവശ്യങ്ങള്‍ക്കും വിധി നിര്‍വഹണ നടപ്പാക്കലുകള്‍ക്കും പ്രസ്ു വിധിന്യായത്തിന്‍റെ ഇംഗ്ലീഷ് പതിപ്പ് ആധികാരികവും അന്തിമവും ആയിരിക്കും. 1980-1-696-710 മലബാർ ഫിഷറീസ് കമ്പനി, കൽക്കട്ട v. ഇൻകം ടാക്സ് കമ്മീഷണർ, കേരളം. 1979 സെപ്റ്റംബർ 19 [ജസ്റ്റിസ് പി.എൻ. ഭഗവതി, ജസ്റ്റിസ് വി.ഡി. തുൽസാപുർക്കർ, ജസ്റ്റിസ് ആർ.എസ്. പഥക്] സ്ഥാപനം പിരിച്ചുവിട്ടു - ആസ്തികൾ പങ്കാളികൾക്കിടയിൽ വിതരണം ചെയ്തു - വിതരണം - 1961 ലെ ആദായനികുതി നിയമം, വകുപ്പ് 34(3)(ബി)-യിൽ "മറ്റുവിധത്തിൽ കൈമാറ്റം ചെയ്യപ്പെട്ടു" എന്നതിന്റെ അർത്ഥത്തിൽ ആസ്തികൾ കൈമാറ്റം ചെയ്യുന്നതാണെങ്കിൽ. - വാക്ുളും ശൈലികളും - 'കൈമാറ്റം' --അർത്‌ഥം - പങ്കാളികൾക്കിടയിലുള്ള ആസ്തി വിതരണം - കൈമാറ്റമാകുമോ1961ലെ ആദായ നികുതി നിയമം, വകുപ്പ് 2(47). അപ്പീൽവാദി, 1959 ഏപ്രിൽ 1-ന് സ്ഥാപിതമായ, നിലവിൽ പിരിച്ചുവിട്ട ഒരു സ്ഥാപനത്തിൽ നാല് പങ്കാളികൾ ഉണ്ടായിരുന്നു, വ്യത്യസ്ത പേരുകളിലും ശൈലികളിലും വ്യത്യസ്ത ഇടപാടുകൾ നടത്തി. 1963 മാർച്ച് 31-ന് സ്ഥാപനം പിരിച്ചുവിടുകയും പങ്കാളികൾ തമ്മിൽ നടപ്പിലാക്കിയ പിരിച്ചുവിടൽ കരാർ പ്രകാരം, ആദ്യത്തെ ഇടപാട് കമ്പനി പങ്കാളികളിൽ ഒരാൾ ഏറ്റെടുക്ുയും, ബാക്കിയുള്ള കമ്പനികൾ മറ്റ് രണ്ട് കമ്പനികൾ ഏറ്റെടുക്ുയും നാലാമത്തെ പങ്കാളിക്ക് സ്ഥാപനത്തിന്റെ എല്ലാ ഇടപാടുകളുടെയും ആസ്തികളിലെ അദ്ദേഹത്തിന്റെ ഓഹരികൾക്ക് പകരമായി ഒരു തുക കൈപ്പറ്റുകയും ചെയ്തു. 1960-61 മുതൽ 1963-64 വരെയുള്ള നാല് വിലയിരുത്തൽ വർഷങ്ങളിൽ, പ്രസ്‌തുത നിയമത്തിന്റെ വകുപ്പ് 33 പ്രകാരമുള്ള നികുതി വിലയിരുത്തലുകളിൽ വികസന ഇളവ് ലഭിച്ച വിവിധ യന്ത്രസാമഗ്രികൾ സ്ഥാപനം സ്ഥാപിച്ചു. 1963 മാർച്ച് 31-ന് സ്ഥാപനം പിരിച്ചുവിട്ടപ്പോൾ, പ്രസ്‌തുത നിയമത്തിലെ വകുപ്പ് 34(3)(b) പ്രകാരം, വകുപ്പിൽ പരാമർശിച്ചിരിക്കുന്ന കാലയളവിനുള്ളിൽ സ്ഥാപനം യന്ത്രസാമഗ്രികളുടെ വിൽപ്പനയോ കൈമാറ്റമോ നടത്തിയതായി കണക്കയും അതനുസരിച്ച്, നിയമത്തിലെ വകുപ്പ് 155(5) പ്രകാരം പ്രവർത്തിക്ുയും ചെയ്തുകൊണ്ട്, പ്രസ്ു 1980-1-696-710 മൂല്യനിർണ്ണയ വർഷങ്ങളിൽ സ്ഥാപനത്തിന് അനുവദിച്ച വികസന ഇളവ് പിൻവലിച്ചു. ഭേദഗതി ഉത്തരവുകൾ പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനത്തിനെതിരെ പാസാക്കപ്പെട്ടു. പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനം അതിന്റെ മുൻ പങ്കാളികളിൽ ഒരാൾ മുഖേന സമർപ്പിച്ച അപ്പീലുകൾ, പ്രസ്ു നിയമത്തിലെ വകുപ്പ് 34(3)(b), കേസിൽ ബാധകമായതിനാൽ 155(5)-ആം വകുപ്പ് ശരിയായി അവലംബിച്ചിട്ടുണ്ടെന്ന് വിധി കല്പിച്ച അപ്പീൽ അസിസ്റ്റന്റ് കമ്മീഷണർ തള്ളിക്കളഞ്ഞു. പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനത്തിന്റെ പങ്കാളികളുടെ അവകാശങ്ങളുടെ ക്രമീകരണം ഉൾപ്പെടുന്ന ഒരു ഇടപാടിൽ, വകുപ്പ് 34(3)(b)-യുടെ അർത്ഥത്തിൽ വിൽപ്പനയോ കൈമാറ്റമോ സംബന്ധിച്ച ഒരു ചോദ്യവുമില്ലെന്ന് വിധിച്ച പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനത്തിന്റെ അപ്പീലുകൾ ആദായനികുതി അപ്പലേറ്റ് ട്രൈബ്യൂണൽ അനുവദിച്ചു, എന്നാൽ റവന്യൂ (എതിർകക്ഷി)യുടെ പ്രേരണയിൽ, നിയമത്തിലെ രണ്ട് ചോദ്യങ്ങൾ ഹൈക്കോടതിക്ക് സമർപ്പിച്ചു, അതായത് (a) പങ്കാളികളുടെ പരസ്പര അവകാശങ്ങളുടെ ക്രമീകരണം മാത്രമാണോ, വകുപ്പ് 34(3)-ലെ വ്യവസ്ഥകൾ ബാധകമല്ല, (b) നിയമത്തിലെ വകുപ്പ് 34(3) (b) ൽ വരുന്ന 'മറ്റൊരു വിധത്തിൽ കൈമാറ്റം' എന്ന വാക്ുളുടെ അർത്ഥത്തിൽ ആസ്തി കൈമാറ്റം നടന്നിട്ടുണ്ടോ. രണ്ടാമത്തെ ചോദ്യത്തിന് സ്ഥിരീകരണമായും നികുതിദായകന് പ്രതികൂലമായും ഹൈക്കോടതി ഉത്തരം നൽകി. ഒരു സ്ഥാപനത്തിന്റെ പിരിച്ചുവിടൽ പങ്കാളിത്ന്റെ ആസ്തികളിലുള്ള സ്ഥാപനത്തിന്റെ അവകാശങ്ങൾ ഇല്ലാതാക്കുന്നതിന് തുല്യമാണെന്നും അതനുസരിച്ച് നിയമത്തിലെ വകുപ്പ് 2(47) ന്റെ അർത്ഥത്തിൽ ഒരു കൈമാറ്റമാണെന്നും അതിനാൽ വകുപ്പ് 34(3)(b) യിലെ വ്യവസ്ഥകൾ കേസിൽ ബാധകമാണെന്നും കോടതി വിധിച്ചു. ഈ കോടതിയിൽ അപ്പീലുകൾ അനുവദിക്കുന്നതിലൂടെ, വിധിച്ചു : 1. പങ്കാളിത്ത ആസ്തികൾ പിരിച്ചുവിടുമ്പോൾ വിതരണം നടത്തിയാൽ , പങ്കാളിത്ത ആസ്തികളിലുള്ള സ്ഥാപനത്തിന്റെ അവകാശങ്ങൾ നഷ്ടപ്പെടുന്ന സാഹചര്യത്തിൽ പോലും, ആസ്തി കൈമാറ്റം ഉൾപ്പെടുന്നില്ല. [709 എഫ് ]. 2. നിയമത്തിലെ 34(3)(b) വകുപ്പ് കേസിന് ബാധകമല്ല, കൂടാതെ ട്രൈബ്യൂണലിന്റെ വീക്ഷണം ശരിവയ്ക്കുന്നു. [710 ഇ]. Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) ഈ കോടതിയിൽ അപ്പീലുകൾ അനുവദിക്കുന്നതിലൂടെ, വിധിച്ചു : 1. പങ്കാളിത്ത ആസ്തികൾ പിരിച്ചുവിടുമ്പോൾ വിതരണം നടത്തിയാൽ , പങ്കാളിത്ത ആസ്തികളിലുള്ള സ്ഥാപനത്തിന്റെ അവകാശങ്ങൾ നഷ്ടപ്പെടുന്ന സാഹചര്യത്തിൽ പോലും, ആസ്തി കൈമാറ്റം ഉൾപ്പെടുന്നില്ല. [709 എഫ് ]. 2. നിയമത്തിലെ 34(3)(b) വകുപ്പ് കേസിന് ബാധകമല്ല, കൂടാതെ ട്രൈബ്യൂണലിന്റെ വീക്ഷണം ശരിവയ്ക്കുന്നു. [710 ഇ]. 3. പങ്കാളിത്ത ആസ്തികളിൽ സ്ഥാപനത്തിന് സ്വന്തമായി പ്രത്യേക അവകാശങ്ങളില്ല, പക്ഷേ പങ്കാളികളുടെ ആസ്തികൾ സംയുക്തമായി പൊതുവായി സ്വന്തമാക്കുന്നത് പങ്കാളികളാണ്, അതിനാൽ, ബാധ്യതകൾ തീർന്നതിനുശേഷം പിരിച്ചുവിടുമ്പോൾ പങ്കാളികൾക്ക് ആസ്തികൾ വിതരണം ചെയ്യുന്നതിനോ വിഭജിക്കുന്നതിനോ അനുവദിക്കുന്നതിനോ ഉള്ള അനന്തരഫലങ്ങൾ പങ്കാളികൾ തമ്മിലുള്ള അവകാശങ്ങളുടെ പരസ്പര ക്രമീകരണമല്ലാതെ മറ്റൊന്നുമല്ല, കൂടാതെ 1980-1-696-710 നിയമത്തിലെ 2(47) ആം വകുപ്പിന്റെ അർത്ഥത്തിൽ, ആസ്തി കൈമാറ്റത്തിന് തുല്യമായ പങ്കാളിത്ത ആസ്തികളിൽ സ്ഥാപനത്തിന്റെ അവകാശങ്ങൾ ഇല്ലാതാക്കുന്നതിനെക്കുറിച്ചുള്ള ഒരു ചോദ്യവുമില്ല. [709 ഇ] 4. വകുപ്പ് 34(3) (ബി)-യെ ഒരു ലളിതമായ വായനയിൽ മനസിലാക്ു ആണെങ്കിൽ, ആ വ്യവസ്ഥ നടപ്പിലാക്കാനോപ്രയോഗിക്കാനോ കഴിയുന്നതിന് മുമ്പ് മൂന്ന് വ്യവസ്ഥകൾ പാലിക്കേണ്ടതുണ്ട് എന്ന് വ്യക്തമാകും: (എ) കപ്പൽ, യന്ത്രങ്ങൾ അല്ലെങ്കിൽ പ്ലാന്റ് വിൽക്ുയോ മറ്റേതെങ്കിലും രീതിയിൽ കൈമാറ്റം ചെയ്യുകയോ ചെയ്തിരിക്കണം, (ബി) അത്തരമൊരു വിൽപ്പനയോ കൈമാറ്റമോ വിലയിരുത്തുന്നയാൾ നടത്തണം, (സി) അത് ഏറ്റെടുക്ുയോ സ്ഥാപിക്ുയോ ചെയ്ത മുൻ വർഷത്തിന്റെ അവസാനം മുതൽ എട്ട് വർഷം അവസാനിക്കുന്നതിന് മുമ്പ് ആയിരിക്കണം. ഈ മൂന്ന് വ്യവസ്ഥകളും പാലിക്കപ്പെടുമ്പോൾ മാത്രമേ 33 ആം വകുപ്പ് പ്രകാരം നൽകിയ ഏതെങ്കിലും ആനുകൂല്യം തെറ്റായി നൽകിയതായി കണക്ാ, കൂടാതെ 155(5) ആം വകുപ്പ് പ്രകാരം പ്രവർത്തിക്കുന്ന ആദായനികുതി ഉദ്യോഗസ്ഥന് അത്തരം ആനുകൂല്യം പിൻവലിക്കാൻ അർഹതയുണ്ടായിരിക്കും. [703 സി-ഡി]. 5. 'കൈമാറ്റം' എന്ന പ്രയോഗത്തിന് 2(47) വകുപ്പ് കൃത്രിമമായ ഒരു വിപുലീകൃത അർത്ഥം നൽകുന്നു, കാരണം, അതിൽ 'വില്പന', 'കൈമാറ്റം' എന്നീ ഇടപാടുകൾ മാത്രമല്ല ഉൾപ്പെടുന്നത്, സാധാരണ ഭാഷയിൽ കൈമാറ്റം എന്നാണ് അർത്ഥമാക്കുന്നത്, എന്നാൽ 'ഉപേക്ഷിക്കൽ' അല്ലെങ്കിൽ 'അവകാശങ്ങൾ ഇല്ലാതാക്കൽ' എന്നിവയും ഉൾപ്പെടുന്നു, എന്നാൽ, ഇവ സാധാരണയായി ആ ആശയത്തിൽ ഉൾപ്പെടുന്നില്ല. [703 ഇ]. 6. കമ്മീഷണർ ഓഫ് ഇൻകം ടാക്സ് v. ദേവസ്‌ സിനി കോർപറേഷൻ (68 ഐ. റ്റി. ആർ. 240), എന്ന വിധിയിൽ 1922 ലെ ഇന്ത്യൻ ആദായ നികുതി നിയമത്തിലെ 10(2) (vii)-ആം വകുപ്പിലെ രണ്ടാമത്തെ വ്യവസ്ഥ പ്രകാരം ഉണ്ടാകുന്ന ബാക്കിയുള്ള ഈടിന്റെ പശ്ചാത്തലത്തിലാണ് സ്ഥാപനം പിരിച്ചുവിടുമ്പോൾ ഉണ്ടാകുന്ന ആസ്തി വിതരണത്തെക്കുറിച്ചുള്ള ആശയം പരിഗണിച്ചത്. 10(2)(vii) വകുപ്പിലും അതിലെ രണ്ടാമത്തെ വ്യവസ്ഥയിലും "വില്പന അല്ലെങ്കിൽ വിറ്റു " എന്ന പ്രയോഗം ഉപയോഗിക്കുമ്പോൾ അവയുടെ സാധാരണ അർത്ഥത്തിൽ മനസ്സിലാക്കണമെന്നും "വില്പന" എന്നത് അതിന്റെ സാധാരണ അർത്ഥമനുസരിച്ച് ഒരു വിലയ്ക്ക് സ്വത്ത് കൈമാറ്റം ചെയ്യുന്നതിനെയാണ് അർത്ഥമാക്കുന്നതെന്നും കടങ്ങളും ബാധ്യതകളും തീർത്ത ശേഷം ഒരു പങ്കാളിത്തം പിരിച്ചുവിടുമ്പോൾ മിച്ചം വിതരണം ചെയ്യുന്നത് എല്ലായ്പ്പോഴും പങ്കാളിത്ന്റെ ആസ്തികളിൽ പങ്കാളികളുടെ അവകാശങ്ങൾ ക്രമീകരിക്കുന്നതിലൂടെയാണെന്നും മൂല്യം കുറഞ്ഞ കൈമാറ്റം എന്നതിന് തുല്യമല്ലെന്നും ഈ നിർദ്ദേശം വിശദീകരിച്ചു. മുൻ വർഷങ്ങളിൽ മൂല്യത്തകർച്ച അനുവദിച്ചിരുന്ന ഒരു പ്രത്യേക നികുതി വിധേയ സ്ഥാപനമായ പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനത്തിനെതിരെ ബാക്കിയുള്ള ഈട് ഉയർത്തുന്നതിനെക്കുറിച്ചുള്ള ചോദ്യവും കോടതി പരിഗണിച്ചു, സ്ഥാപനം പിരിച്ചുവിട്ടതിനെത്തുടർന്ന് കമ്പനിയുടെ മുൻ പങ്കാളികൾക്ക് ആസ്തികൾ 1980-1-696-710 വിതരണം ചെയ്യുന്ന ഇടപാടിൽ വില്പനയോ കൈമാറ്റമോ ഉൾപ്പെട്ടിട്ടില്ലാത്നാൽ സ്ഥാപനത്തിനെതിരെ ഒരു ബാക്കിയുള്ള ഈട് ഉയർന്നുവന്നിട്ടില്ലെന്ന് കോടതി വീക്ഷിച്ചു. [703ജി, 704 ഇ-ജി]. 7. ബാൻകീ ലാൽ വൈദ്യ, (79 ഐ. റ്റി. ആർ. 594), എന്ന കോടതി വിധിയിൽ ഒരു സ്ഥാപനത്തിന്റെ പിരിച്ചുവിടലിനെത്തുടർന്ന് പങ്കാളികൾക്ക് ആസ്തികൾ വിതരണം ചെയ്യുന്ന ആശയം, 1922ലെ നിയമത്തിലെ 128(1)-ആം വകുപ്പ് പ്രകാരം ഉണ്ടാകുന്ന മൂലധന നേട്ടങ്ങളുടെ മൂല്യത്തിന്റെ പശ്ചാത്തലത്തിൽ പരിഗണിക്കപ്പെട്ടു. പങ്കാളികളിൽ ഒരാൾക്ക് മുഴുവൻ ആസ്തികളും മറ്റേ പങ്കാളിക്ക് അയാളുടെ ഓഹരിയുടെ പണമൂല്യവും കൈമാറുന്നതിലൂടെ കക്ഷികളുടെ അവകാശങ്ങൾ ക്രമീകരിക്കപ്പെട്ടുവെന്ന് ഈ കോടതി നിരീക്ഷിച്ചു, അത്തരമൊരു ഇടപാട് സ്ഥാപനത്തിന്റെ ആസ്തികളുടെ വില്പനയോ വിനിമയമോ ആസ്തിയുടെ കൈമാറ്റമോ അല്ല. [704 എച്ച്, 705 ഡി]. 8. (i) ഒരു വശത്ത് വാണിജ്യ വ്യക്തികൾക്കും കണക്കുപരിശോധകർക്കും മറുവശത്ത് അഭിഭാഷകർക്കും സ്ഥാപനത്തിന്റെ സ്വഭാവത്തെക്കുറിച്ച് വ്യത്യസ്ത ധാരണകളുണ്ടെന്ന് എല്ലാവർക്കും നന്നായി അറിയാം. [705 എച്ച്]. Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) 4. ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ) ਦੇ ਇਿੱਕ ਸਾਦੇ ਪਡਹਨ ਉੱਤੇ ਇਹ ਸਪਿੱਸ਼ਟ ਵਦਖਾਈ ਦੇਵੇਗਾ ਵਕ ਉਸ ਪਰਬੰਧ ਨ ੰ ਲਾਗ ਕਰਨ ਜਾਂ ਲਾਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਵਹਲਾਂ ਵਤੰਨ ਸ਼ਰਤਾਂ ਨ ੰ ਪ ਰਾ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋਡ ਹੁੰਦੀ ਹ (ਏ) ਵਕ ਜਹਾਜ਼, ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਜਾਂ ਪਲਾਂਟ ਵੇਵਚਆ ਜਾਂ ਹੋਰ ਤਬਦੀਲ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, (ਬੀ) ਅਵਜਹੀ ਵਵਕਰੀ ਜਾਂ ਤਬਾਦਲਾ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ (ਸੀ) ਇਹ ਉਸ ਵਪਛਲੇ ਸਾਲ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅਿੱਠ ਸਾਲ ਦੀ ਵਮਆਦ ਖਤਮ ਹੋਣ ਤੋਂ ਪਵਹਲਾਂ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਇਸ ਨ ੰ ਪਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ ਜਾਂ ਸਥਾਵਪਤ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ। ਜਦੋਂ ਇਹ ਵਤੰਨ ਸ਼ਰਤਾਂ ਪ ਰੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਤਾਂ ਧਾਰਾ 33 ਤਵਹਤ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਕੋਈ ਭਿੱਤਾ ਗਲਤ ਢੰਗ ਨਾਲ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਮੰਵਨਆ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਧਾਰਾ 155 (5) ਤਵਹਤ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਵਧਕਾਰੀ ਅਵਜਹਾ ਭਿੱਤਾ ਵਾਪਸ ਲੈਣ ਦਾ ਹਿੱਕਦਾਰ ਹੋਵੇਗਾ। [703 ਸੀ-ਡੀ] 5. ਧਾਰਾ 2 (47) 'ਟਰਾਂਸਫਰ' ਸਮੀਕਰਨ ਨ ੰ ਇਿੱਕ ਨਕਲੀ ਵਵਸਵਤਰਤ ਅਰਥ ਵਦੰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਵਵਿੱਚ ਵਸਰਫ਼ 'ਵਵਕਰੀ' ਅਤੇ 'ਐਕਸਚੇਂਜ' ਦੇ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਸ਼ਾਮਲ ਨਹੀਂ ਹਨ, ਵਜਨਹਾਂ ਦਾ ਆਮ ਬੋਲਚਾਲ ਵਵਿੱਚ ਮਤਲਬ ਤਬਾਦਲਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਬਲਵਕ 'ਵਤਆਗ' ਜਾਂ 'ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਦਾ ਖਾਤਮਾ' ਵੀ ਸ਼ਾਮਲ ਹੈ ਜੋ ਆਮ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਉਸ ਸੰਕਲਪ ਵਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਨਹੀਂ ਹਨ। [703 ਈ] 6. ਆਮਦਨ ਕਰ ਕਵਮਸ਼ਨ ਬਨਾਮ ਦੇਵਾਸ ਵਸਨੇ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ, 68 ਆਈ. ਟੀ. ਆਰ. ਵਵਿੱਚ। 240, ਫਰਮ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਦੀ ਧਾਰਨਾ ਨ ੰ ਸੈਕੰਡਾਂ ਦੇ ਦ ਜੇ ਪਰਾਵਧਾਨ ਦੇ ਤਵਹਤ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸੰਤੁਲਨ ਚਾਰਜ ਦੇ ਸੰਦਰਭ ਵਵਿੱਚ ਵਵਚਾਵਰਆ ਵਗਆ ਸੀ। ਇਸ ਅਦਾਲਤ ਨੇ 1922 ਦੇ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 10 (2) (vii) ਵਵਿੱਚ ਵਕਹਾ ਵਕ "ਵਵਕਰੀ ਜਾਂ ਵਵਕਰੀ" ਸ਼ਬਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਜਦੋਂ ਧਾਰਾ ਵਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। 10 (2) (vii) ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਦ ਜੇ ਪਰਾਵਧਾਨ ਨ ੰ 'ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਆਮ ਅਰਥ ਵਵਿੱਚ ਸਮਵਝਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਆਮ ਅਰਥ ਅਨੁਸਾਰ' ਵਵਕਰੀ 'ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਇਿੱਕ ਕੀਮਤ' ਤੇ ਸੰਪਤੀ ਦਾ ਤਬਾਦਲਾ, ਅਤੇ ਉਸ ਨੇ ਇਹ ਪਰਸਤਾਵ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਵਕ ਵੰਡ ਇਿੱਕ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ ਉੱਤੇ ਸਰਪਲਿੱਸ ਡੈਵਬਟ ਅਤੇ ਵਜ਼ੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਦਾ ਪਾਲਣ ਕਰਨਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਹੁੰਦਾ ਸੀ ਵਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਦੀ ਵਵਵਸਥਾ ਦੁਆਰਾ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਅਤੇ ਇਿੱਕ ਦੀ ਰਕਮ ਨਹੀਂ ਇਿੱਕ ਕੀਮਤ ਲਈ ਬਹੁਤ ਘਿੱਟ ਟਰਾਂਸਫਰ ਕਰੋ, ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੇ ਵਵਰੁਿੱਧ ਇਿੱਕ ਸੰਤੁਲਨ ਚਾਰਜ ਵਧਾਉਣ ਦਾ ਸਵਾਲ, ਇਿੱਕ ਵਿੱਖਰੀ ਟੈਕਸਯੋਗ ਇਕਾਈ ਵਜਸ ਨ ੰ ਵਪਛਲੇ ਸਾਲਾਂ ਵਵਿੱਚ ਘਿੱਟ ਕਰਨ ਦੀ ਆਵਗਆ ਵਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਇਸ 'ਤੇ ਵੀ ਵਵਚਾਰ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਇਹ ਵਵਚਾਰ ਰਿੱਵਖਆ ਵਕ ਫਰਮ ਵਵਰੁਿੱਧ ਕੋਈ ਸੰਤੁਲਨ ਦੋਸ਼ ਪੈਦਾ ਨਹੀਂ ਹੋਇਆ ਵਕਉਂਵਕ ਇਸ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਫਰਮ ਦੇ ਪੁਰਾਣੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਨ ੰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਦੇ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਵਵਿੱਚ ਕੋਈ ਵਵਕਰੀ ਜਾਂ ਤਬਾਦਲਾ ਸ਼ਾਮਲ ਨਹੀਂ ਸੀ। [703ਜੀ, 704 ਈ-ਜੀ] 7. ਬਾਂਕੇ ਲਾਲ ਵੈਵਦਆ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਵਿੱਚ, 79 ਆਈ. ਟੀ. ਆਰ. 594, ਇਸ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਵਕਸੇ ਫਰਮ ਦੇ ਪੈਰੀਨਰਾਂ ਨ ੰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਦੀ ਧਾਰਨਾ ਨ ੰ 'ਐਸ ਦੇ ਤਵਹਤ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਪ ੰਜੀ ਲਾਭ' ਤੇ ਚਾਰਜ ਦੇ ਸੰਦਰਭ ਵਵਿੱਚ ਵਵਚਾਵਰਆ ਵਗਆ ਸੀ। 1922 ਦੀ ਧਾਰਾ 128 (1) ਏ. ਇਸ ਅਦਾਲਤ ਨੇ ਵਕਹਾ ਵਕ ਵਧਰਾਂ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਨ ੰ ਸੌਂਪ ਕੇ ਐਡਜਸਟ ਕੀਤਾ ਵਗਆ ਸੀ। ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ ਨ ੰ ਸਮੁਿੱਚੀ ਸੰਪਤੀ ਅਤੇ ਦ ਜੇ ਭਾਈਵਾਲ ਨ ੰ ਉਸ ਦੇ ਵਹਿੱਸੇ ਦਾ ਮੁਦਰਾ ਮੁਿੱਲ ਅਤੇ ਅਵਜਹਾ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਨਾ ਤਾਂ ਫਰਮ ਦੀ ਸੰਪਤੀ ਦੀ ਵਵਕਰੀ, ਨਾ ਹੀ ਵਟਾਂਦਰਾ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਤਬਾਦਲਾ ਸੀ। [704 ਐਚ, 705 ਡੀ] 8. (i) ਇਹ ਚੰਗੀ ਤਰਹਾਂ ਜਾਵਣਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਕ ਇਿੱਕ ਪਾਸੇ ਵਪਾਰਕ ਆਦਮੀਆਂ ਅਤੇ ਲੇਖਾਕਾਰਾਂ ਅਤੇ ਦ ਜੇ ਪਾਸੇ ਵਕੀਲਾਂ ਦੇ ਫਰਮ ਦੀ ਪਰਵਕਰਤੀ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਵਿੱਚ ਵਿੱਖ-ਵਿੱਖ ਵਵਚਾਰ ਹਨ। [705 ਐਚ] (ii) ਵਪਾਰਕ ਆਦਮੀ ਅਤੇ ਲੇਖਾਕਾਰ ਇਿੱਕ ਫਰਮ ਨ ੰ ਉਸ ਰੋਸ਼ਨੀ ਵਵਿੱਚ ਵੇਖਣ ਦੇ ਯੋਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਵਕੀਲ ਇਿੱਕ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ ਨ ੰ ਵੇਖਦੇ ਹਨ ਭਾਵ. ਇਸ ਨ ੰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਤੋਂ ਵਿੱਖਰੀ ਸੰਸਥਾ ਵਜੋਂ, ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਤੋਂ ਵਿੱਖਰੇ ਅਵਧਕਾਰ ਅਤੇ ਵਜ਼ੰਮੇਵਾਰੀਆਂ ਹਨ। [706 ਬੀ] (iii) ਫਰਮ ਨ ੰ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਵਕੀਲਾਂ ਦੁਆਰਾ ਇਸ ਤੋਂ ਵਿੱਖਰਾ ਨਹੀਂ ਮੰਵਨਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰਚਨਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਮੈਂਬਰ ਵਜਸ ਨ ੰ ਫਰਮ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਵਕਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਉਹ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਹੈ, ਅਤੇ ਫਰਮ ਦੇ ਕਰਜ਼ੇ ਅਤੇ ਦੇਣਦਾਰੀਆਂ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਕਰਜ਼ੇ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਹਨ [706-ਜੀ ਐਚ] ਵਲੰਡਲੇ ਦੀ ਭਾਗੀਦਾਰੀ 12 ਐਡਨ ਪੀ.ਪੀ 27 ਅਤੇ 28 ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਵਦਿੱਤਾ 9. ਇੰਗਵਲਸ਼ ਵਨਆਂ ਸ਼ਾਸਤਰ ਵਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਫਰਮ ਵਸਰਫ ਉਹਨਾਂ ਕੁਿੱਝ ਵਵਅਕਤੀਆਂ ਲਈ ਇਿੱਕ ਸੰਖੇਪ ਨਾਮ ਹੈ ਜੋ ਕਾਰੋਬਾਰ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਵਗਣਤੀ ਵਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ ਜਾਂ ਵਧੇਰੇ ਨ ੰ ਇਸ ਨ ੰ ਜਾਰੀ ਰਿੱਖਣ ਲਈ ਅਵਧਕਾਰਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵਕ ਉਹ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਮੁਨਾਵਫਆਂ ਦੇ ਹਿੱਕਦਾਰ ਹੋਣ ਅਤੇ ਕਾਰੋਬਾਰ ਦੇ ਕਰਵਜ਼ਆਂ ਅਤੇ ਨੁਕਸਾਨਾਂ ਲਈ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਵਜ਼ੰਮੇਵਾਰ ਹੋਣ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਭਾਈਵਾਲੀ ਪਰੋਪਰਟੀ ਨ ੰ ਫਰਮ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਮੰਵਨਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਵਸਰਫ ਇਸ ਉਦੇਸ਼ ਲਈ ਹੈ ਵਕ ਇਸ ਨ ੰ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੀ ਵਿੱਖਰੀ ਜਾਇਦਾਦ ਤੋਂ ਵਿੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ। ਪਰ, ਕਾਨ ੰਨ ਵਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਸੰਯੁਕਤ ਤੌਰ 'ਤੇ ਫਰਮ ਦੀ ਰਚਨਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੀ ਮਲਕੀਅਤ ਹੈ। [707 ਬੀ-ਸੀ] Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) 4. On a plain reading of s. 34(3)(b) it will appear clear that before that provision can be invoked or applied three conditions are required to be satisfied : '(a) that the· ship, machinery or plant must have been sold or otherwise transferred, (b) that such a sale or transfer must be by the assessee and (c) , that the same must be before the expiry of eight years from the end of the previous year in whicbJ it was acquired or installed. It is only when these three conditions are satisfied that any allowance made under s. 3 3 shall be deemed to have been wrongly made and the Income-tax Officer acting under s. 155(5) .will be entitled to withdraw such allowance. [703 C-DJ 5. Section 2(47) gives an artificial extended meaning to the expression ·'transfer· for, it not merely includes transactions of 'sale' and 'exchange' which in ordinary parlance would mean transfers but also 'relinquishment' or 'extinguishment of rights' which are ordinarily not included in that concept. H03EJ 6. In Con1missioner of Income-Tax v. Dp.was Cine Corporation, 68 I.T.R. :240, the concept of distribution of assets consequent upon the, dissolution of the firm was considered in the context of thie balancing charge· arising under the second proviso· to s. 10(2) (vii) of the 1922 Act. This Court held that the expression "sale or sold" when used in s. 10(2) (vii) and the, second proviso thereto n1usf be understood in their ordinary meaning and that "sale" according to itS; ordinary meaning meant a transfer of property for a price, and further ·enunciated the proposition that the distribution of surplus upon dissolution of a JJartnership after discharging debts and obligations was always by way of adjustment! of rights o'f partners in the assets of the partnership and did not amount to a transfer much less for a price. The· question of raising a balancing charge· agajnst the dissolved firm, a separate taxable entity which had been allowed depreciation in the earlier years, was also considered by the Court and Jit took the view that no balancing charge arose ·a£:ainst the firm inasmuch as no sale or transfer \vas involved in the transaction of distribution of the assets to o<:rstwhile partners of the firm consequent upon its dissolution. [703G, 704 E-G] 7. In Bankey Lal Vaidya's case, 79 I.T.R. 594, the concept of distribution of :assets to the prutners of a firm consequent upon its dissolution was considered ~n the context of the charge on capital gains arising under s. 128(1) of the 1922 di.ct. This ,court·observed that the rights of the parties were adjusted by handing A B c D, H , A over to one of the partners the entire assets and to the other partner the money value of his share and such a transaction was neither a sale nor exchange nor transfer of the assets of the Jinn. [704 H, 705 DJ 8. (i) It is well-known that commercial men and accountants on the one hand and lawyers on the other have different notions respecting the nah1re of the firm .. [705 HJ B (ii) Commercial men and accountants are apt to look upon a firm in the light in which lawyers look upon a corporation i.e. as a body distinct from tJie members composing it, and having rights and obligations distinct frcnn those of its members. [706 BJ (iii) The firm is not recognised by English lawyers as distinct from the members composing it. What is called the· property of the firm is their property, and what are called the debts and liabilities of the firm are their debts and their liabilities. [706 G, HJ c Lindley on Partnership 12th Edn. pp. 27 and ZS; refierred to. Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) 4. र अधिारा 34(3)(ख) को पढ़न के पर यह सपष प्तकत होगा फक इि प्ावर अधिान को लाग मू करन के या जागृत करन के ि के पहल के तकन शतर्धारण वर्षों को प मूरा करनाआवशयक ह न (ए) फक जहाज, मशकनरी या िंयंत्र ब केचा जाना चाफहए याअनयथा हसतांतररत फकया गया हो, (ख) फक ऐिक वबनर की बिक या हसतांतरणसनर अधिा्मररतक दारा फकया जाना चाफहए और (िक) फक यह वप छल के वष्म क के अंति के आठ िाल की िमासप्त ि के पहल के होना चाफहए रजिमें इि के हासिल फकया गया था या सथावपत फकया गया था। जब य के तकन शत्तें प मूरी हो जातक हैंतभक र अधिारा 33 क के तहत फदाया गया कोई भक भ्तिा गलत तरीक के ि के फदाया गयामाना जाएगा और र अधिारा 155(5) क के तहत काय्म करन के वाला आयकरर होगा।असर अधिकारी इि तरह क के भ्ति के को वापि ल केन के का हकद 5. र अधिारा 2(47) असभवयवक ‘हसतांतरण‘ को एक कगृवत्रम ववसताररत अथ्म दा केतक ह , इिमें न क केवल ‘वबनर की बिक‘ और ‘ववसनमय‘ क के ल केनदा केन शासमल हैं,रजिका अथ्म िामानय बोलचाल में हसतानतरण होगा, बरूलक ‘ उतयाग‘ या‘असर अधिकारं का िमाप्त होना‘ भक शासमल ह जो फक िामानयतन उिअवर अधिारणा में शासमल नहीं होत के हैं। 6. आयकर आयुक बनाम दा केवाि सिन के कोपो्पो केशन 68 आई.टी.आर.240 क के मामल के में िम्म क के ववघटन क के पररणामसवरूप पररिंपव्तियं क केववतरण की अवर अधिारणा पर 1922 क के असर अधिसनयम की र अधिारा 10(2) (7) क केदा मूिर के प्ावर अधिान क के तहत उ उतपनन होन के वाल के िंतुलन शुूलक क के िंदाभ्म में ववचारफकया गया था। इि नयायालय न के माना फक र अधिारा 10(2)(7) और उिक केदा मूिर के प्ावर अधिान में इसत केमाल होन के पर असभवयवक ‘‘वबनर की बिक या ब केचना‘‘ कोउनक के िामानय अथ्म में िमझा जाना चाफहए और इिक के िामानय अथ्म क केअनुिार ‘‘वबनर की बिक‘‘ का मतलब िंपव्ति का हसतांतरण ह और इि ववसनश्चय कोआग के बढ़ाया फक ऋण और दसय उतवं का सनव्महन करन के क के बादा िाझ केदरी क केरंववघटन पर असर अधिश केष का ववतरण हम केशा िाझ केदरी की िंपव्तियं में भागकद क के असर अधिकारं क के िमायोजन क के मा के माधयम ि के होता ह और इि के कम कीमत परहसतांतरण नही माना जा िकता। ववघफटत िम्म, एक अलग कर योगयइकाई, रजि के पहल के क के वषर्धारण वर्षों में म मयल्यहाि की अनुमसत दाी गई थक और इिक केरखलाि िंतुलन शुूलक बढ़ान के क के िवाल पर भक नयायालय दारा ववचार फकयागया था और यह माना गया था फक िम्म क के ववघटन क के पररणामसवरूपउिक के प मूव्म भागकदरं को पररिंपव्तियं क के ववतरण क के ल केनदा केन क के कारण िम्मक के रखलाि कोई वबनर की बिक या वबनर की बिक नहीं होन के क के कारण कोई िंतुलन शुूलकउ उतपनन नहीं होता ह । 7. बांक के लाल व द्य 79 आई.टी.आर. 594 क के मामल के में एक िम्म क के ववघटन क के पररणामसवरूप उिक के भागकदरं को िंपव्ति क के ववतरण कीअवर अधिारणा पर 1922 असर अधिसनयम की र अधिारा 128(1) क के तहत उ उतपनन होन केवाल के प मूंजकगत लाभ पर शुूलक क के िंदाभ्म में ववचार फकया गया था। इिरनयायालय न के माना फक एक भागकदर को प मूरी िंपव्ति और दा मूिर के भागकदको उिक के फहसि के का र अधिन म मय ि सौंपकर पक्षकारं क के असर अधिकारं कोिमायोरजत फकया गया था और ऐिा ल केनदा केन न तो वबनर की बिक था, न ववसनमयऔर न ही वयविाय की िंपव्ति का हसतांतरण था। 8. (1) यह िव्मववफदात ह फक एक ुओर वारणरजयक वयवक औरल केखाकार और दा मूिरी ुओर वकील िम्म की प्कगृसत क के िंबंर अधि में अलग-अलगर अधिारणा रखत के हैं। (2) वारणरजयक वयवक और अकाउंटेंट फकिक कंपनक को उिक नजर ि के दा केखत के हैं, रजि नजर ि के वकील फकिक सनकाय को दा केखत के हैं अथा्मत एक ऐिकिंसथा जो इि के बनान के वाल के िदासयं ि के सभनन ह , और इि िंसथा क केअसर अधिकार और दसय उतव इिक के िदासयं ि के सभनन हैं। (3) िम्म को अंग केजक वकीलं दारा इि के बनान के वाल के िदासयं ि के अलग नहीं माना जाता ह । रजि के िम्म की िंपव्ति कहा जाता ह वह उनकी िंपव्तिह , और रजि के िम्म क के ऋण और दा केनदररयां कहा जाता ह वह उनक के ऋणऔर उनकी दा केनदररयां हैं। सलंडलक की पाट्मनरसशप क के 12 वें िंसकरण पगृष्ठ 27 और 28 का हवाला फदाया गया। 9. अंग केजक नयायशास्त्र में एक िम्म क केवल कु छ वयवकयं क के सलए एक िंरक्षप्त नाम ह जो वयविाय करत के हैं या अपन के एक या असर अधिक लोगं कोइि के चलान के क के सलए असर अधिकगृत फकया ह । इि तरह ि के फक व के िंयुक रूप ि केलाभ क के हकदर हैं और िंयुक रूप ि के इिक के कज्म और वयविाय क के घाट केसलए उ्तिरदयक हैं। इिक के अलावा, िाझ केदरी की िंपव्ति को िम्म ि के िंबंसर अधितमाना जाता ह , ल केफकन यह क केवल भागकदरं की सवयं की िंपव्ति ि के इि केअलग करन के क के उद केशय ि के ह । ल केफकन, कान मून में िाझ केदरी िम्म की िंपव्तिपर िम्म बनान के वाल के िभक िाझ केदरं का िंयुक सवासम उतव होता ह । Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) िंरक्षप्त नाम ह जो वयविाय करत के हैं या अपन के एक या असर अधिक लोगं कोइि के चलान के क के सलए असर अधिकगृत फकया ह । इि तरह ि के फक व के िंयुक रूप ि केलाभ क के हकदर हैं और िंयुक रूप ि के इिक के कज्म और वयविाय क के घाट केसलए उ्तिरदयक हैं। इिक के अलावा, िाझ केदरी की िंपव्ति को िम्म ि के िंबंसर अधितमाना जाता ह , ल केफकन यह क केवल भागकदरं की सवयं की िंपव्ति ि के इि केअलग करन के क के उद केशय ि के ह । ल केफकन, कान मून में िाझ केदरी िम्म की िंपव्तिपर िम्म बनान के वाल के िभक िाझ केदरं का िंयुक सवासम उतव होता ह । 10. भारतकय िाझ केदरी असर अधिसनयम, 1932 क के तहत भारतकय कान मून में एक िम्म की प्कगृसत और उिकी िंपव्ति क के िंबंर अधि में ववसर अधिक रसथसत लगभगअंग केजक कान मून क के िमान ही ह । यहां भक एक िाझ केदरी िम्म एक अलगकान मूनक इकाई नहीं ह और कान मून में िाझ केदरी िम्म की िंपव्ति िम्म बनान केवाल के िभक िाझ केदरं की होतक ह । भारतकय असर अधिसनयम, अंग केजक असर अधिसनयमकी तरह एक िम्म को शाश्वत उ्तिरासर अधिकार क के असर अधिकार का आनंदा ल केन के वालककोपो्पो केट िंसथा बनान के ि के बचाता ह । एआईआर 1948 पकिक 100 भगवतक मोरारजक गोकलदि बनाम आलमवबक क केसमकल वकि्म किमपनक सलसमट केड वग रा का हवाला फदाया गया। 11. भारतकय िाझ केदरी असर अधिसनयम, 1932 क के तहत एक िाझ केदरी िम्मइि के बनान के वाल के िाझ केदरं क के अलावा एक अलग कान मूनक इकाई नहीं ह औरिमान रूप ि के कान मून में िम्म क के पाि िाझ केदरी पररिंपव्तियं में अपना कोईअलग असर अधिकार नहीं ह और जब कोई िम्म की ििमपव्ति या िम्म कीपररििमपव्तियं की बात करता ह तब उिि के असभप्ाय उि िंपव्ति ि के ह रजिमें िभक िाझ केदरं का िंयुक या िामानय फहत होता ह । अदंकी नारायणपपा और अनय बनाम भासकर कगृिषणपपा और 12अनय, (1961) 3 एि.िक.आर. 400 का हवाला फदाया गया। 12. प् उतय े ववघटन िमय-िमय पर पररिंपव्तियं क के वासतववक ववतरण, ववभाजन या आवंटन ि के पहल के होना चाफहए जो खात के बनान के और िम्म दारा दा केय ऋणं और दा केनदररयं का सनव्महन करन के क के बादा होता ह ।ववघटन पर सनर अधिा्मररतक िम्म का अरसत उतव िमाप्त हो जाता ह , इिक के बादाखातं का सनमा्मण होता ह , फिर ऋणं और दा केनदररयं का सनव्महन होता ह रंऔर उिक के बादा िंपव्तियं का ववतरण, ववभाजन या आवंटन प मूव्म भागकदक के बकच असर अधिकारं क के पारसपररक िमायोजन क के मा के माधयम ि के होता ह । प मूव्मिाझ केदरं को पररिंपव्तियं का ववतरण, बंटवारा या आवंटन ववघफटत िम्मदारा नहीं फकया जाता ह । इि अथ्म में सनर अधिा्मररतक (ववघफटत िम्म) दारा फकिकभक वयवक को िंपव्ति का कोई हसतांतरण नहीं फकया जाता ह । 13. उको उ नयायालय का यह दृवषकोण फक फकिक ववल केख ि के प्भाववत पररिंपव्तियं का ववतरण ववघटन क के िाथ ही होता ह या यह ववघफटत िम्मदारा प्भाववत होता ह , सवककाय्म नहीं ह । : सिववल अपकल िं. 196- 199/73 सिववल अपकलकय क्ष केत्रासर अधिकार क केरल उको उ नयायालय क के 1970 क के आयकर सनदा्देश िंखया 115-118 क के िनदाभ्म में सनण्मय फदानांक 14.07.1972 क के ववरूद्ध ववश केष अनुमसत दारा । अपकलाथ् क के सलए क के. एि. रामम मूसत्म, पक. एन. रामसलंगम और ए.टी. एम. िंपत उ्तिरदता क के सलए बक. बक. आह मूजा और िुशक ए. िुभासशनक। नयायालय का सनण्मय नयायम मूसत्म तुलजापुरकर दारा फदाया गया । तुलजापुरकर, ज के:- ववश केष अनुमसत दारा दाज्म की गई य के अपकलें कान मून का एक फदालचसपिवाल उठातक हैं फक कया फकिक िम्म क के ववघटन क के पररणामसवरूप उिकीपररिंपव्तियं का ववतरण भारतकय आयकर असर अधिसनयम, 1961 की र अधिारा2(47) क के िनदाभ्म में भारतकय आयकर असर अधिसनयम, 1961 की र अधिारा 34 (3)(ख) में यथावरण्मत ‘‘अनयथा हसतानतररत‘‘ असभवयवक क के अथ्म क के भकतरपररिंपव्तियं क के हसतांतरण क के िमान ह । प्रश को जनम दा केन के वाल के ते तथय एक िंरक्षप्त दयर के में हैं। अपकलकता्म Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) ਜਾਂ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਆਪਣੀ ਵਗਣਤੀ ਵਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ ਜਾਂ ਵਧੇਰੇ ਨ ੰ ਇਸ ਨ ੰ ਜਾਰੀ ਰਿੱਖਣ ਲਈ ਅਵਧਕਾਰਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵਕ ਉਹ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਮੁਨਾਵਫਆਂ ਦੇ ਹਿੱਕਦਾਰ ਹੋਣ ਅਤੇ ਕਾਰੋਬਾਰ ਦੇ ਕਰਵਜ਼ਆਂ ਅਤੇ ਨੁਕਸਾਨਾਂ ਲਈ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਵਜ਼ੰਮੇਵਾਰ ਹੋਣ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਭਾਈਵਾਲੀ ਪਰੋਪਰਟੀ ਨ ੰ ਫਰਮ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਮੰਵਨਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਵਸਰਫ ਇਸ ਉਦੇਸ਼ ਲਈ ਹੈ ਵਕ ਇਸ ਨ ੰ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੀ ਵਿੱਖਰੀ ਜਾਇਦਾਦ ਤੋਂ ਵਿੱਖ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ। ਪਰ, ਕਾਨ ੰਨ ਵਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਸੰਯੁਕਤ ਤੌਰ 'ਤੇ ਫਰਮ ਦੀ ਰਚਨਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੀ ਮਲਕੀਅਤ ਹੈ। [707 ਬੀ-ਸੀ] 10, ਭਾਰਤੀ ਭਾਈਵਾਲੀ ਅਵਧਵਨਯਮ, 1932 ਦੇ ਤਵਹਤ ਭਾਰਤੀ ਕਾਨ ੰਨ ਵਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਫਰਮ ਦੀ ਪਰਵਕਰਤੀ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਦੇ ਸੰਬੰਧ ਵਵਿੱਚ ਸਵਥਤੀ ਲਗਭਗ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਕਾਨ ੰਨ ਵਾਂਗ ਹੀ ਹੈ। ਇਿੱਥੇ ਵੀ ਇਿੱਕ ਭਾਈਵਾਲੀ ਫਰਮ ਇਿੱਕ ਵਿੱਖਰੀ ਕਾਨ ੰਨੀ ਇਕਾਈ ਨਹੀਂ ਹੈ ਅਤੇ ਜੌ ਵਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲ-ਜਹਾਜ਼ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਫਰਮ ਦਾ ਗਠਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ। ਇੰਡੀਅਨ ਅਵਧਵਨਯਮ, ਇੰਗਵਲਸ਼ ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਤਰਹਾਂ, ਇਿੱਕ ਫਰਮ ਨ ੰ ਇਿੱਕ ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਸੰਸਥਾ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਪਰਹੇਜ਼ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਵਨਰੰਤਰ ਉੱਤਰਾਵਧਕਾਰੀ ਦੇ ਅਵਧਕਾਰ ਦਾ ਆਨੰਦ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, [708 ਬੀ, ਈ] ਭਗਵਾਨਜੀ ਮੋਰਾਰਜੀ ਗੋਕੁਲਦਾਸ ਬਨਾਮ ਅਲੇਮਵਬਕ ਕੈਮੀਕਲ ਵਰਕਸ ਕੰਪਨੀ ਵਲਮਵਟਡ ਅਤੇ ਹੋਰ , ਏ. ਆਈ. ਆਰ. 1948 ਪੀ. ਸੀ. 100; ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਹੈ। 11. ਭਾਰਤੀ ਭਾਈਵਾਲੀ ਅਵਧਵਨਯਮ, 1932 ਦੇ ਤਵਹਤ ਇਿੱਕ ਭਾਈਵਾਲੀ ਫਰਮ ਇਿੱਕ ਵਿੱਖਰੀ ਕਾਨ ੰਨੀ ਇਕਾਈ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਸ ਨ ੰ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦਾ ਵਹਿੱਸਾ ਅਤੇ ਬਰਾਬਰ ਕਾਨ ੰਨ ਵਵਿੱਚ ਇਸ ਤਰਹਾਂ ਦੀ ਫਰਮ ਦੇ ਕੋਈ ਵਿੱਖਰੇ ਅਵਧਕਾਰ ਨਹੀਂ ਹਨ ਜਾਂ ਭਾਈਵਾਲੀ ਸੰਪਤੀਆਂ ਵਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਖੁਦ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਇਿੱਕ ਟੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਜਾਂ ਕੰਪਨੀ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਸਾਰੇ ਲਾਭ ਟੋਪੀ ਦਾ ਅਰਥ ਹੈ ਉਹ ਸੰਪਤੀ ਵਜਸ ਵਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਕੋਲ ਹੈ ਸੰਯੁਕਤ ਜਾਂ ਸਾਂਝਾ ਵਹਿੱਤ, [709 ਸੀ] ਅਡੰਕੀ ਨਾਰਾਇਣਿੱਪਾ ਅਤੇ ਅਨਰ ਬਨਾਮ ਭਾਸਕਰ ਵਕਰਸ਼ਣਿੱਪਾ ਅਤੇ 12 ਹੋਰ, [1961] 3 ਐਸ. ਸੀ. ਆਰ. 400, ਨੇ ਇਸ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਵਦਿੱਤਾ। 12. ਹਰੇਕ ਭੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਵਹਲਾਂ ਉਸ ਨ ੰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਅਸਲ ਵੰਡ, ਵੰਡ ਜਾਂ ਅਲਾਟਮੈਂਟ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਖਾਤੇ ਬਣਾਉਣ ਅਤੇ ਫਰਮ ਦੁਆਰਾ ਬਕਾਇਆ ਕਰਵਜ਼ਆਂ ਅਤੇ ਦੇਣਦਾਰੀਆਂ ਨ ੰ ਅਦਾ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਭੰਗ ਹੋਣ 'ਤੇ ਫਰਮ ਦੀ ਹੋਂਦ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ; ਵਫਰ ਖਾਤੇ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਵਫਰ ਕਰਵਜ਼ਆਂ ਅਤੇ ਦੇਣਦਾਰੀਆਂ ਦਾ ਭੁਗਤਾਨ ਅਤੇ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੰਡ, ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਜਾਂ ਵੰਡ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਵਵਚਕਾਰ ਅਵਧਕਾਰਾਂ ਦੀ ਆਪਸੀ ਵਵਵਸਥਾ ਦੁਆਰਾ ਪੁਰਾਣੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਵਚਕਾਰ ਵੰਡ ਜਾਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਪੁਰਾਣੇ ਭਾਈਵਾਲ, ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੁਆਰਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਅਰਥ ਵਵਿੱਚ ਵਕਸੇ ਵੀ ਵਵਅਕਤੀ ਨ ੰ ਕਰਦਾਵਤ (ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ) ਦੁਆਰਾ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦਾ ਕੋਈ ਤਬਾਦਲਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। [710 ਬੀ-ਸੀ] 13. ਉੱਚ ਅਦਾਲਤ ਦਾ ਵਵਚਾਰ ਹੈ ਵਕ ਵਕਸੇ ਡੀਡ ਦੁਆਰਾ ਪਰਭਾਵਵਤ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਭੰਗ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਲ ਤੁਰੰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਇਹ ਭੰਗ ਹੋਈ ਫਰਮ ਦੁਆਰਾ ਪਰਭਾਵਵਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਸਵੀਕਾਰ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ। [710-ਡੀ] ਅਪੀਲ ਵਨਆਂਇਕ ਫੈਸਲਾੈਃ ਵਸਵਲ ਅਪੀਲ ਨੰ. 196-199/ 73: 1970 ਦੇ ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਰੈਫਰੈਂਸ ਨੰਬਰ 115-118 ਵਵਿੱਚ ਕੇਰਲ ਉੱਚ ਅਦਾਲਤ ਦੇ ਵਮਤੀ-14-7-1972 ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਅਤੇ ਆਦੇਸ਼ ਤੋਂ ਵਵਸ਼ੇਸ਼ ਆਵਗਆ ਦੁਆਰਾ ਅਪੀਲ। ਅਪੀਲਕਰਤਾ ਲਈ ਕੇ. ਐੱਸ. ਰਾਮਮ ਰਤੀ, ਪੀ. ਐੱਨ. ਰਾਮਵਲੰਗਨਸ ਅਤੇ ਏ. ਟੀ. ਐੱਮ. ਸੰਪਤ। ਜਵਾਬਦੇਹ ਲਈ ਬੀ. ਬੀ. ਆਹ ਜਾ ਅਤੇ ਵਮਸ ਏ. ਸੁਭਾਵਸ਼ਨੀ। ਅਦਾਲਤ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਇਸ ਦੁਆਰਾ ਵਦਿੱਤਾ ਵਗਆ ਸੀ ਤੁਲਜ਼ਾਪੁਰਕਰ, ਜੇ. - ਵਵਸ਼ੇਸ਼ ਛੁਿੱਟੀ ਦੁਆਰਾ ਇਹ ਅਪੀਲਾਂ ਕਾਨ ੰਨ ਦਾ ਇਿੱਕ ਵਦਲਚਸਪ ਸਵਾਲ ਉਠਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ ਵਕ ਕੀ ਵਕਸੇ ਫਰਮ ਦੀਆਂ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੀ ਵੰਡ ਇਸ ਦੇ ਭੰਗ ਹੋਣ 'ਤੇ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਤਬਾਦਲੇ ਦੇ ਅਰਥ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸੰਪਤੀਆਂ ਦੇ ਤਬਾਦਲੇ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਹੈ। ਭਾਰਤੀ ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਵਧਵਨਯਮ, 1961 ਦੀ ਧਾਰਾ 34 (3) (ਬੀ), ਅਵਧਵਨਯਮ ਦੀ ਧਾਰਾ 2 (47) ਵਵਿੱਚ 'ਤਬਾਦਲੇ' ਦੀ ਪਵਰਭਾਸ਼ਾ ਨ ੰ ਵਧਆਨ ਵਵਿੱਚ ਰਿੱਖਦੇ ਹੋਏ? Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) (iii) The firm is not recognised by English lawyers as distinct from the members composing it. What is called the· property of the firm is their property, and what are called the debts and liabilities of the firm are their debts and their liabilities. [706 G, HJ c Lindley on Partnership 12th Edn. pp. 27 and ZS; refierred to. 9. In Eng1ish jurisprudence a firm is only a compendious name for certain persons \vho carry on business or have authorised one or more of their number to carry it on, in such a way that they are jointly entitled to the profits and jointly liable for the, debts and losseS of the business. Further, partnership pro-perty is regarded as belonging to the firm, but this is only for the purpose of distinguishing the same from-ihe separate property of the partners. BUt, in law the partnership property is jointly owned by all the partners co'mposing the firm. [707 B-CJ D 10. The position as regards the nature of a firm and its property in Indiarr La\v ullder the Indian Partnership Act, 1932 is almost the same as in English· law. Here also a partnership firm is not a distinct legal entity and the partner-ship- property in law belongs to all the partners constituting the firm. The Indian Act, like the English Act avoids making a firm a corporate body enjoy-ing the right of perpetual succession. [708 B, E] E Bhagwanji Morarji Goculdas v. Alembic Che1nical Works Co. Ltd. and Ors., -F AlR 1948 PC 100; referred to. 11. A partnership firm under the Indian Partnership Act, 1932 is not a distinct legal entity apart from the partners 'constituting it and equally in law the firm as such has no separate rights of its own in the partnership assets and when one talks of the firm's property or firm's assets all that is meant is property in which all partners have a joint or common interest. [709 C] G Addanki Narayannappa and Anr. v. Bhaskara Krishnappa and 12 Ors., [1961J 3 S.C.R. 400, referred to. 12. Every dissolution must in point of time he anterior to the actucl distri-bution, division or allotment of the assets that takes place- after making accounts and discharging the debts and liabilities due by the firm·. Upon dissolution the firm ceases to exist; then follows~the making of accounts, then the discharge of debts and liabilities and thereupon distribution~ division or allotment of assets takes: place inter se between the erstwhile partners by! way of mutual adjustment of rights between them. ~lbe distribution,. division1 or allotment of assets to· the B • erstwhile partners, is not d,one by the dissolved firm. In this sense there is no transfer of. assets' by the as.Sessee (dissolved firm) to ari.y person. [710 Il-Cl A 13. The viev.· of the High Court that the distribution of assets effected by a deed takes p]ace ea instanti with the dissolution or that it is effected by the dissolved firm not accepted. (710 D] B CIVIL APPELLATE JURISDICTION: Civil Appeal Nos.. 196-199/ 73, Appeals by Special Leave from the Judgment and Order dated ·14-7-1972 of the Kerala High Court in Income Tax Reference Nos . 115-l l 8 of 1970. dated K. S. Rainamurthy, P. N. Ramalingam and A. T. M. Sampath for c the Appellant. B. B. Ahuja and Miss A. Subhashini for the Respondent. The Judgment of the Court was delivered by TuLzAPURKAR, J.-These. appeals by special leave raise an interest-ing question of law whether the distribution of assets of a firm conse>-quent on its dissolution amounts to a transfer of assets within the meaning of the expression "otherwise transferred" occurring in s. 34 (3) (b) of the Indian Income Tax Act, 1961, having regard to the definition of 'transfer' in s. 2 ( 4 7) of \he Act ? D E Case: MALABAR FISHERIES CO., CALICUT versus COMMISSIONER OF INCOME TAX, KERALA [[1980] 1 S.C.R. 696] (1980) 8. (i) ഒരു വശത്ത് വാണിജ്യ വ്യക്തികൾക്കും കണക്കുപരിശോധകർക്കും മറുവശത്ത് അഭിഭാഷകർക്കും സ്ഥാപനത്തിന്റെ സ്വഭാവത്തെക്കുറിച്ച് വ്യത്യസ്ത ധാരണകളുണ്ടെന്ന് എല്ലാവർക്കും നന്നായി അറിയാം. [705 എച്ച്]. (ii) അഭിഭാഷകർ ഒരു കോർപ്പറേഷനെ, മറ്റു അംഗങ്ങളിൽ നിന്ന് വ്യത്യസ്തമായ ഒരു സ്ഥാപനമായി, അതായത് അതിന്റെ അംഗങ്ങളുടെ അവകാശങ്ങളിലും കടമകളിലും നിന്നും വേറിട്ട അവകാശങ്ങളും കടമകളും ഉള്ള ഒരു സ്ഥാപനമായി കാണുന്ന വാണിജ്യ വ്യക്തികളും കണക്കുപരിശോധകരും കൃത്യമാണ് . [706 ബി]. (iii) ഇംഗ്ലീഷ് അഭിഭാഷകർ സ്ഥാപനത്തെ അത് രചിക്കുന്ന അംഗങ്ങളിൽ നിന്ന് വ്യത്യസ്തമായി അംഗീകരിച്ചിട്ടില്ല. സ്ഥാപനത്തിന്റെ സ്വത്ത് എന്ന് വിളിക്കുന്നത് അവരുടെ സ്വത്താണ്, കൂടാതെ സ്ഥാപനത്തിന്റെ കടങ്ങളും ബാധ്യതകളും എന്ന് വിളിക്കുന്നത് അവരുടെ കടങ്ങളും ബാധ്യതകളുമാണ്. [706 ജി, എച്ച്]. ലിൻഡ്‌ലിയുടെ പങ്കാളിത്തം എന്ന പുസ്തകത്തിന്റെ 12 ആം പതിപ്പ്, പേജ് നമ്പർ 27 ഉം 28 ഉം പരാമർശിച്ചിരിക്കുന്നു. 9. ഇംഗ്ലീഷ് നിയമശാസ്്രൽ, ഒരു സ്ഥാപനം എന്നത് ഇടപാട് നടത്തുന്ന അല്ലെങ്കിൽ അവരുടെ ഒന്നോ അതിലധികമോ വ്യക്തികളെ അത് തുടരാൻ അധികാരപ്പെടുത്തിയിട്ടുള്ള ചില വ്യക്തികളുടെ ഒരു സമഗ്ര നാമം മാത്രമാണ്, അങ്ങനെ അവർക്ക് സംയുക്തമായി ലാഭത്തിന് അർഹതയുണ്ട്, കൂടാതെ ഇടപാടിന്റെ കടങ്ങൾക്കും നഷ്ടങ്ങൾക്കും സംയുക്തമായി ബാധ്യസ്ഥരാണ്. കൂടാതെ, പങ്കാളിത്ത സ്വത്ത് സ്ഥാപനത്തിന്റേതായി കണക്പ്പെടുന്നു, എന്നാൽ ഇത് പങ്കാളികളുടെ പ്രത്യേക സ്വത്തിൽ നിന്ന് അതിനെ വേർതിരിച്ചറിയാൻ വേണ്ടി മാത്രമാണ്. എന്നാൽ, നിയമത്തിൽ പങ്കാളിത്ത സ്വത്ത് സ്ഥാപനം ഉണ്ടാക്കപ്പെടുന്ന എല്ലാ പങ്കാളികളുടെയും സംയുക്ത ഉടമസ്ഥതയിലുള്ളതാണ്. [707 ബി-സി]. 1980-1-696-710 10. 1932 ലെ ഇന്ത്യൻ പങ്കാളിത്ത നിയമം പ്രകാരം, ഒരു സ്ഥാപനത്തിന്റെയും അതിന്റെ സ്വത്തിന്റെയും സ്വഭാവം സംബന്ധിച്ച ഇന്ത്യൻ നിയമത്തിലെ നിലപാട് ഇംഗ്ലീഷ് നിയമത്തിലെ പോലെ ഏറെക്കുറെ സമാനമാണ്. ഇവിടെയും ഒരു പങ്കാളിത്ത സ്ഥാപനം ഒരു പ്രത്യേക നിയമപരമായ സ്ഥാപനമല്ല, കൂടാതെ നിയമപരമായി പങ്കാളി സ്വത്ത് സ്ഥാപനം രൂപീകരിക്കുന്ന എല്ലാ പങ്കാളികൾക്കും അവകാശപ്പെട്ടതാണ്. ഇംഗ്ലീഷ് നിയമത്തെപ്പോലെ, ഇന്ത്യൻ നിയമവും ഒരു സ്ഥാപനത്തെ ശാശ്വത പിന്തുടർച്ചാവകാശം ആസ്വദിക്കുന്ന ഒരു സംഘടിതമായ സ്ഥാപനമാക്കുന്നത് ഒഴിവാക്കുന്നു. [708 ബി, ഇ]. ഭഗ്വൻജി മൊറാർജി ഗോകൽദാസ് v. അലമ്പിക് കെമിക്കൽ വർക്‌സ് കമ്പനി ലിമിറ്റഡ്‌ ആൻഡ്‌ അതേർസ് (എ ഐ ആർ 1948 പി സി 100) എന്ന വിധി പരാമർശിക്കുന്നു. 11. 1932 ലെ ഇന്ത്യൻ പങ്കാളിത്ത നിയമം പ്രകാരം ഒരു പങ്കാളിത്ത സ്ഥാപനത്തിന് അതിനെ രൂപീകരിക്കുന്ന പങ്കാളികളിൽ നിന്ന് വേറെയുള്ള ഒരു നിയമപരമായ വ്യക്തിത്വം ഇല്ല. അതുപോലെ തന്നെ, നിയമപരമായി ആസ്തികളിൽ സ്ഥാപനത്തിന് സ്വന്തം പേരിൽ വേറെയൊരു അവകാശവും ഇല്ല. , കൂടാതെ, സ്ഥാപനത്തിന്റെ സ്വത്തിനെയോ സ്ഥാപനത്തിന്റെ ആസ്തികളെയോ കുറിച്ച് പറയുമ്പോൾ, എല്ലാ പങ്കാളികൾക്കും സംയുക്തമായ അല്ലെങ്കിൽ പൊതു താല്പര്യമുള്ള സ്വത്ത് മാത്രമാണ് ഉദ്ദേശിക്കുന്നത്. [709 സി].അടന്കി നാരായണപ്പ ആൻഡ് അനതെർ v. ഭാസ്‌കര കൃഷ്‌ണപ്പ ആൻഡ് അതേർസ്.,[1961] 3 എസ്. സി. ആർ. 400, പരാമർശിക്കുന്നു. 12. ഓരോ പിരിച്ചുവിടലും കൃത്യമായ സമയത്ത് നടത്തണം; കണക്കിടപാടുകൾ കണ്ടെത്തി സ്ഥാപനം നൽകേണ്ട കടങ്ങളും ബാധ്യതകളും തീർത്ന് ശേഷം മാത്രമേ ആസ്തികളുടെ വിഭജനം അല്ലെങ്കിൽ പങ്കിടൽ നടക്ുയുള്ളു. പിരിച്ചുവിടലിനുശേഷം സ്ഥാപനം നിലവിലില്ലാതാകുന്നു; തുടർന്ന് കണക്കിടപാടുകൾ കണ്ടെത്തുക, തുടർന്ന് കടങ്ങളും ബാധ്യതകളും തീർക്കൽ, തുടർന്ന് പഴയ പങ്കാളികൾക്കിടയിൽ പരസ്പര അവകാശ ക്രമീകരണം വഴി ആസ്തികൾ വിതരണം, വിഭജനം അല്ലെങ്കിൽ പങ്കിട്ടുകൊടുക്കുന്നു. പഴയ പങ്കാളികൾക്കുള്ള ആസ്തികൾ വിതരണം ചെയ്യുന്നതോ വിഭജിക്കുന്നതോഅനുവദിക്കുന്നതോ പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനമല്ല. ഈ അർത്ഥത്തിൽ, നികുതിദായകൻ (പിരിച്ചുവിട്ട സ്ഥാപനം) ഒരു വ്യക്തിക്കും ആസ്തി കൈമാറ്റം ചെയ്യുന്നില്ല. [710 സി]. 13. ഒരു കരാർ പ്രകാരം നടപ്പിലാക്കുന്ന ആസ്തികൾ പിരിച്ചുവിടുന്ന നിമിഷം മുതൽ വിതരണം ചെയ്യപ
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