Case LawSupreme Court › [2007] 8 S.C.R. 1046

M/S Hindustan Coca Cola Beverage Pvt. Ltd v. Commissioner Of Income Tax

Supreme Court [2007] 8 S.C.R. 1046 16 Aug 2007 In favour of: Assessee
Forum / Bench
Supreme Court
Parties
M/S Hindustan Coca Cola Beverage Pvt. Ltd v. Commissioner Of Income Tax
Date of order
16 Aug 2007
Assessment year(s)
Outcome
Allowed

The order — as passed by the Supreme Court

Case summary

In M/S Hindustan Coca Cola Beverage Pvt. Ltd v. Commissioner Of Income Tax, the Supreme Court (2007) allowed the appeal under Section 201, Section 254, Section 194C, Section 271C of the Income-tax Act. The decision went in favour of the assessee.

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Sections referenced in this judgment

Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) এম/এস িহ�ু�ান �কাকা �কালা িবভােরজ/ পানীয় িপিভ�ট িলিমেটড বনাম আয়কর কিমশনার আগ� 16, 2007 [এস. এইচ. কাপািদয়া এবং িব. সুেদরশান �র��, িবচারপিত�য়] িবচার িবভাগীয় হ�ে�প-�াইবু�নাল কতৃ�ক মামলা�ট পুনরায় �খালার িনেদ�শ-চূড়া� িস�াে� �পৗ�ছােনা �াইবু�নােলর আেদশ-উ� আদালত কতৃ�ক হ�ে�প-যথাযথতা-আদালত: যথাযথ নয়-রায়/আেদশ। আয়কর আইন, I961 - ধারা 194C এবং 201(1)- ধারা 194-C-ধারা 194-C-ধারা 194-C-ধারা 1997-এর অধীেন কর কত�নকারী �কা�ািনেক �দাম চাজ� �দানকারী মূল�ায়নকারীর ��-কর কত�েনর পিরমােণর জন� 'মূল�ায়নকারী িডফ�' থাকা মূল�ায়নকারী কম�কত�া এবং তার উপর সুদ আেরািপত - সাকু�লার যা �কানও দািব কের না - ধারা 201 (1) এর অধীেন দৃশ�মান কর কত�নকারী TDS-এর দািয়ে� থাকা কম�কত�ােক স�� করার পের কায�কর করা হেব �য, বেকয়া কর কত�নকারী-করদাতা �ারা পিরেশাধ করা হেয়েছ - তেব, ধারা 211-এর অধীেন সুদ এবং বেকয়া কর উভয় ��ে�ই �েযাজ� - মামলার তেথ�র জন� �েযাজ� �দ�-পিরেশািধত-সাকু�লার - CBDT সাকু�লার নং 2751 20I/95-1T (B} তািরখ 29.1.1997)। আেবদনকারী-করদাতা িপওিস-র �া�ণ�ট �দাকােনর উে�েশ� ব�বহার কেরিছেলন এবং িপওিস-�ক �দাম ভাড়া �দান কেরিছেলন যার উপর আয়কর আইন, 1961-এর ধারা 194িস-এর অধীেন 2 শতাংশ হাের কর কাটা হেয়িছল। মূল�ায়ন আিধকািরক িপওিস-�ক �দ� �দাম চােজ�র ��ে� উৎেস �কেট �নওয়া কেরর পিরমােণর ঘাটিতর জন� আেবদনকারীেক '�খলািপ মূল�ায়নকারী' বেল অিভিহত কেরন এবং এর অধীেন সুদ ধায� কেরন। কেরর পিরমাণ স�েক� আইেনর 201 (1এ) ধারা অনুযায়ী কেরর পিরমাণ সংি��ভােব �কেট �নওয়া হেয়েছ বেল অিভেযাগ করা হেয়েছ। অিভেযাগকারী মামলা দােয়র কেরন। �াইবু�নাল মূল�ায়ন অিফসােরর আেদশ বহাল রােখ। হাইেকাট�ও �সই িনেদ�শ বহাল রােখ। এরপের, আিপলকারী আিপল�িলেত িবিবধ আেবদন দােয়র কেরিছেলন যা ইিতমেধ� িন�ি� করা হেয়িছল। আিপলকারী �াইবু�নােলর আেদেশর সংেশাধন �চেয়িছেলন এই িভি�েত �য আিপল �ারকিলিপেত 7 নং িভি�েত উ�ািপত তার িবক� যু�� �য �দামওয়ালােক তার আেয়র উপর মূল�ায়ন করা হেয়েছ এবং িবভাগ তার কাছ �থেক বেকয়া কর আদায় কেরেছ এবং এইভােব, একই আেয়র উপর আিপলকারীর কাছ �থেক আর �কানও কর আদায় করা যায়িন, �াইবু�নাল �ারা িবেবচনা করা হয়িন। �াইবু�নাল তার আেগর আেদশ �ত�াহার কের আেবদন�ট কের। িবভাগ�ট িহ�ু�ান �কাকা �কালা িবভােরজ িপিভ�ট িলিমেটড বনাম আয়কর কিমশনার 1047 উ� আেদশেক চ�ােল� কেরনিন। আিপেলর পুনঃ�নািনর পর �াইবু�নাল রায় �দয় �য যিদও আিপলকারী-মূল�ায়নকারীেক যথাযথভােব '�খলািপ করদাতার' িহসােব ধরা হেয়িছল, তেব িপওিস ইিতমেধ� পিরমােণর উপর কর �দান কেরেছ বেল িবেবচনা কের আিপলকারীর কাছ �থেক আরও একবার �খলািপ কর আদায় করা স�ব হয়িন। আেবদনকারীর কাছ �থেক �া�। যাইেহাক, হাইেকাট� বেলেছ �য �াইবু�নাল পূব�বত� আেদশ িব-এর পর �থেক আর �কানও �নািনর জন� িবষয়�ট পুনরায় খুলেত পাের না। হাইেকােট�র পূব�বত� আেদেশর িব�ে� দােয়র করা আিপল খািরজ কের �াইবু�নাল চূড়া�তা অজ�ন কেরেছ; �য পেয়��ট িভি� নং 7 আেবদনকারীর দােয়র করা আেবদেন �হণ করা হয়িন; এবং �াইবু�নােলর পূব�বত� আেদশ�ট হাইেকােট�র জাির করা আেদেশর সােথ একীভূত হেয় �গেছ। তাই এই আেবদন। আিপল কের আদালত আেদশঃ 1.1. 7 নং িভি� স�েক� আরও �নািনর জন� িবষয়�ট পুনরায় �খালার জন� �াইবু�নাল কতৃ�ক �দ� আেদশ তার চূড়া�তা অজ�ন কেরেছ। এই পিরি�িতেত হাইেকাট� আয়কর আিপল �াইবু�নােলর চূড়া� আেদেশ হ�ে�প করেত পারত না। [ অনুে�দ 9] [1050-িব] 1.2. িব�ি� নং 275/201/95-আই�ট (িব) তািরখ 29.1.1997 �ারা জাির করা হেয়েছ করদাতার �ারা কর �দােনর তািরখ পয�� আইেনর ধারা 201 (1এ)-ই করদাতার �ারা কর বা আয়কেরর ধারা 271িস-র অধীেন জিরমানার দায় আইন ক�ন। [ অনুে�দ 10] [1050-িস, িড] 1.3 . তাৎ�িণক ��ে�, আিপলকারী ধারার অধীেন সুদ �দান কেরিছেলন। 201 ( 1ক) আইেনর এবং �কানও িবতক� �নই �য বেকয়া কর �ারা �দান করা হেয়িছল কত�নকারী-করদাতা , িপ. ও. িস। এ�ট িবতিক�ত নয় �য এই িব�ি� হােত থাকা বা�ব পিরি�িতর ��ে� �েযাজ�। [ অনুে�দ 11] [1050-ই] �দওয়ানী আেবদন এ��য়ারঃ 2007 সােলর �দওয়ানী আিপল নং 3765। 2005 সােলর আই. �ট. এ. নং-478 এবং 843 এ নয়ািদি�েত িদি� হাইেকােট�র 11.10.2006 তািরেখর রায় ও আেদশ �থেক। �সািল �জ �সারাব�জ, ভাগ�ব িভ �দশাই, কিবতা ঝা, রা�ল �� এবং িরমা শম�া আিপলকারীর পে� । উ�রদাতার পে� িপ িপ মালেহা�া, ইরশাদ আহেমদ এবং িব িভ বলরাম দাস। 1048 সুি�ম �কােট�র �িতেবদন [2007] 8 এস. িস. আর আদালত কতৃ�ক রায় �দান করা হেয়িছল িব. সুেদরশান �র��, িবচারপিত- 1. অনুমিত করা হেয়েছ। 2. আিপলকারী-করদাতা কতৃ�ক �দ� িবেশষ অনুমিতর মাধ�েম এই আিপল�ট 2005 সােলর আই�টএ নং 478-এ 11.10.2006 তািরেখর িদি� হাইেকােট�র রােয়র িব�ে� িনেদ�িশত। 3. সংে�েপ যা বলা হেয়েছ তা িন��পঃ Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) बनाम आयकर आयुक्त 16 अगस्त, 2007 (एस.एच. कपाड़िया और बी. सुदर्शन रेड्डी, न्यायमूर्तिगण) न्यायिक हस्तक्षेप - अधिकरण द्वारा मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए फिर से खोलने कानिर्देशश देने वाला आदेशश - न्यायाधिकरण का आदेशश अंतिम निर्णय प्राप्त कर चुका है - उच्च न्यायालयद्वारा हस्तक्षेप औचित्य अभिनिर्धारित: उचित नहीं - निर्णय / आदेशश। आयकर अधिनियम, 1961 - धारा 194 सी और 201(1) - निर्धारिती उसकंपनी को गोदाम शशुल्क का भुगतान करता है जिस पर उसने धारा 194 - सी केतहत कर काटा है - निर्धारण अधिकारी कर की कम कटौती की राशि के लिएनिर्धारिती को दोषी मानता है और उस पर ब्याज उदग्रहित किया गया - परिपत्र केतहत कोई मांग की कल्पना नहीं की गई है। धारा 201(1) के तहत करकटौतीकर्ता द्वारा टीडीएस के प्रभारी अधिकारी को संतुष्ट करने के बाद लागू कियाजाएगा कि देय करों का भुगतान कटौतीकर्ता निर्धारिती द्वारा किया गया था -हालांकि, धारा 201(1) के तहत कटौतीकर्ता - निर्धारिती द्वारा करों के भुगतानकी तारीख तक ब्याज लगाया गया जो धारा 211 के तहत ब्याज और भुगतान किएगए कर दोनों पर - सीबीडीटी परिपत्र संख्या 275/201/95-आईटी (बी)दिनांक 29.1.1997. मामले के तथ्यों पर लागू होते हैं। अपीलकर्ता - निर्धारिती ने संग्रह के उद्देश्य के लिए पीओसी के परिसर का उपयोग कियाऔर पीओसी को गोदाम शशुल्क का भुगतान किया, जिस पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा194 सी के तहत 2 प्रतिशशत की दर से कर काटा गया था। निर्धारण अधिकारी ने पीओसी कोभुगतान किए गए गोदाम शशुल्क के संबंध में काटे गए कर की राशि में कमी के लिए अपीलकर्ता को‘चूक में निर्धारिती’ माना और कथित कर की राशि पर अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत कमकटौती पर ब्याज लगाया। अपीलार्थी ने अपील पेशश की। अधिकरण ने कर निर्धारण अधिकारी के आदेशश को यथावत रखा। हाईकोर्ट ने भी आदेशश यथावत रखा। इसके बाद, अपीलकर्ता ने उन अपीलोंमें विविध आवेदन पेशश किया जिनका पहले ही निपटारा किया जा चुका था। अपीलकर्ता ने अपील केज्ञापन में अधिकरण के आदेशश में सुधार के सम्बंध में वैकल्पिक तर्क ग्राउंड नंबर 7 में उठाया किगोदाम मालिक का मूल्यांकन उसकी आय पर किया गया है और विभाग द्वारा उससे देय कर कीवसूली की गई है। ऐसे में, उसी आय पर अपीलकर्ता से कोई और कर नहीं लिया जा सकता इस परअधिकरण ने विचार नहीं किया। अधिकरण ने अपने पहले के आदेशश को वापस लेते हुए आवेदन कोअनुमति दे दी। विभाग ने इस आदेशश को चुनौती नहीं दी। अधिकरण ने अपील पर दोबारा सुनवाईकरते हुए कहा कि यद्यपि अपीलकर्ता - निर्धारिती को ‘चूक में निर्धारिती’ माना गया था, लेकिनअपीलकर्ता से एक बार फिर से कथित कर की कोई वसूली नहीं हो सकती है क्योंकि पीओसी नेअपीलकर्ता से प्राप्त राशि पर पहले ही कर का भुगतान कर दिया है। हालाँकि, उच्च न्यायालय नेअभिनिर्धारित किया है कि अधिकरण किसी भी अग्रिम सुनवाई के लिए मामले को फिर से नहीं खोलसकता था क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा अधिकरण के पहले के आदेशश के खिलाफ दायर अपील कोखारिज करने पर अंतिम कर दिया गया। अपीलकर्ता द्वारा दायर अपील में ग्राउंड नंबर 7 पर आधारितबिंदु को नहीं लिया गया था और यह कि अधिकरण का पिछला आदेशश स्वयं उच्च न्यायालय द्वारापारित आदेशश में विलय हो गया। इसलिए वर्तमान अपील। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए अभिनिर्धारित 1.1. ग्राउंड नंबर 7 के संबंध में मामले को अग्रिम सुनवाई के लिए फिर सेखोलने के लिए अधिकरण द्वारा पारित आदेशश अपनी अंतिम स्थिति में पहुंच गया है। इन परिस्थितियोंमें, उच्च न्यायालय आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित अंतिम आदेशश में हस्तक्षेप नहीं करसकता था। (पैरा 9) (1050-बी) 1.2. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी परिपत्र संख्या 275/201/95-आईटी(बी)दिनांक 29.1.1997 में घोषणा की गई है कि कटौतीकर्ता द्वारा टीडीएस के प्रभारी अधिकारी कोसंतुष्ट कर दिया है कि निर्धारिती द्वारा देय कर का भुगतान कर दिया गया है तो आयकर अधिनियमकी धारा 201(1) के तहत कोई भी मांग कर के बाद लागू नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, इससेभुगतान की तारीख तक अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज वसूलने की देयता एवंआयकर अधिनियम की धारा 271 सी के तहत कटौती प्राप्तकर्ता निर्धारिती जुर्माने की देयता मेबदलाव नहीं होगा। (पैरा 10) (1050 – सी, डी) 1.3. मौजूदा मामले में, अपीलकर्ता ने अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज काभुगतान किया था और इसमें कोई विवाद नहीं है कि देय कर का भुगतान निर्धारिती, पीओसी द्वाराकिया गया था। इसमें कोई विवाद नहीं है कि परिपत्र मौजूदा तथ्यों पर लागू होता है। (पैरा 11)(1050 - ई) सिविल अपीलीय क्षेत्राधिकार: सिविल अपील संख्या 3765 /2007 Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) ਐਮ/ਐਸ. ਹਿੰਦੁਸਤਾਨਕੋਕਾਕੋਲਾਬੇਵਰੇਜਪ੍ਰਾਈਵੇਟਲਿਮਿਟੇਡ. ਬਨਾਮ ਆਮਦਨਕਰਕਮਿਸ਼ਨਰ ਅਗਸਤ16, 2007 [ਐਸ.ਐਚ. ਕਪਾਡੀਆਅਤੇਬੀ. ਸੁਦਰਸ਼ਨਰੈੱਡੀ, ਜੇ.ਜੇ.] ਨਿਆਇਕਦਖਲਅੰਦਾਜੀ—ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਮਾਮਲੇਨੂੰਮੁੜਸੁਣਵਾਈਲਈਖੋਲ੍ਹਣਦਾ———ਆਦੇਸ਼ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦਾਆਦੇਸ਼ਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਚੁੱਕਾਹਾਈਕੋਰਟਦੁਆਰਾਦਖਲਅੰਦਾਜੀਉਚਿਤਤਾਦਾ—ਫੈਸਲਾ:—ਫੈਸਲਾ/ ਉਚਿਤਨਹੀਂਆਦੇਸ਼। ਆਮਦਨਕਰਐਕਟ', 1961—ਧਾਰਾਵਾਂ194C ਅਤੇ201(1)—ਅਸੈਸੀਨੇਇੱਕਕੰਪਨੀਨੂੰਵੇਅਰਹਾਊਸ''ਚਾਰਜਿਜ਼ਦਿੱਤੇਜਿਸਤੇਉਸਨੇਧਾਰਾ194C ਅਧੀਨਟੈਕਸਕੱਟਿਆ'—ਅਸੈਸਿੰਗਅਫ਼ਸਰਨੇਅਸੈਸੀਨੂੰਡਿਫਾਲਟ—ਵਿੱਚਮੰਨਿਆਟੈਕਸਦੀਘਾਟਦੀਰਕਮਲਈਅਤੇਉਸਤੇਵਿਆਜਲਾਗੂਕੀਤਾਸਰਕੁਲਰਵਿੱਚਕਿਹਾਗਿਆਕਿਧਾਰਾ201(1) ਅਧੀਨਕੋਈਮੰਗਲਾਗੂਨਹੀਂਕੀਤੀਜਾਣੀਚਾਹੀਦੀਜਦੋਂਤੱਕਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕਰਨਵਾਲਾਟੀਡੀਐਸਦੇ-ਇੰਚਾਰਜਅਫ਼ਸਰਨੂੰਸੰਤੁਸ਼ਟਨਾਕਰਦੇਕਿਬਕਾਇਆਟੈਕਸਅਸੈਸੀਅਸੈਸੀਦੁਆਰਾਅਦਾਕੀਤਾਗਿਆ'ਹੈ—ਹਾਲਾਂਕਿ, ਵਿਆਜਧਾਰਾ201 ਅਧੀਨਟੈਕਸਦੀਅਦਾਇਗੀਦੀਮਿਤੀਤੱਕਲਾਗੂਕੀਤਾਜਾਸਕਦਾਹੈ'—ਤੱਥਾਂਤੇ,ਧਾਰਾ201 ਅਧੀਨਵਿਆਜਅਤੇਬਕਾਇਆਟੈਕਸਅਦਾਕੀਤਾਗਿਆ—ਸਰਕੁਲਰਮਾਮਲੇਦੇਤੱਥਾਂਤੇਲਾਗੂਹੈ—ਸੀਬੀਡੀਟੀਸਰਕੁਲਰਨੰਬਰ275/201/95-ਆਈਟੀ(ਬੀ) ਮਿਤੀ29.1.1997। ਅਪੀਲਕਰਤਾ-ਅਸੈਸੀਨੇਪੀਓਸੀਦੇਪ੍ਰਿਮਿਸਿਜ਼ਨੂੰਸਟੋਰਮਕਸਦਲਈਵਰਤਿਆਅਤੇਪੀਓਸੀਨੂੰਵੇਅਰਹਾਊਸ'ਤੇਆਮਦਨਕਰਐਕਟ, 1961 ਦੀਧਾਰਾ194C ਅਧੀਨ2% ਦੀਦਰਨਾਲਟੈਕਸਕੱਟਿਆਚਾਰਜਿਜ਼ਦਿੱਤੇਜਿਸਗਿਆ।ਅਸੈਸਿੰਗਅਫ਼ਸਰਨੇਅਪੀਲਕਰਤਾਨੂੰਪੀਓਸੀਨੂੰਅਦਾਕੀਤੇਗਏਵੇਅਰਹਾਊਸਚਾਰਜਿਜ਼ਦੇਸਰੋਤਗਏਟੈਕਸਦੀਰਕਮਵਿੱਚਘਾਟਲਈ'ਅਸੈਸੀਵਿੱਚਡਿਫਾਲਟ' ਮੰਨਿਆਅਤੇਐਕਟਦੀਧਾਰਾ201 (1A) ਅਧੀਨ'ਤੇਕੱਟੇ''ਕਥਿਤਤੌਰਤੇਘੱਟਕੱਟੇਗਏਟੈਕਸਦੀਰਕਮਤੇਵਿਆਜਲਾਗੂਕੀਤਾ।ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਅਪੀਲਦਾਇਰਕੀਤੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਅਸੈਸਿੰਗਅਫ਼ਸਰਦੇਆਦੇਸ਼ਨੂੰਬਰਕਰਾਰਰੱਖਿਆ।ਹਾਈਕੋਰਟਨੇਵੀਆਦੇਸ਼ਨੂੰਬਰਕਰਾਰ,ਰੱਖਿਆ।ਉਸਤੋਂਬਾਅਦ ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਪਹਿਲਾਂਹੀਨਿਪਟਾਏਗਏਅਪੀਲਾਂਵਿੱਚਵਿਵਿਧਅਰਜ਼ੀਆਂਦਾਇਰ'ਕੀਤੀਆਂ।ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੇਆਦੇਸ਼ਵਿੱਚਸੁਧਾਰਦੀਮੰਗਕੀਤੀਇਸਆਧਾਰਨੰਬਰਕੀਤਾਗਿਆਹੈਅਤੇਵਿਭਾਗਦੁਆਰਾਉਸਤੋਂਬਕਾਇਆਟੈਕਸਵਸੂਲਕੀਤਾਗਿਆਹੈ7 ਵਿੱਚਉਠਾਇਆਗਿਆਇਸਦਾਵਿਕਲਪਿਕਤਰਕਕਿਵੇਅਰਹਾਊਸਰਨੂੰਇਸਦੀਆਮਦਨ, ਇਸਲਈਉਸੇਆਮਦਨਤੇਕਿਅਪੀਲਦੇਜ਼ਖਮੀ'ਤੇਮੁਲਾਂਕਣ'ਤੇ,ਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਹੋਰਕੋਈਟੈਕਸਇਕੱਠਾਨਹੀਂਕੀਤਾਜਾਸਕਦਾ ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਵਿਚਾਰਿਆਨਹੀਂਗਿਆਸੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਅਰਜ਼ੀਨੂੰਮਨਜ਼ੂਰਕਰਦਿਆਂਆਪਣੇਪਿਛਲੇਆਦੇਸ਼ਨੂੰਯਾਦਕਰਲਿਆ।ਵਿਭਾਗਕਿਸੇਨੇਵੀਉਕਤਆਦੇਸ਼ਦੀਚੁਣੌਤੀਨਹੀਂਦਿੱਤੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਅਪੀਲਨੂੰਮੁੜਸੁਣਨਉੱਤੇਫੈਸਲਾਕੀਤਾਕਿਭਾਵੇਂਅਪੀਲਕਰਤਾ-ਕਰਦਾਤਾਨੂੰਸਹੀਤੌਰ''ਤੇ'ਕਰਦਾਤਾਵਿੱਚਡਿਫਾਲਟ' ਮੰਨਿਆਗਿਆਸੀ, ਪੀ.ਓ.ਸੀ. ਵੱਲੋਂਅਪੀਲਕਰਤਾਨੂੰਮਿਲੀਰਕਮ'ਤੇਟੈਕਸਅਦਾਕਰਦਿੱਤੇਜਾਣਕਾਰਨ, ਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਇੱਕਵਾਰਫਿਰਕਥਿਤਤੌਰ,ਤੇਡਿਫਾਲਟਵਿੱਚਟੈਕਸਦੀਰਿਕਵਰੀਨਹੀਂਹੋਸਕਦੀ।ਹਾਲਾਂਕਿ ਹਾਈਕੋਰਟਨੇਫੈਸਲਾਕੀਤਾਕਿਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਮਾਮਲੇਨੂੰਹੋਰਸੁਣਵਾਈਲਈਮੁੜਖੋਲ੍ਹਣਦਾਅਧਿਕਾਰਨਹੀਂਸੀਕਿਉਂਕਿਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੇਪਹਿਲੇਆਦੇਸ਼ਨੇਹਾਈ'; ਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਕੋਰਟਵੱਲੋਂਪਹਿਲੇਆਦੇਸ਼ਖਿਲਾਫਦਾਇਰਅਪੀਲਦੀਖਾਰਜੀਤੇਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਲਈਸੀ7 ';ਵੱਲੋਂਦਾਇਰਅਪੀਲਵਿੱਚਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰਤੇਆਧਾਰਿਤਬਿੰਦੂਨੂੰਨਹੀਂਚੁੱਕਿਆਗਿਆਸੀ ਅਤੇਕਿਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦਾਪਹਿਲਾਆਦੇਸ਼ਹਾਈਕੋਰਟਵੱਲੋਂਪਾਸਕੀਤੇਆਦੇਸ਼ਵਿੱਚਮਿਲਗਿਆਸੀ।ਇਸਲਈਮੌਜੂਦਾਅਪੀਲ। ਅਪੀਲਨੂੰਮੰਨਣਵਾਲੇ, ਅਦਾਲਤ ਫੈਸਲਾ: 1.1. ਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰ7 ਦੇਸੰਬੰਧਵਿੱਚਹੋਰਸੁਣਵਾਈਲਈਮਾਮਲਾਮੁੜਖੋਲ੍ਹਣਲਈਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਪਾਸਕੀਤਾਗਿਆਆਦੇਸ਼ਆਪਣੀਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਚੁੱਕਾਹੈ।ਹਾਲਾਤਾਂਵਿੱਚ, ਹਾਈਕੋਰਟਨੂੰਆਮਦਨ[ਪੈਰਾ9]ਕਰਅਪੀਲੀਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਪਾਸਕੀਤੇਗਏਅੰਤਿਮਆਦੇਸ਼ਨਾਲਦਖਲਨਹੀਂਦੇਣਾਚਾਹੀਦਾਸੀ।[1050-B] 1.2. ਕੇਂਦਰੀਸਿੱਧੇਟੈਕਸਬੋਰਡਦੁਆਰਾ29.1.1997" ਨੂੰਜਾਰੀਸਰਕੁਲਰਨੰਬਰ 275/201/95-ਆਈ.ਟੀ(ਬੀ) ਐਲਾਨਕਰਦਾਹੈਕਿ"201 (1) ਅਧੀਨਕੋਈਵੀਆਮਦਨਕਰਐਕਟਦੇਸੈਕਸ਼ਨਮੰਗਲਾਗੂਨਹੀਂਕੀਤੀਜਾਣੀਚਾਹੀਦੀਜਦੋਂਤੱਕਕਿਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕਰਨਵਾਲਾਅਧਿਕਾਰੀਨੂੰਇਹਸੰਤੁਸ਼ਟਨਾਕਰਦੇਵੇਕਿਕਰਦਾਤਾ-,ਕਰਦਾਤਾਵੱਲੋਂਬਕਾਇਆਟੈਕਸਅਦਾਕਰਦਿੱਤਾਗਿਆਹੈ।ਹਾਲਾਂਕਿ ਇਹਐਕਟਦੇਸੈਕਸ਼ਨ-201(1A) ਅਧੀਨਬਿਆਜਚਾਰਜਕਰਨਦੀਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਨੂੰਨਹੀਂਬਦਲੇਗਾਜਦੋਂਤੱਕਕਿਕਰਦਾਤਾਕਰਦਾਤਾਜਾਂਟੈਕਸਦੀਅਦਾਇਗੀਦੀਮਿਤੀਤੱਕਟੈਕਸਅਦਾਨਾਕਰਦੇਵੇਅਤੇਨਾਹੀਇਹਆਮਦਨਕਰਐਕਟਦੇਸੈਕਸ਼ਨ271C" [ਪੈਰਾ10] [1050-C,D] ਅਧੀਨਜੁਰਮਾਨਾਲਾਗੂਕਰਨਦੀਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਨੂੰਬਦਲੇਗਾ। 1.3. ਇਸਮਾਮਲੇਵਿੱਚ,201(1A) ਅਧੀਨਬਿਆਜਅਦਾਕੀਤਾਸੀਅਤੇ ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਐਕਟਦੇਸੈਕਸ਼ਨ-ਕਰਦਾਤਾ, ਪੀ.ਓ.ਸੀ.ਇਹਗੱਲਵਿਵਾਦਤਨਹੀਂਹੈਕਿਕਰਦਾਤਾ ਵੱਲੋਂਬਕਾਇਆਟੈਕਸਅਦਾਕਰਦਿੱਤਾਗਿਆਸੀ।'ਇਹਵੀਵਿਵਾਦਤਨਹੀਂਹੈਕਿਸਰਕੁਲਰਮੌਜੂਦਾਤੱਥਾਂਦੀਸਥਿਤੀਤੇਲਾਗੂਹੁੰਦਾਹੈ।[ਪੈਰਾ11] [1050-E] ਸਿਵਲਅਪੀਲੀਅਧਿਕਾਰਤਾ: ਸਿਵਲਅਪੀਲਨੰਬਰ3765 ਦਾ2007। 11.10.2006ਦਿੱਲੀਦੀਹਾਈਕੋਰਟਵਿੱਚਨਵੀਂਦਿੱਲੀਵਿੱਚ ਦੀਤਾਰੀਖਨਾਲਜੱਜਮੈਂਟਅਤੇਆਦੇਸ਼ਤੋਂਆਈ.ਟੀ.ਏ. ਨੰਬਰ478 ਅਤੇ843 ਦੇ2005। ਅਪੀਲਕਰਤਾਲਈਸੋਲੀਜੇ. ਸੋਰਾਬਜੀ, ਭਾਰਗਵਵੀ. ਦੇਸਾਈ, ਕਵਿਤਾਝਾ, ਰਾਹੁਲਗੁਪਤਾਅਤੇਰੀਮਾਸ਼ਰਮਾ। ਜਵਾਬਦੇਹਲਈਪੀ.ਪੀ. ਮਲਹੋਤਰਾ,.ਵੀ. ਬਾਲਰਾਮਦਾਸ। ਇਰਸ਼ਾਦਅਹਮਦਅਤੇਬੀ ਅਦਾਲਤਦਾਫੈਸਲਾਇਸਪ੍ਰਕਾਰਸੁਨਾਇਆਗਿਆਸੀ ਬੀ. ਸੁਦਰਸ਼ਨਰੈੱਡੀ, ਨਾਇਬਨਿਆਂਕਾ. ਆਈ. ਛੁੱਟੀਦਿੱਤੀਗਈ। 2.ਇਸਅਪੀਲਨੂੰਖਾਸਛੁੱਟੀਦੁਆਰਾਅਪੀਲਕਰਤਾ-ਕਰਦਾਤਾਵੱਲੋਂਦਿੱਲੀਹਾਈਕੋਰਟਦੇ11.10.2006 ਦੇਫੈਸਲੇਖਿਲਾਫਨਿਰਦੇਸ਼ਿਤਕੀਤੀਗਈਹੈਜੋਕਿITA ਨੰਬਰ478 ਦੇ2005 ਵਿੱਚਹੈ। 3.ਸੰਖੇਪਵਿੱਚਤੱਥਇਸਪ੍ਰਕਾਰਹਨ: Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) A "' l -MIS. HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. v. - COMMISSIONER OF INCOME TAX -... , AUGl;ST 16, 2007 .. ·, ,,,. (S.H. KAPADIA AND B. SUDERSHAN REDDY, JJ.] Judicial Interft;ren<;:e-Order by tribun_al directing reopening. of matter for further hearing-Order of tribunal having attained finality-Interference C }Y Jiigh Court-Propriety of-Held: Not proper-Judgment/Order. Income Tax Act, I96I-Sections I94C and 20I(l)-Assessee paying warehouse charges to a company on which it deducted tax under section I 94-C-Assessing Officer holding 'assessee in default' for amount of short deduction of tax and levied interest thereon-Circular that no demand D visualized under s. 20I (I) to be enforced after tax deductor satisfied the officer-in-charge of TDS, that taxes due were paid by deductee-assessee-However, interest could be levied under s. 20I till the date of payment of taxes by deductee-assessee-On facts, both interest uls 211 and tax due paid-Circular applicable to the facts of the case-CBDT Circular No. 2751 20I/95-IT (B} dated 29.1.1997. E Appellant-assessee used the premises of POC for store purpose and paid POC the warehouse charges on which tax was deducted under section 194C of the Income Tax Act, 1961 @2%. Assessing Officer held the appellant to be 'assessee in default' for the shortfall in the amount of tax deducted at F source in respect of warehouse charges paid to POC and levied interest under section 201 (IA) of the Act on the amount of tax alleged to be short deducted. Appellant filed appeal. Tribunal upheld the order of the Assessing Officer. High Court also upheld the order. Thereafter, appellant filed miscellaneous application in the appeals that were already disposed of. Appellant sought rectification of the order of tribunal on the ground that its alternative G contention raised in Ground No. 7 in the memorandum of appeal that the warehouser has been assessed on its income and the tax due has been recovered from it by the department and as such, no further tax could be collected from the appellant on the same income, was not considered by the Tribunal. The Tribunal allowed the application by recalling its earlier order. The Department ..__ 'I- did not challenge the said order. Tribunal upon rehearing the appeal held that A though the appellant-assessee was rightly held to be an 'assessee in default', there could be no recovery of the tax alleged to be in default once again from the appellant considering that POC had already paid taxes on the amount received from the appellant However, High Court held that the tribunal could not have reopened the matter for any further hearing since the earlier order of the Tribunal attained finality on dismissal of appeal filed against the earlier B order, by High Court; that the point based on Ground No. 7 was not taken up in the appeal filed by the appellant; and that the Tribunal's earlier order got itself merged into the order passed by High Court. Hence the present appeal. c Allowing the appeal, the Court HELD: 1.1. The order passed by the Tribunal to reopen the matter for further hearing as regards ground No. 7 has attained its finality. In the circumstances, the High Court could not have interfered with the final order passed by the Income-tax Appellate Tribunal. (Para 9) (1050-B) D 1.2. The circular No. 275/201/95-IT(B) dated 29.1.1997 issued by the Central Board of Direct Taxes declares "no demand visualized under s. 201 (1) of the Income-tax Act should be enforced after the tax deductor has satisfied the officer-in-charge ofTDS, that taxes due have been paid by the deductee-assessee. However, this will not alter the liability to charge interest under Section 201(1A) of the Act till the date of payment of taxes by the deductee- E assessee or the liability for penalty under Section 271C of the Income-tax Act." (Para 10) (1050-C, DI Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) উ�রদাতার পে� িপ িপ মালেহা�া, ইরশাদ আহেমদ এবং িব িভ বলরাম দাস। 1048 সুি�ম �কােট�র �িতেবদন [2007] 8 এস. িস. আর আদালত কতৃ�ক রায় �দান করা হেয়িছল িব. সুেদরশান �র��, িবচারপিত- 1. অনুমিত করা হেয়েছ। 2. আিপলকারী-করদাতা কতৃ�ক �দ� িবেশষ অনুমিতর মাধ�েম এই আিপল�ট 2005 সােলর আই�টএ নং 478-এ 11.10.2006 তািরেখর িদি� হাইেকােট�র রােয়র িব�ে� িনেদ�িশত। 3. সংে�েপ যা বলা হেয়েছ তা িন��পঃ 4. আিপলকারী-করদাতা �কামল পানীয় �তির এবং িব�েয়র সােথ জিড়ত। আিপলকারী-মূল�ায়নকারী �মসাস দীপ অেয়ল কেপ�ােরশেনর সােথ তােদর �া�ণ ব�বহােরর জন� আিপলকারী-�কা�ানীর পণ� �হণ, সংর�ণ এবং ��রেণর জন� এক�ট চ���েত আব� হন। �কানও িবতক� �নই �য আিপলকারী �মসাস� �দীপ অেয়ল কেপ�ােরশনেক �দামজাতকরেণর চাজ� �দান কেরিছেলন যার উপর আয়কর আইন, 1961 (সংে�েপ 'আইন') এর ধারা 194 িস এর অধীেন কর কত�ন করা হেয়িছল। 30.03.2001 তািরেখর আেদশ অনুসাের মূল�ায়ন কম�কত�া �মসাস� �দীপ অেয়ল কেপ�ােরশনেক �দ� �দামজাতকরেণর চােজ�র ��ে� উৎেস কর কত�েন ব�থ�তার জন� আিপলকারীেক 'অ�ােসিস ইন িডফ�' বেল �ঘাষণা কেরেছন। করদাতার এই আেবদন খািরজ কের �দন ‘’�য আিপলকারী-�কা�ািন কতৃ�ক �দ� �দান চ���িভি�ক অথ��দােনর �কৃিতর, যার উপর আইেনর ধারা 194 িস -এর অধীেন 2% হাের কর কত�ন করা হেয়িছল। অনুযায়ী, করদাতা-�কা�ািন কতৃ�ক �দ� অথ��দান আইেনর ধারা 194 এর ব�াখ�ায় সং�ািয়ত ভাড়ার �কৃিতর িছল এবং, অতএব, আইেনর ধারা 194 িস -এর অধীেন 2% হাের কর কত�েনর িবপরীেত, উ� িবধান অনুসাের কর 20% হাের কত�ন করা উিচত িছল। মূল�ায়নকারী কম�কত�া উৎেস কত�নকৃত কেরর পিরমােণর ঘাটিতর জন� আিপলকারীেক ‘করদাতা িডফ�’ িহেসেব গণ� কের আইেনর ধারা 201(1এ) এর অধীেন সুদ ধায� ‘কের, যা �� কত�নেযাগ� বেল অিভেযাগ করা হয়। মূল�ায়নকারী কম�কত�া তদনুসাের কেরর �� কত�েনর পিরমাণ িনধ�ারণ কেরন এবং আইেনর ধারা 201(1এ) এর অধীেন �েদয় সুদও ধায� কেরন। 5. আিপলকারী আয়কর কিমশনার (আিপল) এর কােছ এবং তারপের �াইবু�নােল করদাতার আেদেশর িব�ে� আিপল কেরন। �াইবু�নাল আরও মেন কেরন �য আিপলকারী করদাতােক �� কর কত�েনর পিরমােণর ��ে� 'অ�ােসিস ইন িডফ�' িহেসেব িবেবচনা করা হয় এবং আইেনর ধারা 201(1ক) এর অধীেন সুেদর ধায�করণও বহাল রাখা হয়। আিপলকারী-করদাতার করা আরও আিপল 21.05.2004 তািরেখ হাইেকাট� কতৃ�ক খািরজ করা হয়। 6. এরপর আিপলকারী িবিবধ আেবদন কেরন 1049 12.07.2002 তািরেখর �াইবু�নােলর আেদশ সংেশাধেনর জন� ইিতমেধ�ই িন�ি� হওয়া আিপল�িল। উে�খ�, আিপলকারী 'অ�ােসিস ইন িডফ�' হওয়ার িবষেয় �কানও িবেরাধ উ�াপন কেরনিন এবং আইেনর ধারা 201 (1 ক) এর অধীেন সুেদর আদােয়র িবষেয়ও �কানও আপি� উ�াপন কেরনিন। আিপলকারীর অিভেযাগ িছল �য তার িবক� যু�� িছল �য �দাম মািলেকর আেয়র উপর মূল�ায়ন করা হেয়েছ এবং িবভাগ কতৃ�ক তার কাছ �থেক বেকয়া কর আদায় করা হেয়েছ এবং অতএব, আিপলকারীর কাছ �থেক আর �কানও কর আদায় করা স�ব হয়িন, �াইবু�নাল 12.07.2002 তািরেখর আেদেশ িবেবচনা কেরিন। িবেরাধ িছল �য �যেহত� িবভাগ কতৃ�ক আেয়র উপর আদায়েযাগ� কর ইিতমেধ�ই করদাতা কতৃ�ক পিরেশাধ করা হেয়েছ, তাই একই আেয়র উপর আিপলকারীর কাছ �থেক আর �কানও কর আদায় করা উিচত নয়। �াইবু�নাল তার 13.09.2004 তািরেখর আেদেশর মাধ�েম আিপলকারীর আেবদন মঞ্জুর কের �য আিপল িন�ি�র সময় আিপলকারীর িবক� যু�� িবেবচনা করা হয়িন। আিপলকারীর �ারা �দ� আিপল �ারকিলিপর �াউ� নং 7-এ এই যু���ট িবেশষভােব উ�ািপত হেয়িছল। �াইবু�নাল তদনুসাের, �রকেড�র সামেন এক�ট �� ভ�ল রেয়েছ এবং তাই আইেনর ধারা 254 (2) এর অধীেন এ�ট এক�ট সংেশাধনেযাগ� ভ�ল। �াইবু�নাল �সই অনুযায়ী আিপল �ারেকর �াউ� নং 7-এ উ�ািপত িনিদ যু�� �হেণর সীিমত উে�েশ� 12.07.2002 তািরেখর তার পূব�বত� আেদশ�ট �ত�াহার কের। িবষয়�ট পুনরায় �খালার িনেদ�শ �দওয়া এই আেদশ�ট চূড়া� পয�ােয় �পৗ�েছেছ। িবভাগ�ট উ� আেদশেক চ�ােল� কেরিন। 7. আিপল�ট পুনরায় �নািনর পর �াইবু�নাল রায় �দয় �য, যিদও আিপলকারী-করদাতােক যথাযথভােব '�খলািপ করদা�ী' িহসােব ধরা হেয়িছল, তেব আেবদনকারীর কাছ �থেক আরও একবার �খলািপ কর আদায় করা যােব না কারণ �দীপ অেয়ল কেপ�ােরশন ইিতমেধ� আেবদনকারীর কাছ �থেক �া� পিরমােণর উপর কর �দান কেরেছ। এ�ট ল�� করা �েয়াজন �য িবভাগ�ট �াইবু�নােলর সামেন �ীকার কেরেছ �য কর িডডাকটেরর কাছ �থেক আরও একবার আদায় করা যােব না �যখােন �াপক �সই আয়�ট অ�ভ� কেরিছেলন যার উপর কর তার করেযাগ� আেয়র মেধ� সংি��ভােব �কেট �নওয়া হেয়িছল এবং তার উপর কর �দান করা হেয়িছল। �কানও িবতক� �নই �য, �দীপ অেয়ল কেপ�ােরশন ইিতমেধ�ই আেবদনকারীর কাছ �থেক �া� আেয়র উপর কর �দান কেরেছ এবং কর িবভাগ �থেক �ফরত �পেয়েছ। �াইবু�নাল স�ঠক িস�াে� �পৗ�েছেছ �য কর আেবদনকারীর (কত�নকারী-মূল�ায়নকারী) কাছ �থেক আরও একবার আদায় করা যায়িন কারণ কর ইিতমেধ� আেয়র �াপক �ারা �দান করা হেয়েছ। Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 1.3. मौजूदा मामले में, अपीलकर्ता ने अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज काभुगतान किया था और इसमें कोई विवाद नहीं है कि देय कर का भुगतान निर्धारिती, पीओसी द्वाराकिया गया था। इसमें कोई विवाद नहीं है कि परिपत्र मौजूदा तथ्यों पर लागू होता है। (पैरा 11)(1050 - ई) सिविल अपीलीय क्षेत्राधिकार: सिविल अपील संख्या 3765 /2007 नई दिल्ली में दिल्ली उच्च न्यायालय के दिनांक 11.10.2006 के निर्णय और आदेशश सेआई.टी.ए. 2005 की संख्या 478 और 843। अपीलार्थी की ओर से सोली जे. सोराबजी, भार्गव वी. देसाई, कविता झा, राहुल गुप्ता औररीमा शशर्मा। प्रत्यर्थी की ओर से पी. पी. मल्होत्रा, इरशशाद अहमद और बी. वी. बलराम दास। न्यायालय का निर्णय इसके द्वारा किया गया था। नयायमूर्ति, बी. सुदर्शन रेडी, अनुमति दी। 2. अपीलार्थी - निर्धारिती द्वारा विशशेष अनुमति से दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक11.10.2006 आई.टी.ए. संख्या 478 / 2005 के विरूद्ध अपील की। 3. संक्षेप में बताए गए तथ्य इस प्रकार हैं: 4. अपीलकर्ता - निर्धारिती शशीतल पेय के निर्माण और बिक्री में लगा हुआ है। अपीलकर्ता -निर्धारिती ने मैसर्स प्रदीप ऑयल कॉर्पोरेशशन के साथ अपीलकर्ता - कंपनी से संबंधित माल की प्राप्ति,भंडारण और प्रेषण के लिए उनके परिसर का उपयोग करने के लिए समझौता किया। इसमें कोईविवाद नहीं है कि अपीलकर्ता ने मेसर्स प्रदीप ऑयल कॉर्पोरेशशन को गोदाम शशुल्क का भुगतान कियाजिस पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194 सी के तहत 2 प्रतिशशत की दर से कर काटागया था। निर्धारण अधिकारी ने दिनांक 30.3.2001 के आदेशश के तहत मैसर्स प्रदीप ऑयलकॉर्पोरेशशन को भुगतान किए गए गोदाम शशुल्क के संबंध में स्रोत पर कर कटौती करने में विफलता केलिए अपीलकर्ता को चूक में निर्धारिती माना। निर्धारण अधिकारी ने निर्धारिती की इस दलील कोखारिज कर दिया कि अपीलकर्ता - कंपनी द्वारा किए गए भुगतान संविदात्मक भुगतान की प्रकृति का था जिस पर अधिनियम की धारा 194 सी के तहत 2 प्रतिशशत कर काटा गया था। तदनुसार,निर्धारण अधिकारी का मानना है कि गोदाम शशुल्क अधिनियम की धारा 194-1 के स्पष्टीकरण मेंतपरिभाषित किराए की प्रकृति में था और इसलिए अधिनियम की धारा 194 सी के तहत 2 प्रतिशशपर कर की कटौती के मुकाबले उक्त प्रावधानों के तहत 20 प्रतिशशत की कटौती की जानी चाहिए थी।कर निर्धारण अधिकारी ने अपीलकर्ता को स्रोत पर काटे गए कर की राशि में कमी के लिए अधिनियमकी धारा 201(1 ए) के तहत कथित रूप से कम काटे गए कर की राशि पर ब्याज लगाए जाने केलिए ‘चूक में निर्धारिती’ माना है। निर्धारण अधिकारी ने तदनुसार कर की कम कटौती की राशिनिर्धारित की और अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत उस पर देय ब्याज भी लगाया। 5. अपीलकर्ता ने निर्धारण अधिकारी के आदेशश के खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) केसमक्ष और उसके बाद अधिकरण के समक्ष अपील दायर की। अधिकरण ने भी यह विचार किया किकर की कम कटौती की राशि के संबंध में अपीलकर्ता - निर्धारिती को ‘चूक में निर्धारिती’ माना जाएऔर अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज की वसूली को भी बरकरार रखा गया।अपीलकर्ता - निर्धारिती द्वारा की गई आगे की अपील को उच्च न्यायालय ने 21.5.2004 को खारिजकर दिया गया। 6. इसके बाद अपीलकर्ता ने अपील विविध आवेदन को प्राथमिकता दी कि अधिकरण केदिनांक 12.7.2002 के आदेशश में सुधार की मांग करने वाली अपीलों का निपटारा पहले ही किया जाचुका था। ज्ञात हो, अपीलकर्ता ने 'चूक में निर्धारिती’ होने के बारे में कोई विवाद नहीं उठाया औरअधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज लगाने के संबंध में भी कोई आपत्ति नहीं उठाई।अपीलकर्ता की शिकायत यह थी कि उसके वैकल्पिक तर्क पर कि गोदाम शशुल्क का मूल्यांकन उसकीआय पर किया गया है और विभाग द्वारा उससे देय कर की वसूली की गई है और इसलिए,अपीलकर्ता से कोई और कर एकत्र नहीं किया जा सकता था, इस पर अधिकरण ने अपने आदेशशदिनांक 12.7.2002 में विचार नहीं किया गया। तर्क यह था कि चूंकि विभाग द्वारा आय पर वसूलाजाने वाला कर निर्धारिती द्वारा पहले ही भुगतान किया जा चुका है, इसलिए उसी आय परअपीलकर्ता से कोई और कर नहीं वसूला जाना चाहिए। अधिकरण ने अपने आदेशश दिनांक13.9.2004 के तहत अपीलकर्ता के आवेदन को इस आधार पर अनुमति दी कि अपील का निपटाराकरते समय अपीलकर्ता के वैकल्पिक तर्क पर विचार नहीं किया गया है। यह विवाद विशशेष रूप सेअपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत अपील के ज्ञापन के ग्राउंड नंबर 7 में उठाया गया था। अधिकरण ने तदनुसारमाना, उस हद तक, रिकॉर्ड पर स्पष्ट गलती है और इसलिए, अधिनियम की धारा 254(2) के तहत Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 11.10.2006ਦਿੱਲੀਦੀਹਾਈਕੋਰਟਵਿੱਚਨਵੀਂਦਿੱਲੀਵਿੱਚ ਦੀਤਾਰੀਖਨਾਲਜੱਜਮੈਂਟਅਤੇਆਦੇਸ਼ਤੋਂਆਈ.ਟੀ.ਏ. ਨੰਬਰ478 ਅਤੇ843 ਦੇ2005। ਅਪੀਲਕਰਤਾਲਈਸੋਲੀਜੇ. ਸੋਰਾਬਜੀ, ਭਾਰਗਵਵੀ. ਦੇਸਾਈ, ਕਵਿਤਾਝਾ, ਰਾਹੁਲਗੁਪਤਾਅਤੇਰੀਮਾਸ਼ਰਮਾ। ਜਵਾਬਦੇਹਲਈਪੀ.ਪੀ. ਮਲਹੋਤਰਾ,.ਵੀ. ਬਾਲਰਾਮਦਾਸ। ਇਰਸ਼ਾਦਅਹਮਦਅਤੇਬੀ ਅਦਾਲਤਦਾਫੈਸਲਾਇਸਪ੍ਰਕਾਰਸੁਨਾਇਆਗਿਆਸੀ ਬੀ. ਸੁਦਰਸ਼ਨਰੈੱਡੀ, ਨਾਇਬਨਿਆਂਕਾ. ਆਈ. ਛੁੱਟੀਦਿੱਤੀਗਈ। 2.ਇਸਅਪੀਲਨੂੰਖਾਸਛੁੱਟੀਦੁਆਰਾਅਪੀਲਕਰਤਾ-ਕਰਦਾਤਾਵੱਲੋਂਦਿੱਲੀਹਾਈਕੋਰਟਦੇ11.10.2006 ਦੇਫੈਸਲੇਖਿਲਾਫਨਿਰਦੇਸ਼ਿਤਕੀਤੀਗਈਹੈਜੋਕਿITA ਨੰਬਰ478 ਦੇ2005 ਵਿੱਚਹੈ। 3.ਸੰਖੇਪਵਿੱਚਤੱਥਇਸਪ੍ਰਕਾਰਹਨ: 4.ਅਪੀਲਕਰਤਾ-ਕਰਦਾਤਾਸੌਫਟਡ੍ਰਿੰਕਸਦੇਨਿਰਮਾਣਅਤੇਵਿਕਰੀਵਿੱਚਲੱਗਿਆਹੋਇਆਹੈ।ਅਪੀਲਕਰਤਾ-,/ਐਸ.ਕਰਦਾਤਾਨੇਆਪਣੇਸਮਾਨਦੀਪ੍ਰਾਪਤੀ ਸਟੋਰੇਜਅਤੇਭੇਜਣਲਈਆਪਣੀਜਗ੍ਹਾਦੇਇਸਤੇਮਾਲਲਈਐਮ/ਐਸ.ਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਨਾਲਇੱਕਸਮਝੌਤਾਕੀਤਾ।ਇਹਗੱਲਵਿਵਾਦਤਨਹੀਂਹੈਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਐਮ'ਤੇਆਮਦਨਟੈਕਸਐਕਟ,ਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਨੂੰਵੇਅਰਹਾਊਸਿੰਗਚਾਰਜਿਜ਼ਦਾਭੁਗਤਾਨਕੀਤਾਸੀਜਿਸ1961 ('ਨੇ30.3.2001ਛੋਟੇਰੂਪਵਿੱਚ ਦੀਤਾਰੀਖਵਾਲੇਆਦੇਸ਼ਵਿੱਚਅਪੀਲਕਰਤਾਨੂੰ'ਐਕਟ') ਦੀਧਾਰਾ194C ਅਧੀਨ2% ਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕੀਤੀਗਈਸੀ।ਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀ'ਕਰਦਾਤਾਵਿੱਚਚੂਕ' ਵਜੋਂਮੰਨਿਆਸੀਕਿਉਂਕਿ''ਐਮ/ਐਸ.ਤੇਸਰੋਤਤੇਟੈਕਸਕਟੌਤੀ ਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਨੂੰਭੁਗਤਾਨਕੀਤੇਗਏਵੇਅਰਹਾਊਸਿੰਗਚਾਰਜਿਜ਼-ਨਾਕਰਨਲਈ।ਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀਨੇਕਰਦਾਤਾਦੀਇਸਦਲੀਲਨੂੰਰੱਦਕਰਦਿੱਤਾਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਕੀਤੇਗਏਭੁਗਤਾਨਠੇਕੇਦਾਰੀਭੁਗਤਾਨਦੀਕਿਸਮਦੇਸਨਜਿਸ'ਤੇਐਕਟਦੀਧਾਰਾ194C ਅਧੀਨ2%ਕੰਪਨੀਵੱਲੋਂ ਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕੀਤੀਗਈਸੀ।ਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀਨੇਇਸਅਨੁਸਾਰਫੈਸਲਾਕੀਤਾਕਿਵੇਅਰਹਾਊਸਿੰਗਚਾਰਜਿਜ਼ਐਕਟਦੀ ਧਾਰਾ194-I ਦੀਵਿਆਖਿਆਵਿੱਚਪਰਿਭਾਸ਼ਿਤਕਿਰਾਏਦੀਕਿਸਮਦੇਸਨਅਤੇ, ਇਸਲਈ, ਐਕਟਦੀਉਕਤ20%194C ਅਧੀਨ2% ਟੈਕਸਕਟੌਤੀਦੇਧਾਰਾਵਾਂਅਧੀਨ ਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕੀਤੀਜਾਣੀਚਾਹੀਦੀਸੀਜਿਵੇਂਕਿਧਾਰਾ'''ਵਿਰੁੱਧ।ਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀਨੇਸਰੋਤਤੇਟੈਕਸਦੀਘਾਟਦੀਰਕਮਦੇਟੈਕਸਦੀਕਟੌਤੀਲਈਕਰਦਾਤਾਵਿੱਚਚੂਕ'ਵਜੋਂਅਪੀਲਕਰਤਾਨੂੰਮੰਨਿਆਅਤੇਐਕਟਦੀਧਾਰਾਕੀਤਾ।ਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀਨੇਇਸਅਨੁਸਾਰਟੈਕਸਦੀਘਾਟਦੀਰਕਮਅਤੇਉਸ201(1A) ਅਧੀਨਟੈਕਸਦੀਘਾਟਦੀਰਕਮ'ਤੇਲਾਗੂਬਿਆਜਦਾਨਿਰਧਾਰਣਤੇਬਿਆਜਲਾਗੂਕੀਤਾ। 5.() ਅਗੇਅਤੇਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਮੁਲਾਂਕਣਅਧਿਕਾਰੀਦੇਆਦੇਸ਼ਖਿਲਾਫਆਮਦਨਟੈਕਸਕਮਿਸ਼ਨਰਅਪੀਲਾਂ-ਕਰਦਾਤਾਉਸਤੋਂਬਾਅਦਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਅਗੇਅਪੀਲਕੀਤੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਵੀਇਹਵਿਚਾਰਰੱਖਿਆਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾ''ਨੂੰਟੈਕਸਦੀਘਾਟਦੀਰਕਮਦੇਸੰਬੰਧਵਿੱਚਕਰਦਾਤਾਵਿੱਚਚੂਕ ਵਜੋਂਮੰਨਿਆਗਿਆਅਤੇਐਕਟਦੀਧਾਰਾ-201(1A) ਅਧੀਨਬਿਆਜਦੇਲਾਗੂਹੋਣਨੂੰਵੀਬਰਕਰਾਰਰੱਖਿਆ।ਅਪੀਲਕਰਤਾਕਰਦਾਤਾਵੱਲੋਂਅਗਲੀਅਪੀਲਹਾਈਕੋਰਟਵੱਲੋਂ21.5.2004 ਨੂੰਰੱਦਕਰਦਿੱਤੀਗਈ। 6.12.7.2002 ਇਸਤੋਂਬਾਅਦਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਅਪੀਲਾਂਵਿੱਚਫੁਟਕਲਅਰਜ਼ੀਆਂਨੂੰਤਰਜੀਹਦਿੱਤੀਜੋਕਿਦੇਇੱਕਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੇਆਦੇਸ਼ਵਿੱਚਸੁਧਾਰਦੀਮੰਗਕਰਨਲਈਪਹਿਲਾਂਹੀਨਿਪਟਾਏਗਏਸਨ।ਇਹਨੋਟਕੀਤਾਜਾਵੇ,'' ਹੈਅਤੇਐਕਟਦੀ ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਇਸਬਾਰੇਕੋਈਵਿਵਾਦਨਹੀਂਉਠਾਇਆਕਿਇਹਡਿਫਾਲਟਮੁਲਾਂਕਣਧਾਰਾ201(1A) ਦੇਤਹਿਤਵਿਆਜਦੀਵਸੂਲੀਬਾਰੇਵੀਕੋਈਇਤਰਾਜ਼ਨਹੀਂਉਠਾਇਆ।ਅਪੀਲਕਰਤਾਦੀ'ਸ਼ਿਕਾਇਤਇਹਸੀਕਿਉਸਦੀਬਦਲਵੀਂਦਲੀਲਕਿਗੋਦਾਮਦੀਆਮਦਨਤੇਮੁਲਾਂਕਣਕੀਤਾਗਿਆਹੈਅਤੇਵਿਭਾਗ,ਦੁਆਰਾਉਸਤੋਂਬਕਾਇਆਟੈਕਸਵਸੂਲਿਆਗਿਆਹੈਅਤੇਇਸਲਈ ਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਕੋਈਹੋਰਟੈਕਸਵਸੂਲਿਆ,12.7.2002 ਵਿੱਚ।ਦਲੀਲਨਹੀਂਜਾਸਕਦਾਸੀ ਨੂੰਵਿਚਾਰਿਆਨਹੀਂਗਿਆ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਆਪਣੇਹੁਕਮਮਿਤੀ'ਇਹਸੀਕਿਕਿਉਂਕਿਆਮਦਨਤੇਵਿਭਾਗਦੁਆਰਾਵਸੂਲੀਜਾਣਵਾਲਾਟੈਕਸਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾਦੁਆਰਾਪਹਿਲਾਂਹੀ'ਅਦਾਕੀਤਾਜਾਚੁੱਕਾਹੈ13.9.2004, ਇਸਲਈਉਸੇਆਮਦਨਤੇਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਕੋਈਹੋਰਟੈਕਸਵਸੂਲਿਆਜਾਣਾਚਾਹੀਦਾਹੈ।'ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇ ਦੇਆਪਣੇਹੁਕਮਰਾਹੀਂਅਪੀਲਕਰਤਾਦੀਅਰਜ਼ੀਨੂੰਇਸਆਧਾਰ'ਤੇਮਨਜ਼ੂਰੀਦਿੱਤੀਸੀਕਿਅਪੀਲਦਾਨਿਪਟਾਰਾਕਰਦੇਸਮੇਂਅਪੀਲਕਰਤਾਦੀਵਿਕਲਪਕਦਲੀਲਵਿਵਾਦਅਪੀਲਕਰਤਾਦੁਆਰਾਤਰਜੀਹੀਅਪੀਲਦੇਮੈਮੋਰੰਡਮਦੇਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰਤੇਵਿਚਾਰਨਹੀਂਕੀਤਾਗਿਆਹੈ।ਇਹ7 ਵਿੱਚਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤੌਰ'ਤੇਉਠਾਇਆਗਿਆਸੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਇਸਦੇਅਨੁਸਾਰ, ਉਸਹੱਦਤੱਕ, ਰਿਕਾਰਡਦੇਸਾਹਮਣੇਇੱਕਗਲਤੀਜ਼ਾਹਰਹੈਅਤੇ, ਇਸਲਈ, ਐਕਟਦੀਧਾਰਾ254 (2) ਦੇਤਹਿਤਇੱਕਸੁਧਾਰੀਗਲਤੀਬਣਦੀਹੈ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਇਸਅਨੁਸਾਰਅਪੀਲਦੇ7ਮੈਮੋਰੰਡਮਵਿੱਚਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰ ਵਿੱਚਉਠਾਏਗਏਵਿਸ਼ੇਸ਼ਗਰਾਊਂਡਨੂੰਲੈਣਦੇਸੀਮਤਉਦੇਸ਼ਲਈਮਿਤੀ12.7.2002 ਦੇਆਪਣੇਕਾਰਲੀਅਰਆਦੇਸ਼ਨੂੰਵਾਪਸਬੁਲਾਲਿਆ।ਮਾਮਲੇਨੂੰਮੁੜਖੋਲ੍ਹਣਦਾਨਿਰਦੇਸ਼ਦੇਣਵਾਲਾਇਹਹੁਕਮਆਪਣੀਅੰਤਿਮਛੋਹਪ੍ਰਾਪਤਕਰਗਿਆਹੈ।ਵਿਭਾਗਨੇਉਕਤਹੁਕਮਾਂਨੂੰਚੁਣੌਤੀਨਹੀਂਦਿੱਤੀ। 7.7ਸੁਣਨਤੋਂਬਾਅਦਫੈਸਲਾਕੀਤਾਕਿਹਾਲਾਂਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਮੰਨਿਆਗਿਆਸੀਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਇਸਤੋਂਬਾਅਦ, ਵਿੱਚਵਿਵਿਧਅਰਜ਼ੀਦਾਖਲਕੀਤੀ।ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਨੇਅਪੀਲਨੂੰਮੁੜ-ਕਰਦਾਤਾਨੂੰਸਹੀਤੌਰ'ਤੇ'ਕਰਦਾਤਾਵਿੱਚਚੂਕ'' ਵਜੋਂ ਪਰਜੇਕਰਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਨੇਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਪ੍ਰਾਪਤਰਕਮਤੇਪਹਿਲਾਂਹੀਟੈਕਸ(ਕਟੌਤੀਕਰਤਾ-ਕਰਦਾਤਾ)ਭਰਦਿੱਤਾਹੋਵੇਤਾਂਅਪੀਲਕਰਤਾ ਤੋਂਟੈਕਸਮੁੜਵਸੂਲਨਹੀਂਕੀਤਾਜਾਸਕਦਾ।ਇਹਨੋਟਕਰਨਾਜ਼ਰੂਰੀਹੈਕਿਵਿਭਾਗਨੇਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਅੱਗੇਇਹਸਵੀਕਾਰਕੀਤਾਕਿਜੇਕਰਭੁਗਤਾਨਕਰਨਵਾਲਾਉਸਆਮਦਨ'ਤੇਜਿਸ'ਤੇਟੈਕਸਦੀਘਾਟਹੋਣਦਾਦਾਅਵਾਕੀਤਾਗਿਆਸੀ, ਆਪਣੀਕਰਯੋਗਆਮਦਨਵਿੱਚਸ਼ਾਮਲ'ਕਰਦਾਹੈਅਤੇਉਸਤੇਟੈਕਸਭਰਦਾਹੈਤਾਂਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕਰਤਾਤੋਂਮੁੜਵਸੂਲੀਨਹੀਂਕੀਤੀਜਾਸਕਦੀ।ਕੋਈਵਿਵਾਦਨਹੀਂਹੈਕਿਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨਨੇਅਪੀਲਕਰਤਾਤੋਂਪ੍ 8.'ਤੇਦਖਲਦਿੱਤਾਕਿ ਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਪਾਸਕੀਤੇਗਏਆਦੇਸ਼ਨਾਲਇਸਆਧਾਰ12.7.2002ਆਮਦਨਕਰਅਪੀਲੇਟਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦਾਆਦੇਸ਼ਮਿਤੀ ਨੂੰਆਪਣੀਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਚੁੱਕਾਹੈਕਿਉਂਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਦੁਆਰਾਇਸਖਿਲਾਫਦਾਇਰਕੀਤੀਗਈਅਪੀਲਨੂੰਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇ21.5.2004 ਨੂੰਖਾਰਜਕਰਦਿੱਤਾਸੀ;7 'ਤੇ ਅਪੀਲਕਰਤਾਦੁਆਰਾਉੱਚਅਦਾਲਤਵਿੱਚਪਸੰਦਕੀਤੀਗਈਅਪੀਲਵਿੱਚਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰਆਧਾਰਿਤਬਿੰਦੂਨੂੰਨਹੀਂਚੁੱਕਿਆਗਿਆਸੀ।ਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇਹੋਰਫੈਸਲਾਦਿੱਤਾਕਿਆਮਦਨਕਰਅਪੀਲੇਟ Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 1.3. In the instant case, the appellant had paid the interest under Section 201(1A) of the Act and there is no dispute that the tax due had been paid by deductee-assessee, POC. It is not disputed that the circular is applicable to F the facts situation on hand. (Para 11) (1050-E) CIVIL APPELLATE JURISDICTION : Civil Appeal No. 3765 of2007. From the Judgment and Order dated 11. I 0.2006 of the High Court of Delhi at New Delhi in LT.A. Nos. 478 and 843of2005. Soli J. Sorabjee, Bhargava V. Desai, Kavita Jha, Rahul Gupta and Reema Sharma for the Appellant. G P.P. Malhotra, lrshad Ahmad and B.V. Balaram Das for the Respondent. H 1048 SUPREME COURT REPORTS A The Judgment of the Court was delivered by B. SUDERSHAN REDDY, J. l. Leave granted. [2007] 8 S.C.R. 2. This appeal by Special Leave preferred by the appellant-assessee is directed against the judgment of Delhi High Court dated I I. I 0.2006 in IT A No. B 478 of2005. 3. Briefly stated the facts are as follows: .4. The appellant-assessee is engaged in the manufacture and sale of soft drinks. The appellant- assessee entered into an agreement with Mis. C Pradeep Oil Corporation for use of their premises for receipt, storage and dispatch of goods belonging to the appellant-company. There is no dispute that the appellant had paid the warehousing charges to Mis. Pradeep Oil Corporation on which tax was deducted under Section 194C of the Income Tax Act, 196I (for short 'the Act')@ 2%. The Assessing Officer vide order dated D 30.3.200I held the appellant to be 'assessee in default' for failure to deduct tax at source in respect of warehousing charges paid to Mis. Pradeep Oil Corporation. The Assessing Officer rejected the plea of the assessee that the payments made by the appellant-company were in the nature of contractual payments on which tax was deducted under Section I 94C of the Act at 2%. The Asst:ssing Officer accordingly heL ~iat the warehousing charges were E in the nature ofrent as defined in Explanation to Section I94-I of the Act and, I therefore, tax ought to have been deducted at 20% under the said provisions as against deduction of tax at 2% under Section I 94C of the Act. The Assessing Officer having held the appellant to be 'assessee in default' for the shortfall in the amount of tax deducted at source levied interest under Section 20I(IA) of the Act on the amount of tax alleged to be short deducted. The F Assessing Officer accordingly determined the amount of short deduction of tax and also levied interest payable thereon under Section 201(1A) of the Act. 5. The appellant preferred an appeal against the order of the Assessing Officer before the Commissioner of Income Tax (Appeals) and thereafter G before the Tribunal. The Tribunal also took the view that the appellant-assessee to be an 'assessee in default' in respect of the amount of short deduction of tax and also upheld the levy of interest under Section 20I(IA) of the Act. The further appeal preferred by the appellant-assessee was dismissed by the High Court on 21.5.2004. 6. The appellant thereafter preferred miscellaneous application in the 1049 Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 8. হাইেকাট� �াইবু�নাল কতৃ�ক �দ� আেদেশ হ�ে�প কেরেছ এই িভি�েত �য আয়কর আিপল �াইবু�নােলর 12.7.2002 তািরেখর আেদশ�ট আিপলকারী �ারা দােয়র করা আিপেলর পর �থেক তার চূড়া�তা অজ�ন কেরেছ 1050 সুি�ম �কােট�র �িতেবদন [2007] 8 এস. িস. আর হাইেকাট� খািরজ কের িদেয়েছ 21.5.2004-তািরেখ; 7 নং িভি�র উপর িভি� কের পেয়��ট উ� আদালেত আিপলকারীর �ারা পছ� করা আেবদেন �নওয়া হয়িন। হাইেকাট� আরও বেলেছ �য, আয়কর আিপল �াইবু�নােলর 12.7.2002 তািরেখর আেদশ�ট এখােন আিপলকারীর আেবদন খািরজ কের 21.5.2004-এ তার �ারা গৃহীত আেদেশর সােথ একীভূত হেয়েছ। হাইেকাট� এই িস�াে� �পৗ�েছিছল �য �াইবু�নাল �কানও কারেণ িবষয়�ট পুনরায় খুলেত পারত না আরও �নািনর জন�। 9. আমরা ইিতমেধ�ই ল�� কেরিছ �য, 7 ন�র িবষয়�টেক আরও �নািনর জন� পুনরায় �খালার জন� �াইবু�নাল কতৃ�ক �দ� আেদশ চূড়া� পয�ােয় �পৗ�েছেছ। এই পিরি�িতেত হাইেকাট� আয়কর আিপল �াইবু�নােলর চূড়া� আেদেশ হ�ে�প করেত পারত না। 10. যাই �হাক না �কন, িব�ি� নং 275/201/95-আই�ট (িব) তািরখ 29.1.1997 �ক�ীয় �ত�� কর পষ�েদর জাির করা এই িবতেক�র অবসান ঘটােনা উিচত বেল আমরা মেন কির। িব�ি�েত �ঘাষণা করা হেয়েছ �য, "আয়কর আইেনর 201 (1) ধারার অধীেন �কানও দািব কায�কর করা উিচত নয়, যখন কর ছাড়কারী �ট. িড. এস-এর দািয়ে� থাকা আিধকািরকেক স�� কের �য, কর ছাড়কারী-করদাতার �ারা বেকয়া কর �দান করা হেয়েছ। তেব, এই আইেনর 201 (1এ) ধারার অধীেন করদাতার �ারা কর পিরেশােধর তািরখ পয�� বা আয়কর আইেনর 271িস ধারার অধীেন জিরমানার দায়ব�তার ��ে� �কানও পিরবত�ন হেব না।” 11. তাৎ�িণক ��ে�, আিপলকারী ধারার 201 (1ক) অধীেন সুদ �দান কেরিছেলন। আইেনর এবং �কানও িবতক� �নই �য বেকয়া কর ছাড়কারী-করদাতার (�মসাস� �দীপ অেয়ল কেপ�ােরশন) �ারা �দান করা হেয়িছল। আমােদর সামেন এটা িবতিক�ত নয় �য, এই িব�ি� হােত থাকা বা�ব পিরি�িতর ��ে� �েযাজ� িকনা। 12. এই পিরি�িতেত, নিথর সামেন দৃশ�মান ��ট সংেশাধন করার জন� �াইবু�নাল আিপল�ট আেদৗ পুনরায় চালু করেত পারত িকনা �স স�েক� িব�ািরতভােব যাওয়ার �েয়াজন �নই। আমরা এই িবষেয় �কানও দৃঢ় মতামত �কাশ করেত চাই না। 13. হাইেকােট�র িবতিক�ত রায়�ট �সই অনুযায়ী বািতল করা হয়। খরচ স�েক� �কানও আেদশ ছাড়াই আিপেলর অনুমিত �দওয়া হয়। আিপল অনুেমািদত। এন. �জ DISCLAIMER The translated Judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the Judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation. । Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) एक सुधार योग्य गलती है। तदनुसार, अधिकरण ने अपील के ज्ञापन में ग्राउंड नंबर 7 में उठाए गएविशशेष आधार को लेने के सीमित उद्देश्य के लिए अपने पहले के आदेशश दिनांक 12.7.2002 कोवापस ले लिया। मामले को दोबारा खोलने का निर्देशश देने वाला यह आदेशश अंतिमता प्राप्त कर चुकाहै। विभाग ने उक्त आदेशश को चुनौती नहीं दी। 7. अधिकरण ने अपील पर दोबारा सुनवाई करते हुए कहा कि हालांकि अपीलकर्ता -निर्धारिती को ‘चूक में निर्धारिती’ माना गया था, अपीलकर्ता से एक बार फिर से चूक करने वालेकथित कर की कोई वसूली नहीं की जा सकती है। अपीलकर्ता से प्राप्त राशि पर प्रदीप ऑयलकॉर्पोरेशशन द्वारा कर का भुगतान पहले ही कर दिया गया है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विभागने अधिकरण के समक्ष स्वीकार किया कि कर कटौतीकर्ता से एक बार फिर से वसूली नहीं की जासकती है, जहां भुगतानकर्ता ने उस आय को शशामिल किया है जिस पर कर की कटौती का आरोपलगाया गया था और उस पर कर का भुगतान किया गया था। इस बात पर कोई विवाद नहीं है किप्रदीप ऑयल कॉर्पोरेशशन ने अपीलकर्ता से प्राप्त अपनी आय पर देय कर का भुगतान पहले ही करदिया था और कर विभाग से रिफंड प्राप्त कर लिया था। अधिकरण सही निष्कर्ष पर पहुंचा कि कर एकबार फिर अपीलकर्ता (कटौतीकर्ता - निर्धारिती) से वसूल नहीं किया जा सकता क्योंकि कर काभुगतान आय प्राप्तकर्ता द्वारा पहले ही किया जा चुका है। 8. उच्च न्यायालय ने अधिकरण द्वारा पारित आदेशश में इस आधार पर हस्तक्षेप किया किलाफआयकर अपीलीय अधिकरण के दिनांक 12.7.2002 के आदेशश ने अपीलकर्ता द्वारा इसके खिदायर अपील के बाद से अपनी अंतिम स्थिति प्राप्त कर ली है।21.5.2004 को उच्च न्यायालय द्वाराखारिज कर दिया गया था। ग्राउंड नंबर 7 पर आधारित बिंदु को अपीलकर्ता द्वारा उच्च न्यायालय मेंदायर अपील में नहीं लिया गया था। उच्च न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि आयकर अपीलीयन्यायाधिकरण का दिनांक 12.7.2002 का आदेशश 21.5.2004 को पारित आदेशश में विलय हो गया,जिसमें अपीलकर्ता की अपील को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचाकि अधिकरण इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए दोबारा नहीं खोल सकता था। 9. हमने पहले ही देखा है कि ग्राउंड नंबर 7 के संबंध में मामले को अग्रिम सुनवाई के लिएफिर से खोलने के लिए अधिकरण द्वारा पारित आदेशश अपनी अंतिम स्थिति में पहुंच गया है। इनपरिस्थितियों में, उच्च न्यायालय आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित अंतिम आदेशश मेंहस्तक्षेप नहीं कर सकता था। 10. जैसा भी हो, हमारी सुविचारित राय में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी परिपत्र संख्या275/201/95-आईटी(बी) दिनांक 29.1.1997 से विवाद समाप्त हो जाना चाहिए। परिपत्र मेंघोषणा की गई है कि कर कटौतीकर्ता द्वारा टीडीएस के प्रभारी अधिकारी को संतुष्ट करने के बादआयकर अधिनियम की धारा 201(1) के तहत कल्पना की गई कोई भी मांग लागू नहीं की जानीचाहिए, कि कटौतीकर्ता - निर्धारिती द्वारा देय करों का भुगतान किया गया है। हालाँकि, इससेकटौतीकर्ता - निर्धारिती द्वारा करों के भुगतान की तारीख तक अधिनियम की धारा 201 (1 ए) केतहत ब्याज वसूलने की देयता या आयकर अधिनियम की धारा 271 सी के तहत जुर्माने की देयता मेंकोई बदलाव नहीं आएगा। 11. वर्तमान मामले में, अपीलकर्ता ने अधिनियम की धारा 201(1 ए) के तहत ब्याज काभुगतान किया था और इसमें कोई विवाद नहीं है कि देय कर का भुगतान ‘चूक में निर्धारिती’ (मैसर्सप्रदीप ऑयल कॉर्पोरेशशन) द्वारा किया गया था। हमारे समक्ष यह विवादित नहीं है कि परिपत्र मौजूदातथ्यों पर लागू होता है। 12. इन परिस्थितियों में, इस बारे में विस्तार से बताना आवश्यक नहीं है कि क्या अधिकरणरिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि को सुधारने के लिए अपील को फिर से खोल सकता था। हम इस पहलू पर कोईठोस राय व्यक्त नहीं करना चाहते। 13. तदनुसार, उच्च न्यायालय का आक्षेपित निर्णय निरस्त किया जाता है। व्यय के संबंध मेंबिना किसी आदेशश के अपील स्वीकार की जाती है। अपील की अनुमति Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 8.'ਤੇਦਖਲਦਿੱਤਾਕਿ ਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦੁਆਰਾਪਾਸਕੀਤੇਗਏਆਦੇਸ਼ਨਾਲਇਸਆਧਾਰ12.7.2002ਆਮਦਨਕਰਅਪੀਲੇਟਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦਾਆਦੇਸ਼ਮਿਤੀ ਨੂੰਆਪਣੀਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਚੁੱਕਾਹੈਕਿਉਂਕਿਅਪੀਲਕਰਤਾਦੁਆਰਾਇਸਖਿਲਾਫਦਾਇਰਕੀਤੀਗਈਅਪੀਲਨੂੰਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇ21.5.2004 ਨੂੰਖਾਰਜਕਰਦਿੱਤਾਸੀ;7 'ਤੇ ਅਪੀਲਕਰਤਾਦੁਆਰਾਉੱਚਅਦਾਲਤਵਿੱਚਪਸੰਦਕੀਤੀਗਈਅਪੀਲਵਿੱਚਗਰਾਊਂਡਨੰਬਰਆਧਾਰਿਤਬਿੰਦੂਨੂੰਨਹੀਂਚੁੱਕਿਆਗਿਆਸੀ।ਉੱਚਅਦਾਲਤਨੇਹੋਰਫੈਸਲਾਦਿੱਤਾਕਿਆਮਦਨਕਰਅਪੀਲੇਟ ਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਦਾਆਦੇਸ਼ਮਿਤੀਵਿੱਚਮਿਲਾਲਿਆਗਿਆਹੈਜਿਸਨੇਅਪੀਲਕਰਤਾਦੀਅਪੀਲਨੂੰਖਾਰਜਕਰਦਿੱਤਾ।ਉੱਚਅਦਾਲਤਇਸਨਤੀਜੇ12.7.2002 ਆਪਣੇਆਪਨੂੰ21.5.2004 ਨੂੰਇਸਦੁਆਰਾਪਾਸਕੀਤੇਗਏਆਦੇਸ਼'ਤੇਪਹੁੰਚੀਕਿਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਕੋਲਕੋਈਵੀਹੋਰਸੁਣਵਾਈਲਈਮਾਮਲਾਮੁੜਖੋਲ੍ਹਣਦਾਅਧਿਕਾਰਨਹੀਂਸੀ। 9. ਅਸੀਂਪਹਿਲਾਂਹੀਦੇਖਚੁੱਕੇਹਾਂਕਿਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਵੱਲੋਂਮੁੜਸੁਣਵਾਈਲਈਮਾਮਲੇਨੂੰਦੁਬਾਰਾਖੋਲ੍ਹਣਬਾਰੇ7,ਪਾਸਕੀਤਾਗਿਆਆਦੇਸ਼ਜਿਵੇਂਕਿਧਰਾਨੰਬਰ ਨੇਆਪਣੀਅੰਤਿਮਤਾਪ੍ਰਾਪਤਕਰਲਈਹੈ।ਇਸਸਥਿਤੀਵਿੱਚਹਾਈਕੋਰਟਨੂੰਆਮਦਨਕਰਅਪੀਲੀਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਵੱਲੋਂਪਾਸਕੀਤੇਗਏਅੰਤਿਮਆਦੇਸ਼ਨਾਲਦਖਲਨਹੀਂਦੇਣਾਚਾਹੀਦਾਸੀ। 10. ਭਾਵੇਂਇਹਜਿਵੇਂਹੋਵੇ, ਕੇਂਦਰੀਸਿੱਧੇਟੈਕਸਬੋਰਡਵੱਲੋਂ29.1.1997 ਨੂੰਜਾਰੀਕੀਤਾਗਿਆਸਰਕੁਲਰਨੰਬਰ275/201/95-ਆਈਟੀ(ਬੀ), ਸਾਡੀਵਿਚਾਰਧਾਰਾਅਨੁਸਾਰ, ਵਿਵਾਦਨੂੰਖਤਮਕਰਦੇਣਾਚਾਹੀਦਾਹੈ।ਸਰਕੁਲਰਐਲਾਨਕਰਦਾਹੈਕਿ"ਧਾਰਾ201 (1) ਅਧੀਨਕੋਈਵੀਮੰਗਲਾਗੂਨਹੀਂਕੀਤੀਜਾਣੀਚਾਹੀਦੀਜਦੋਂਤੱਕਕਿਟੈਕਸਕਟੌਤੀਕਰਨਵਾਲਾਟੀਡੀਐਸਦੇਜਿੰਮੇਵਾਰਅਧਿਕਾਰੀਨੂੰਇਹਸੰਤੁਸ਼ਟਨਾਕਰਦੇਵੇਕਿਕਰਜ਼ਾਦੇਣਵਾਲੇਨੇਲਾਗੂਟੈਕਸਅਦਾਕਰਦਿੱਤੇਹਨ।ਹਾਲਾਂਕਿ, ਇਹਧਾਰਾ201 (1ਏ) ਅਧੀਨਵਿਆਜਦੇਚਾਰਜਨੂੰਟੈਕਸਦੇਣਵਾਲੇ271ਦੁਆਰਾਟੈਕਸਦੀਅਦਾਇਗੀਦੀਮਿਤੀਤੱਕਜਾਂਧਾਰਾਸਕਦਾ।"ਸੀਅਧੀਨਜੁਰਮਾਨੇਦੀਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀਨੂੰਬਦਲਨਹੀਂ 11. ਮੌਜੂਦਾਮਾਮਲੇਵਿੱਚ, ਅਪੀਲਕਰਤਾਨੇਐਕਟਦੀਧਾਰਾ201 (1ਏ) ਅਧੀਨਵਿਆਜਅਦਾਕੀਤਾਸੀਅਤੇ(ਐਮ/)ਇਹਗੱਲਵਿਵਾਦਤਨਹੀਂਹੈਕਿਕਰਜ਼ਾਦੇਣਵਾਲੇਨੇਐਸਪ੍ਰਦੀਪਆਇਲਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ' ਕਰਜ਼ਾਅਦਾਕੀਤਾਸੀ।ਸਾਡੇਸਾਹਮਣੇਇਹਵਿਵਾਦਤਨਹੀਂਹੈਕਿਸਰਕੁਲਰਮੌਜੂਦਾਤੱਥਸਥਿਤੀਤੇਲਾਗੂਹੁੰਦਾਹੈ। 12. ਇਸਸਥਿਤੀਵਿੱਚ, ਇਹਜ਼ਰੂਰੀਨਹੀਂਹੈਕਿਇਸਬਾਰੇਵਿਸਤਾਰਵਿੱਚਜਾਇਆਜਾਵੇਕਿਕੀਟ੍ਰਿਬਿਊਨਲਕੋਲਅਪੀਲਨੂੰਮੁੜਖੋਲ੍ਹਣਦਾਅਧਿਕਾਰਸੀਤਾਂਕਿਰਿਕਾਰਡਦੀਸਪਸ਼ਟਗਲਤੀਨੂੰਸੁਧਾਰਿਆਜਾਸਕੇ।ਅਸੀਂਇਸਪਹਿਲੂ'ਤੇਕੋਈਪੱਕੀਰਾਇਪ੍ਰਗਟਾਉਣਾਨਹੀਂਚਾਹੁੰਦੇ। 13. ਇਸਲਈ, ਹਾਈਕੋਰਟਦਾਚੁਣੌਤੀਦਿੱਤਾਗਿਆਫੈਸਲਾਇਸਅਨੁਸਾਰਰੱਦਕੀਤਾਜਾਂਦਾਹੈ।ਅਪੀਲਨੂੰਖਰਚੇਦੇਬਿਨਾਂਮਨਜ਼ੂਰਕੀਤਾਗਿਆਹੈ। ਐਨ.ਜੇ. ਅਪੀਲਮਨਜ਼ੂਰ। ਡਿਸਕਲੇਮਰਸਥਾਨਕਭਾਸ਼ਾਵਿੱਚਅਨੁਵਾਦਕੀਤਾਗਿਆਨਿਆਨਿਰਣਾਂਕੇਵਲਮੁਕੱਦਮੇਬਾਜ਼ਾਂਲਈਉਹਨਾਂਦੀਆਪਣੀਭਾਸ਼ਾਵਿੱਚਸਮਝਣਤੱਕਹੀਸੀਮਤਹੈਅਤੇਇਸਦਾਕਿਸੇਹੋਰਉਦੇਸ਼ਲਈਇਸਤੇਮਾਲਨਹੀਂਕੀਤਾਜਾਸਕਦਾ।ਸਾਰੇਵਿਹਾਰਕਅਤੇਅਧਿਕਾਰਤਮੰਤਵਾਂਲਈਨਿਆਂਨਿਰਣੇਦਾਅੰਗਰੇਜ਼ੀਸੰਸਕਰਣਪ੍ਰਮਾਣਿਕਹੋਵੇਗਾਅਤੇਅਮਲਲਾਗੂਕਰਨਲਈਇਸਨੂੰਤਰਜੀਹਦਿੱਤੀਜਾਵੇਗੀ। Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 6. The appellant thereafter preferred miscellaneous application in the 1049 appeals that were already disposed of seeking rectification of the order of the A Tribunal dated 12.7.2002. Be it noted, the appellant did not raise any dispute about it being the 'assessee in default' and also raised no objection as regards the levy of interest under Section 201 (I A) of the Act. The grievance of the appellant was that its alternative contention that the warehouser has been assessed on its income and the tax due has been recovered from it by the department and therefore, no further tax could have been collected from the B appellant has not been considered by the Tribunal in its order dated 12.7.2002. The contention was that since the tax to be recovered by the department on the income has already been paid by the assessee, no further tax should be recovered from the appellant on the same income. The Tribunal vide its order dated 13. 9 .2004 allowed the application of the appellant on the ground that C the alternative contention of the appellant has not been considered while disposing of the appeal. The contention was specifically raised in Ground No. 7 of the memorandum of appeal preferred by the appellant. The Tribunal accordingly held, to that extent, there is a mistake apparent on the face of record and, therefore, constitutes a rectifiable mistake under Section 254 (2) of the Act. The Tribunal accordingly recalled its earlier order dated 12.7 .2002 D for the limited purpose of taking up the particular grJund raised in Ground No. 7 in the memorandum of appeal. This order directing the reopening of the matter has attained its finality. The department did not challenge the said order. E 7. The Tribunal upon rehearing the appeal held that though the appellant-assessee was rightly held to be an 'assessee in default', there could be no recovery of the tax alleged to be in default once again from the appellant considering that Pradeep Oil Corporation had already paid taxes :m the amount received from the appellant. It is required to note that the department conceded before the Tribunal that the recovery could not once again be made from the F tax deductor where the payee included the income on which tax was alleged to have been short deducted in its taxable income and paid taxes thereon. There is no dispute whatsoever that Pradeep Oil Corporation had already paid the taxes due on its income received from the appellant and had received refund from the tax department. The Tribunal came to the right conclusion G that the tax once again could not be recovered from the appellant (deductor-assessee) since the tax has already been paid by the recipient of income. 8. The High Court interfered with the order passed by the Tribunal on ·the ground that the order dated 12. 7.2002 of the Income-Tax Appellate Tribunal has attained its finality since the appeal filed against the same by the appellant H 1050 SUPREME COURT REPORTS [2007) 8 S.C.R. A was dismissed by the High Court on 21.5.2004; the point based on Ground No. 7 was not taken up in the appeal preferred by the appellant in the High Court. The High Court further held that the Income-tax Appellate Tribunal's order dated 12;7.2002 got itself merged into the order passed by it on 21.5.2004 dismissing the appeal of the appellant herein. The High Court came to the B conclusion that the Tribunal could pot have reopened the matter for any further hearing. 9. We have already noticed that the order passed by the Tribunal to reopen the matter for further hearing as regards ground No. 7 has attained its finality. In the circumstances, the High Court could not have interfered C with the final order passed by the Income-tax Appellate Tribunal. Case: M/S HINDUSTAN COCA COLA BEVERAGE PVT. LTD. versus COMMISSIONER OF INCOME TAX [[2007] 8 S.C.R. 1046] (2007) 9. We have already noticed that the order passed by the Tribunal to reopen the matter for further hearing as regards ground No. 7 has attained its finality. In the circumstances, the High Court could not have interfered C with the final order passed by the Income-tax Appellate Tribunal. 10. Be that as it may, the circular No. 275/201/95-lT(B) dated 29.1.1997 issued by the Central Board of Direct Taxes, in our considered opinion, should put an end to the controversy. The circular declares "no demand visualized under Section 20 I (l) of the Income-tax Act should be enforced D after the tax deductor has satisfied the officer-in-charge ofTDS, that taxes due have been paid by the deductee-assessee. However, this will not alter the liability to charge interest under Section 201 (IA) of the Act till the date of payment of taxes by the deductee-assessee or the liability for penalty under Section 271C of the Income-tax Act." E · 11. In the instant case, the appellant had paid the interest under Section 201 (IA) of the Act and there is no dispute that the tax due had been paid by deductee-assessee (M/s Pradeep Oil Corporation). It is not disputed before us that the circular is applicable to the facts situation on hand. 12. In the circumstances, it is not necessary to go in detail as to whether F the Tribunal could have at all reopened the appeal to rectify the error apparent on the face of the record. We do not wish to express any firm view on this aspect. 13. The impugned judgment of the High Court is accordingly set aside. G The appeal is allowed with no order as to costs. N.J. Appeal allowed.
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