Rameshwar Prasad Bagla v. Commissioner Of Income-Tax, U.p., Lucknow
Supreme Court
[1973] 2 S.C.R. 452 27 Sep 1972 In favour of: Assessee
Forum / Bench
Supreme Court
Parties
Rameshwar Prasad Bagla v. Commissioner Of Income-Tax, U.p., Lucknow
Date of order
27 Sep 1972
Assessment year(s)
1947-48
Outcome
Allowed
The order — as passed by the Supreme Court
Case summary
In Rameshwar Prasad Bagla v. Commissioner Of Income-Tax, U.p., Lucknow, the Supreme Court (1972) allowed the appeal under Section 12 of the Income-tax Act. The decision went in favour of the assessee.
Summary auto-generated from the order below — read the full judgment for the complete reasoning.
Sections referenced in this judgment
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
रामेशर पसाद बागला
बनाम
आयकर आयुक , उतर पदेश, लखनऊ27 सितंबर, 1972[ नयायधीश के. एस. हेगडे, नयायधीश पी. गगनमोहन रेडी, नयायधीश आई. डी. दुआ और
नयायधीश एच. आर. खना]
भारतीय आयकर अधिनियम, 1922, धारा. 66 (२) -उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की शक्तियाँअपीलीय नहीं बल्कि केवल सलाहकार है।
धारा 10, धारा 12(ख) क्या शेयरों की बिक्री पर अधिशेष मूल रूप से कंपनी के नियंत्रण और प्रबंधएजेंसी प्राप्त करने के लिए खरीदा गया, पूंजीगत लाभ के रूप में या शेयरों की बिक्री पर लाभ के रूप में कर केलिए उत्तरदायी है।
अपीलार्थी-निर्धारिती ए. एंड कंपनी में भागीदार है। प्रबंध एजेंसी एक कपड़ा मिल को प्रबंध एजेंटों (एस.एंड कंपनी) द्वारा ए. एंड कंपनी को बड़ी संख्या में शेयर और नकदी खरीदने पर विचार करने के लिए सौंपा गयाथा। अपीलार्थी ने 31,250 शेयर खरीदे। उनके भाई ने उनके पक्ष में समान संख्या में शेयर हस्तांतरित किए।1946 में, अपीलार्थी ने 43,700 शेयर बेचे, जिसके परिणामस्वरूप रु०1,51.927. का लाभ हुआ। आयकरअधिकारी के समक्ष अपीलार्थी का तर्क था कि अधिशेष लाभ पूंजीगत लाभ की प्रकृति का था। तथापि, आई. टी.ओ. ने अभिनिर्धारित किया कि यह राशि शेयरों की बिक्री पर लाभ के रूप में अधिनियम की धारा 10 के तहतकराधान के लिए उत्तरदायी था। न्यायाधिकरण ने मामले को आई. टी. ओ. के पास प्रति प्रेषित किया। अपीलको भेजी गयी रिपोर्ट के साथ सुनवाई के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष रखा गया था। सभी साक्ष्यों परसावधानीपूर्वक विचार करने के बाद न्यायाधिकरण ने कहा कि शेयरों की खरीद व्यापारिक भण्डारण के रूप मेंनहीं की गई थी, बल्कि प्रबंधन एजेंसी और कंपनी के नियंत्रण को सुरक्षित करने के लिए की गई थी।न्यायाधिकरण ने आगे कहा कि शेयरों की बिक्री पर अधिशेष आय नहीं है जो धारा 10 के तहत आयकर के लिएदायी है। इसके बाद, उच्च न्यायालय के निर्देश पर न्यायाधिकरण ने धारा 62 (2) के तहत मामले का विवरणतैयार किया। उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण के निर्णय को पलट दिया और अपीलार्थी के खिलाफ फैसलासुनाया।
अवधारित- न्यायाधिकरण द्वारा संदर्भित निर्धारित करने के लिए पर्याप्त सामग्री और साक्ष्य थे किविचाराधीन शेयरों को निर्धारिती द्वारा प्रबंधन एजेंसी और कपड़ा मिल के नियंत्रण का अधिग्रहण करने की दृष्टि सेखरीदा गया था और शेयरों के निर्धारिती व्यवसायिक भण्डारण का गठन नही करते थे। यह न्यायाधिकरण कोतथ्य के प्रश्न का निर्णय करना है और उच्च न्यायालय अधिनियम की धारा 66 के तहत एक संदर्भ मेंन्यायाधिकरण के तथ्य के निष्कर्ष के पीछे नहीं जा सकता है। उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण द्वारा पाए गएमामले के तथ्यों पर ही लागू कानून निर्धारित कर सकता है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयके फैसले के खिलाफ, अधिनियम की धारा 66 के तहत एक संदर्भ में अपीलीय न्यायालय नहीं हैं। ये अदालतेंऐसे संदर्भों में केवल सलाहकार अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करती हैं। केवल ऐसे मामले में जहां निष्कर्ष किसीप्रासंगिक साक्ष्य पर आधारित नहीं है या अनुमान या संदेह पर आधारित है, कानून का सवाल उठाया जाता हैऔर तथ्यों के निष्कर्ष में हस्तक्षेप की अनुमति है। उच्च न्यायालय इस मामले में तथ्य के निष्कर्ष को निरस्त करनेमें उचित नहीं था। [ 457 सी]
तथ्यों पर हमारी राय है कि बिक्री से प्राप्त लाभ आय कर अं०/धारा 12 (बी) के तहत प्रभार्य पूंजीगतलाभ का गठन शेयरों से होता है। वास्तव में यह स्वयं 30 मार्च, 1949 के अपने पत्र में निर्धारिती की प्रार्थना थी।
रामनारायण सन्स (प्रा.) लिमिटेड बनाम आय-कर आयुक्त, [1961] 41 आइ.टी. आर. 534 पर भरोसा किया है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय दिनांकित 20 फरवरी, 1967 विविध प्रकीण वाद संख्या मामलों में 561/1963से निर्णय और आदेश से विशेष अनुमति द्वारा अपील।
भागीरथ दास, एच.के. पुरी, एस. के. हिराजी और एस. के. ढींगरा, अपीलार्थी के लिए।
प्रत्यर्थी की ओर से एस. मित्रा, बी. डी. शर्मा और आर. एन. सचथे।
न्यायालय का निर्णय दिया गया था
खना, जे. विशेष अनुमति द्वारा यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय जिसके द्वारा उसन्यायालय द्वारा निम्निलिखत दो प्रश्न के संदर्भ में जो धारा 66 (2) भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 (जिसेबाद में अधिनियम के रूप में संदर्भित किया गया है) का उत्तर दिया।
"(i) क्या यह अवधारित करने के लिए पर्याप्त सामग्री थी कि विचाराधीन शेयर निर्धारितीप्रबंधित एजेन्सी को अधिग्रहीत करने एवं कंपनी नियंत्रण के लिए खरीदे गये थे। या शेयर व्यावसायिक भण्डारणगठित करते थे ?
(ii) भले ही विचाराधीन शेयर निर्धारिती का व्यावसायिक भण्डारण का गठन न करते हो ।क्या शेयरों की बिक्री पर प्राप्त लाभ पूंजीगत लाभ गठित नही करता था। जो अधिनियम की धारा 12-बी केतहत आयकर योग्य है ? "
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
Section: CONCLUSION
RAMESHW AR PRASAD BAGLA
v.
COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW September 27, 1972
(K. S. HEGDE, P. JAGANMOHAN REDDY, I. D. DUA AND H. R. KHANNA, JJ.]
Indian Jncon1e Tax Act, 1922, Sec. 66(2)-Powt•rs of High Court and Supren1e Court nut appellate hut 011/y advisory.
Sec. 10, Sec. 12, (b) ll'hctlu•r surplus realised on the sale of shares originally hou;.:ht for the contrul of the Co111pany and obtaining nianaging· axency, is lit1hle to tax ar _apital Rains or as profit ott sale of shares.
The appcllant-a<Sessec is a partner in A. & Co. Managing Agency oi one textile Mill was assigned by the Managing Agents (S. & C9.) to A. & Co. for consiJcration of huying large nun1bcr of shares and cash. ·rhc appellant bought 31,250 shares. An equal nurnhcr of shares \\'as iransfcrrcd in his favour by h.s hrothcr. In 1946, the appellant sold 43,700 shares resulting in the profit of Rs. 1,51.927. Before the income Tax Officer the appellant's content:on was that the surplus Y.'as in the natur~ of capital gains. The J.T.O. hoY.·cver, held that the amount y.·as liable to taxation u/s 10 of the Act as profits on the sale 0f share~. The tribunal remanded the case to the l.T.O. The appeal along with the remand report v.·as plt.11.:cd he'iorc the Tribunal for hca ing. After carefully considering al! the evidence the ·rrihunal heh.! th:.i.t the shares \\'CfC purchased not 'as stuck-in·tra<le hut for securing the managing agency and co:itrol of the company. The Tribunal further held that the surplus on sale of 5harcs is not incon1e y.·hich is liabh: to income tax under sec. IO. Thereafter, the Tribunal, on the High Court's direction dre\v up a statement of case u/s 62 (2). The High Court reversed the fin-dings of the Tribunal and hclJ against the appellant.
HELD : There \\'as enough m.itcrial a:id evidence referred to by the Tribunal \\'hilc recon.ling its finding that the shares in question had been purchased by the asscssce with a view to acquire the manz.ging agency and control of the textile mill anJ that the shares did not constitute stock-in·tradc of the assessce. It is for the Tribunal to decide the question of fact and the High Court in a reference u/s 66 of the Act cannot go beh\nd the Tr;bunal's finding of fact. The High Court can only lay down the law applicable to the facts of the ca<;e found by the Tribunal. The High Court and the Supreme Court. in an appeal ag~;nst the Judgment of the High Court, in a reference u/s 66 of the Act are Flot COI'Mitituted courts o'f appeal. These courts only exercise advisory jurisd:ction in such references. Only in case Y.'here the finding is not based on any relevant evidence or is based on conjectures or suspicion, a qucs~·ion of Jaw is raised and interference with the finding of facts is permissible. The High Court was not justified in setting . aside the finding of fact in the instant case. (457 CJ
On facts we arc of the opinion that the profit made by the sale of shares constituted capital gain chacgeable to income tax u/s 12 (b). Indeed it was the prayer of the assessee himself in his letter dated March 30, 1949.
Ra1nnarain Sons (P\'t.) Ltd. v. Con1111issioner of !nC0111e-tax, [1961)41 l.T.R. 534 relied on. ·
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CIVIL APP ELLA TE JURISDiCTION : Civil Appeal No. 1718 of 1969.
Appeal by special leave from the judgment and order dated February 20, 1967 of the Allahabad High Court in Misc. Case No. 561 of 1963.
Bhagirath Das, H. K. Puri, S. K. Hirajee and S. K. Dhingra, for the appellant.
S. Mitra, -B. D. Sharma and R. N. Sachthey, for the respondent.
The Judgment of the Court was delivered by
KHANNA, J. This appeal by special leave is directed against the judgment of Allahabad High Court whereby that court answered the following two ques:ions in a reference made to it under section 66(2) of the Indian Income Tax Act, 1922 (here-inafter referred to as the Act) :
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
ਰਾਮੇਸ਼ਵਰ ਪ੍ਰਸਾਦ ਬਾਗਲਾ
ਬਨਾਮ
ਆਮਦਨ ਕਮਮਸ਼ਨ-ਟੈਕਸ, ਯੂ.ਪ੍ੀ., ਲਖਨਊ
ਸਤੰਬਰ 27,1972
[ ਕੇ. ਐੱਸ. ਹੇਗਡੇ, ਪ੍ੀ. ਗਗਨਮੋਹਨ ਰੈੱਡੀ, ਆਈ. ਡੀ. ਡੂਆ ਅਤੇ
ਐਚ. ਆਰ. ਖੰਨਾ, ਜੇ. ਜੇ.]
ਬੀ ਭਾਰਤੀ ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਐਕਟ, 1922, ਸੈਕਸ਼ਨ.66(2) -ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਅਤੇ ਸੁਪ੍ਰੀਮ ਕੋਰਟ ਦੀਆਂ ਸ਼ਕਤੀਆਂ ਅਪ੍ੀਲ ਨਹੀਂ ਬਲਮਕ ਮਸਰਫ ਸਲਾਹਕਾਰ ਹਨ।
ਸੈਕਸ਼ਨ.10, ਸੈਕਸ਼ਨ.12, (ਬੀ) ਕੀ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਅਤੇ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਏਜੰਸੀ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕਰਨ ਲਈ ਅਸਲ ਮਵਿੱਚ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਹੋਇਆ ਸਰਪ੍ਲਿੱਸ, ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਦੇ ਰੂਪ੍ ਮਵਿੱਚ ਜਾਂ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਲਾਭ ਦੇ ਰੂਪ੍ ਮਵਿੱਚ ਟੈਕਸ ਲਈ ਮ ੰਮੇਵਾਰ ਹੈ।
ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ-ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਏ. ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਭਾਈਵਾਲ ਹੈ। ਇਿੱਕ ਟੈਕਸਟਾਈਲ ਮਮਿੱਲ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਟਾਂ (ਐੱਸ. ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ) ਦੁਆਰਾ ਏ. ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੂੰ ਵਿੱਡੀ ਮਗਣਤੀ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਅਤੇ ਨਕਦ ਖਰੀਦਣ ਬਾਰੇ ਮਵਚਾਰ ਕਰਨ ਲਈ ਸੌਂਮਪ੍ਆ ਮਗਆ ਸੀ। ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਨੇ 31,250 ਸ਼ੇਅਰ ਖਰੀਦੇ। ਉਸ ਦੇ ਭਰਾ ਨੇ ਉਸ ਦੇ ਹਿੱਕ ਮਵਿੱਚ ਇੰਨੇ ਹੀ ਸ਼ੇਅਰ ਟਰਾਂਸਫਰ ਕੀਤੇ ਸਨ। ਸੰਨ 1946 ਮਵਿੱਚ ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਨੇ 43,700 ਸ਼ੇਅਰ ਵੇਚੇ ਮਜਸ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਉਸ ਨੂੰ 1 ਕਰੋਡ ਰੁਪ੍ਏ ਦਾ ਲਾਭ ਹੋਇਆ। 1, 51.927 . ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਦੀ ਦਲੀਲ ਸੀ ਮਕ ਵਾਧੂ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਦੀ ਪ੍ਰਮਕਰਤੀ ਮਵਿੱਚ ਸੀ। ਹਾਲਾਂਮਕ, ਆਈ. ਟੀ. ਓ. ਨੇ ਮੰਮਨਆ ਮਕ ਇਹ ਰਕਮ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਮੁਨਾਫੇ ਵਜੋਂ ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 10 ਤਮਹਤ ਟੈਕਸ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਮ ੰਮੇਵਾਰ ਹੈ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਕੇਸ ਨੂੰ ਆਈ. ਟੀ. ਓ. ਕੋਲ ਭੇਜ ਮਦਿੱਤਾ। ਮਰਮਾਂਡ ਮਰਪ੍ੋਰਟ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰਿੱਖੀ ਗਈ ਸੀ। ਸਾਰੇ ਸਬੂਤਾਂ ਉੱਤੇ ਮਧਆਨ ਨਾਲ ਮਵਚਾਰ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਮਕਹਾ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਵਜੋਂ ਨਹੀਂ, ਬਲਮਕ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਸੁਰਿੱਮਖਅਤ ਕਰਨ ਲਈ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਅਿੱਗੇ ਮਕਹਾ
ਮਕ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਸਰਪ੍ਲਿੱਸ ਆਮਦਨ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜੋ ਸੈਕਸ਼ਨ ਅਧੀਨ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਲਈ ਮ ੰਮੇਵਾਰ ਹੈ। 10. ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਮਨਰਦੇਸ਼ 'ਤੇ ਧਾਰਾ 62 (2) ਤਮਹਤ ਕੇਸ ਦਾ ਮਬਆਨ ਮਤਆਰ ਕੀਤਾ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਦੋਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਲਟ ਮਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਮਵਰੁਿੱਧ ਫੈਸਲਾ ਸੁਣਾਇਆ।
ਰਿੱਮਖਆਃ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਵਿੱਲੋਂ ਇਸ ਨਤੀਜੇ ਨੂੰ ਦਰਜ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਲੋਡੀਂਦੀ ਸਮਿੱਗਰੀ ਅਤੇ ਸਬੂਤ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਸੀ ਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਵਲੀ ਵਾਲੇ ਸ਼ੇਅਰ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਟੈਕਸਟਾਈਲ ਮਮਿੱਲ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ ਅਤੇ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਨੇ ਅਮਜਹਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਸੀ। ਇਹ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੇ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਦਾ ਗਠਨ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੂੰ ਤਿੱਥ ਦੇ ਸਵਾਲ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕਰਨਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 ਦੇ ਤਮਹਤ ਇਿੱਕ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਤਿੱਥ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਦੇ ਮਪ੍ਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦੀ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਾਏ ਗਏ ਕੇਸ ਦੇ ਤਿੱਥਾਂ 'ਤੇ ਲਾਗੂ ਕਾਨੂੰਨ ਨੂੰ ਹੀ ਮਨਰਧਾਰਤ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਅਤੇ ਸੁਪ੍ਰੀਮ ਕੋਰਟ, ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਦੇ ਮਵਰੁਿੱਧ ਅਪ੍ੀਲ ਮਵਿੱਚ, ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 ਦੇ ਤਮਹਤ ਇਿੱਕ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ ਅਪ੍ੀਲ ਦੀਆਂ ਅਦਾਲਤਾਂ ਦਾ ਗਠਨ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਹੈ। ਇਹ ਅਦਾਲਤਾਂ ਅਮਜਹੇ ਹਵਾਮਲਆਂ ਮਵਿੱਚ ਮਸਰਫ਼ ਸਲਾਹਕਾਰੀ ਅਮਧਕਾਰ ਖੇਤਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਮਸਰਫ਼ ਉਸ ਮਾਮਲੇ ਮਵਿੱਚ ਮਜਿੱਥੇ ਨਤੀਜਾ ਮਕਸੇ ਢੁਕਵੇਂ ਸਬੂਤ 'ਤੇ ਅਧਾਰਤ ਨਹੀਂ ਹੈ ਜਾਂ ਅਨੁਮਾਨਾਂ ਜਾਂ ਸ਼ਿੱਕ' ਤੇ ਅਧਾਰਤ ਹੈ, ਕਾਨੂੰਨ ਦਾ ਸਵਾਲ ਉਠਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਤਿੱਥਾਂ ਦੀ ਖੋਜ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਦੀ ਆਮਗਆ ਹੈ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਤਤਕਾਲ ਮਾਮਲੇ ਮਵਿੱਚ ਤਿੱਥ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਨੂੰ ਰਿੱਦ ਕਰਨ ਨੂੰ ਜਾਇ ਨਹੀਂ ਠਮਹਰਾਇਆ। [457 ਸੀ]
ਤਿੱਥਾਂ ਉੱਤੇ ਸਾਡੀ ਰਾਏ ਹੈ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਲਾਭ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਦੀ ਧਾਰਾ 12 (ਬੀ) ਅਧੀਨ ਚਾਰਜਯੋਗ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਦਾ ਗਠਨ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਸਿੱਚਮੁਿੱਚ ਇਹ ਆਪ੍ਣੇ ਮਾਰਚ30, 1949. ਐਚ ਦੇ ਪ੍ਿੱਤਰ ਮਵਿੱਚ ਖੁਦ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਾਰਥਨਾ ਸੀ।
ਬਨਾਮਰਾਮਨਾਰਾਇਣ ਸੰਨ (ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ) ਮਲਮਮਟਡ ਆਮਦਨ ਕਮਮਸ਼ਨਰ-ਟੈਕਸ, [1961] 41 ਆਈ.ਟੀ.ਆਰ. 534 ਨੇ ਭਰੋਸਾ ਕੀਤਾ।
ਮਸਵਲ ਅਪ੍ੀਲ ਮਨਆਂਇਕ ਫੈਸਲਾਃ ਮਸਵਲ ਅਪ੍ੀਲ ਨੰਬਰ 1718/1969 .
ਅਲਾਹਾਬਾਦ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ 20 ਫਰਵਰੀ, 1967 ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਅਤੇ ਆਦੇਸ਼ ਤੋਂ ਮਵਸ਼ੇਸ਼ ਛੁਿੱਟੀ ਦੁਆਰਾ ਅਪ੍ੀਲ। ਕੇਸ ਨੰਬਰ 561/1963।
ਭਾਗੀਰਥ ਦਾਸ, ਐੱਚ. ਕੇ. ਪ੍ੁਰੀ, ਐੱਸ. ਕੇ. ਹੀਰਾਜੀ ਅਤੇ ਐੱਸ. ਕੇ. ਢੀਂਗਰਾ, ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਲਈ।
ਜਵਾਬਦੇਹ ਲਈ ਐੱਸ. ਮਮਿੱਤਰਾ, ਬੀ. ਡੀ. ਸ਼ਰਮਾ ਅਤੇ ਆਰ. ਐੱਨ. ਸਚਥੇ। ਅਦਾਲਤ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਸੀ
ਖੰਨਾ,ਜੇ. ਮਵਸ਼ੇਸ਼ ਛੁਿੱਟੀ ਦੁਆਰਾ ਇਹ ਅਪ੍ੀਲ ਮਵਰੁਿੱਧ ਮਨਰਦੇਮਸ਼ਤ ਹੈ ਇਲਾਹਾਬਾਦ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਮਜਸ ਮਵਿੱਚ ਉਹ ਅਦਾਲਤ ਭਾਰਤੀ ਆਮਦਨ ਕਰ ਐਕਟ, 1922 ਦੀ ਧਾਰਾ 66(2) ਦੇ ਤਮਹਤ ਇਸ ਨੂੰ ਮਦਿੱਤੇ ਗਏ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ ਹੇਠ ਮਦਿੱਤੇ ਦੋ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਉੱਤਰ ਮਦਿੱਤੇ ਗਏ। (ਬਾਅਦ ਮਵਿੱਚ ਐਕਟ ਵਜੋਂ ਦਰਸਾਇਆ ਮਗਆ):
(i) ਕੀ ਖੋਜ ਲਈ ਸਮਿੱਗਰੀ ਸੀ ਮਕ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਮਦਆ ਮਗਆ ਸੀ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਕੰਪ੍ਨੀ ਜਾਂ ਗਮਠਤ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕਰਨ ਦੇ ਮਦਰਸ਼ਟੀਕੋਣ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਉਸ ਦਾ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ?
(ii) ਭਾਵੇਂ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੇ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਦਾ ਗਠਨ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਸਨ, ਕੀ ਲਾਭ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਦੀ ਧਾਰਾ 12-ਬੀ ਤਮਹਤ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਸੀ ਐਕਟ? "
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
"(i) क्या यह अवधारित करने के लिए पर्याप्त सामग्री थी कि विचाराधीन शेयर निर्धारितीप्रबंधित एजेन्सी को अधिग्रहीत करने एवं कंपनी नियंत्रण के लिए खरीदे गये थे। या शेयर व्यावसायिक भण्डारणगठित करते थे ?
(ii) भले ही विचाराधीन शेयर निर्धारिती का व्यावसायिक भण्डारण का गठन न करते हो ।क्या शेयरों की बिक्री पर प्राप्त लाभ पूंजीगत लाभ गठित नही करता था। जो अधिनियम की धारा 12-बी केतहत आयकर योग्य है ? "
पहले प्रश्न पर, उच्च न्यायालय का उत्तर था कि इस निष्कर्ष के लिए कोई सामग्री नहीं थी कि विचाराधीनशेयरों को निर्धारिती द्वारा प्रबंध एजेंसी और कंपनी के नियंत्रण का अधिग्रहण करने की दृष्टि से खरीदा गया था।यह भी अभिनिर्धारित किया गया कि शेयर निर्धारिती के व्यावसायिक भण्डारण का गठन करते हैं। उपरोक्त कोध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने प्रश्न संख्या (ii) के उत्तर में अभिनिर्धारित किया कि शेयरों की बिक्री से होनेवाला लाभ अधिनियम की धारा 12-बी के तहत आयकर प्रभार के लिए पूंजीगत लाभ नहीं हो सकता है।
मामला मूल्यांकन वर्ष 1947-48 से संबंधित है, प्रासंगिक पिछला वर्ष जिसके लिए 16 अक्टूबर, 1945से 5 अक्टूबर1946 तक की अवधि के लिए दूसरा वर्ष २००२-२००३ था।
निर्धारिती-अपीलार्थी रामेश्वर प्रसाद बागला एक भागीदार हैं। अग्रवाल एंड कंपनी की फर्म में सोलहवींहिस्सेदारी है। अग्रवाल एंड कंपनी में भागीदारों के छह समूह शामिल थे। , (1) मोरारका समूह, (2) खेतानसमूह, (3) सेक्सरिया समूह (4) पोद्दार समूह, (5) बागला समूह और (6) कांतिलाल नहलचंद बागला समूहमें निर्धारिती और उसका भाई शामिल थे।
मेसर्स ई. डी. ससून एंड कंपनी लिमिटेड इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड के प्रबंधक अभिकर्ता थे। बादवाले एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है और बॉम्बे में वस्त्रों के निर्माण में लगा हुआ था। इंडिया यूनाइटेड मिल्सलिमिटेड में साधारण और स्थगित शेयरों के बड़े भाग मेसर्स ईडी ससून एंड कंपनी लिमिटेड और उसकेसहयोगियों के पास थे। 1943 में मेसर्स ई. डी. ससून एंड कंपनी लिमिटेड और अग्रवाल एंड कंपनी के भागीदारोंमें से एक बीच बातचीत हुई। इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप 26 जनवरी, 1945 को एक समझौता हुआ, जो 1दिसंबर, 1943 से प्रभावी होना था जिसके तहत मेसर्स ई. डी. ससून एंड कंपनी लिमिटेड में अग्रवाल एण्ड कं०को इंडिया यूनाइटेड मिल्स लि० का प्रबंध सौंपने पर सहमति व्यक्त की। 1 दिसंबर, 1943 से अग्रवाल एंडकंपनी को इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड की प्रबंध एजेंसी। प्रबंध एजेंसी की बिक्री के लिए प्रतिफल मूल्य57,80,000/- रू० अग्रवाल एंड कंपनी ने रुपये के अंकित मूल्य के 16,80,000 साधारण शेयरों कोआस्थगित शेयर 10/- इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड के एक-एक रुपये के बीस-बीस लाख आस्थगित शेयरखरीदने पर भी सहमति व्यक्त की। इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड के कुल जारी किए गए शेयर बीस लाखरुपये के साधारण शेयर थे। 10 / - प्रत्येक एक रुपये के पचास लाख आस्थगित शेयर थे। इस बड़े शेयर समूहकी कीमत 3,37,20,000 रुपये की दर से गणना 16/8/ - एक साधारण शेयर के लिए और रु० 3/-आस्थगित हिस्से के लिए की गई ।
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
Bhagirath Das, H. K. Puri, S. K. Hirajee and S. K. Dhingra, for the appellant.
S. Mitra, -B. D. Sharma and R. N. Sachthey, for the respondent.
The Judgment of the Court was delivered by
KHANNA, J. This appeal by special leave is directed against the judgment of Allahabad High Court whereby that court answered the following two ques:ions in a reference made to it under section 66(2) of the Indian Income Tax Act, 1922 (here-inafter referred to as the Act) :
. ·• ( i) Whether there was material for the finding that the shares in question were purchased by the assessee with a view to acquire the managing agency and the control of the company or the shares constituted his stock-in-trade '? (ii) Even if the shares in question did not constitute the stock-in-trnde of the assessee, whether the p10fit made on the sale of shares did not constitute capital gain chargeable to income tax under section 12-B of the Act?"
On the first question, the answer of the High Court was that there was no material for the finding that the shares in question were purchased by the assessee with a view to acquire the managing agency and co.1Lol of the company. It was further held that the shares constituted the stock-in-trade of the assessee. In view of the abeve, the High Court held in answer to question No. (ii) that the profits made by the sale of shares could not constitute capital gain chnrgeable to income tax under section 12-B of the Act.
The matter relates to assessment year 1947-48, the relevant previous year for which was the Dassera year 2002-2003 corres-ponding to the period from October 16, 1945 to October 5. 1946.
Rameshwar Prasad Bagla, the assessee-appellant, is a partner of firm Agarwal & Co. having one-sixteenth share in the firm. Agarwal & Co. consisted of six groups of partners, viz., (1) Morarka Group, (2) Khetan Group, (3; Seksaria Group,. (4)
454
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Poddar Group, (5) Bagla Group, and (6) Kantilal Nahalchand. The Bagla Group consisted of the assessee and his brother.
M/s E. D. Sassoon & Co. Ltd. were the managing agents of the India United Mills Ltd. The latter is a public lilhited com-pany and was engaged in the manufacture of textiles in .Bom~ay. Large blocks of ordinary and deferred shares m the India Umted Mills Ltd. were held by M/s E. D. Sas>oon & Co. Ltd. and its associates. In 1943 there were negotiations between M/s. E. D. Sassoon & Co. Ltd. and one of the partners of Agarwal & Co. Those negotiations resulted in an agreement dated January 26, 1945 under which Mis E. D. Sassoon & Co. Ltd. agreed to assign the managing agency of the India United Mills Ltd. to Agarwal & Co. with effect from December !, 1943. The consideration for the sale of managing agency was Rs. 57,80,000/-. Agarwal & Co. also agreed to purchase 16,80,000 ordinary shares of the face value of Rs. 10/- each and twenty lac deferred shares of rupee one each of the India United Mills Ltd. The total issued shares of the India United Mills Ltd. were twenty lac ordinary shares of Rs. 10/- each and fifty lac defe~red shares of rupee one each. The price for this big lot of shares wcs fixed at Rs. 3,37,20,000 cal-culated at the rate of Rs. 16/8/- for an ordinary shares and Rs. 3 /- for a deferred share.
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Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
(i) ਕੀ ਖੋਜ ਲਈ ਸਮਿੱਗਰੀ ਸੀ ਮਕ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਮਦਆ ਮਗਆ ਸੀ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਕੰਪ੍ਨੀ ਜਾਂ ਗਮਠਤ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕਰਨ ਦੇ ਮਦਰਸ਼ਟੀਕੋਣ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਉਸ ਦਾ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ?
(ii) ਭਾਵੇਂ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੇ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਦਾ ਗਠਨ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਸਨ, ਕੀ ਲਾਭ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਦੀ ਧਾਰਾ 12-ਬੀ ਤਮਹਤ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਸੀ ਐਕਟ? "
ਪ੍ਮਹਲੇ ਸਵਾਲ 'ਤੇ, ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦਾ ਜਵਾਬ ਸੀ ਮਕ ਇਸ ਨਤੀਜੇ ਲਈ ਕੋਈ ਸਮਿੱਗਰੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਮਦਰਸ਼ਟੀਕੋਣ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੀ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਮਨਯੰਤਰਣ. ਅਿੱਗੇ ਇਹ ਵੀ ਮੰਮਨਆ ਮਗਆ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੇ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਦਾ ਗਠਨ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਉਪ੍ਰੋਕਤ ਦੇ ਮਿੱਦੇਨ ਰ, ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਨੰ. (2) ਦੇ ਜਵਾਬ ਮਵਿੱਚ ਮਕਹਾ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੇ ਗਏ ਮੁਨਾਮਫਆਂ ਨੂੰ ਆਮਦਨ
ਟੈਕਸ ਦੀ ਧਾਰਾ 12-ਬੀ ਦੇ ਤਮਹਤ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਲਈ ਚਾਰਜਯੋਗ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਨਹੀਂ ਮੰਮਨਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਐਕਟ.
ਇਹ ਮਾਮਲਾ ਮੁਲਾਂਕਣ ਸਾਲ 1947-48 ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੈ, ਸੰਬੰਧਤ ਮਪ੍ਛਲੇ ਸਾਲ ਮਜਸ ਲਈ ਦਸਮਹਰਾ ਸਾਲ 2002-2003 ਸੀ -16 ਅਕਤੂਬਰ, 1945 ਤੋਂ 5 ਅਕਤੂਬਰ 1946 ਤਿੱਕ ਦੀ ਮਮਆਦ 'ਤੇ ਮਵਚਾਰ ਕਰਨਾ।
ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ-ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ, ਰਾਮੇਸ਼ਵਰ ਪ੍ਰਸਾਦ ਬਾਗਲਾ, ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਫਰਮ ਦਾ ਮਹਿੱਸੇਦਾਰ ਹੈ, ਮਜਸ ਦੀ ਫਰਮ ਮਵਿੱਚ ਇਿੱਕ-ਸੋਲਹਵੀਂ ਮਹਿੱਸੇਦਾਰੀ ਹੈ। ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਦੇ ਛੇ ਸਮੂਹ ਸ਼ਾਮਲ ਸਨ। ,(1) ਮੋਰਾਰਕਾ ਗਰੁਿੱਪ੍ (2) ਖੇਤਾਨ ਗਰੁਿੱਪ੍ (3) ਸੇਕਸਰੀਆ ਗਰੁਿੱਪ੍ (4) ਪ੍ੋਦਾਰ ਗਰੁਿੱਪ੍, (5) ਬਾਗਲਾ ਗਰੁਿੱਪ੍ ਅਤੇ (6) ਕਾਂਮਤਲਾਲ ਨਹਲਚੰਦ। ਬਾਗਲਾ ਗਰੁਿੱਪ੍ ਮਵਿੱਚ ਕਰਦਾਮਤ ਅਤੇ ਉਸ ਦਾ ਭਰਾ ਸ਼ਾਮਲ ਸਨ।
ਮੈਸਰ ਈ. ਡੀ. ਸਸੂਨ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਲਮਮਟਡ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਟ ਸਨ। ਬਾਅਦ ਵਾਲਾ ਇਿੱਕ ਪ੍ਬਮਲਕ ਮਲਮਮਟਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬੰਬਈ ਮਵਿੱਚ ਕਿੱਪ੍ਡੇ ਦੇ ਮਨਰਮਾਣ ਮਵਿੱਚ ਰੁਿੱਝੀ ਹੋਈ ਸੀ। ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਮਵਿੱਚ ਆਮ ਅਤੇ ਮੁਲਤਵੀ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੇ ਵਿੱਡੇ ਬਲਾਕ ਮੈਸਰ ਈ. ਡੀ. ਸਸੂਨ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਲਮਮਟਡ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਸਮਹਯੋਗੀਆਂ ਕੋਲ ਸਨ। ਸੰਨ 1943 ਮਵਿੱਚ ਮੈਸਰ ਦਰਮਮਆਨ ਗਿੱਲਬਾਤ ਹੋਈ ਸੀ। ਈ. ਡੀ. ਸਸੂਨ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਲਮਮਟਡ ਅਤੇ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਮਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ ਨੇ 26 ਜਨਵਰੀ, 1945 ਨੂੰ ਇਿੱਕ ਸਮਝੌਤਾ ਕੀਤਾ ਮਜਸ ਦੇ ਤਮਹਤ ਮੈਸਰ ਈ. ਡੀ. ਸਸੂਨ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਲਮਮਟਡ ਨੇ 1 ਦਸੰਬਰ, 1943 ਤੋਂ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਏਜੰਸੀ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੂੰ ਸੌਂਪ੍ਣ ਲਈ ਸਮਹਮਤੀ ਮਦਿੱਤੀ। ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਲਈ ਮਵਚਾਰ ਰੁਪ੍ਏ ਸੀ। 57,80,000/- . ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੇ ਰੁਪ੍ਏ ਦੇ ਫੇਸ ਵੈਲਯੂ ਦੇ 16,80,000 ਆਮ ਸ਼ੇਅਰ ਖਰੀਦਣ ਲਈ ਵੀ ਸਮਹਮਤੀ ਮਦਿੱਤੀ। 10/- ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ ਇਿੱਕ-ਇਿੱਕ ਰੁਪ੍ਏ ਦੇ 20 ਲਿੱਖ ਮੁਲਤਵੀ ਸ਼ੇਅਰ। ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ ਕੁਿੱਲ ਜਾਰੀ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸ਼ੇਅਰ 20 ਲਿੱਖ ਰੁਪ੍ਏ ਦੇ ਆਮ ਸ਼ੇਅਰ ਸਨ। 10/- ਇਿੱਕ-ਇਿੱਕ ਰੁਪ੍ਏ ਦੇ ਪ੍ੰਜਾਹ ਲਿੱਖ ਮੁਲਤਵੀ ਸ਼ੇਅਰ। ਇਸ ਵਿੱਡੇ ਮਹਿੱਸੇ ਦੀ ਕੀਮਤ ਰੁਪ੍ਏ ਮਨਰਧਾਰਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ। 3,37,20,000 ਕੈਲ -
ਰੁਪ੍ਏ ਦੀ ਦਰ ਨਾਲ ਕਿੱਮਟਆ ਮਗਆ। 16/8/- ਇਿੱਕ ਆਮ ਸ਼ੇਅਰ ਲਈ ਅਤੇ ਰੁਪ੍ਏ। 3 ਮੁਲਤਵੀ ਮਹਿੱਸੇ ਲਈ।
ਜਦੋਂ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੇ ਉੱਪ੍ਰ ਦਿੱਸੇ ਗਏ ਵਿੱਡੇ ਬਲਾਕ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਲਈ ਸਮਹਮਤੀ ਮਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਤਾਂ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਆਮ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਲਈ ਭੁਗਤਾਨ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮਥਤੀ ਮਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਸੀ ਮਜਸ ਮਵਿੱਚ 5 ਕਰੋਡ ਰੁਪ੍ਏ ਦਾ ਖਰਚਾ ਸ਼ਾਮਲ ਸੀ। 82,50,000. ਉਹ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਸ਼ੇਅਰ ਸਨ ਪ੍ੋਦਾਰ ਗਰੁਿੱਪ੍ ਦੇ ਰਾਮਕੁਮਾਰ ਮਸ਼ਵਚੰਦਰਾਏ ਨੇ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਵਿੱਚ ਮਤੰਨ ਲਿੱਖ ਸ਼ੇਅਰ ਖਰੀਦੇ। ਬਾਕੀ ਦੋ ਲਿੱਖ। ਸ਼ੇਅਰ ਖੇਤਾਨ ਗਰੁਿੱਪ੍ ਆਫ਼ ਪ੍ਾਰਟਨਰ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਦੋ ਸਮੂਹ, ਅਰਥਾਤ। , ਪ੍ੋਦਾਰ ਅਤੇ ਖੇਤਾਨ ਗਰੁਿੱਪ੍ਾਂ ਕੋਲ 1944 ਤਿੱਕ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਵਿੱਲੋਂ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਸ਼ੇਅਰ ਸਨ। ਪ੍ੋਦਾਰ ਅਤੇ ਖੇਤਾਨ ਸਮੂਹਾਂ ਨਾਲ ਐੱਫ ਸਮਝ ਇਹ ਸੀ ਮਕ ਉਹ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੇ ਭਾਈਵਾਲਾਂ ਵਿੱਲੋਂ ਇਸੇ ਕੀਮਤ 'ਤੇ ਸ਼ੇਅਰ ਲਏ ਜਾਣਗੇ। ਜਨਵਰੀ 1945 ਮਵਿੱਚ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੇ ਪ੍ੋਦਾਰ ਅਤੇ ਖੇਤਾਨ ਗਰੁਿੱਪ੍ਾਂ ਤੋਂ ਉਪ੍ਰੋਕਤ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਲਿੱਖ ਆਮ ਸ਼ੇਅਰ ਲੈ ਲਏ ਸਨ। ਮੁਿੱਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਹਵਾਲੇ ਦਾ ਹਿੱਕਦਾਰ ਸੀ। ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਮਵਿੱਚ ਉਸ ਦੀ ਮਹਿੱਸੇਦਾਰੀ 31,250 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਤਿੱਕ, ਭਾਵ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚੋਂ ਇਿੱਕ-ਛੇ-ਜੀ ਦਸਵਾਂ ਮਹਿੱਸਾ। ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦਾ ਭਰਾ ਉਨਹਾਂ ਪ੍ੰਜ ਲਿੱਖ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚੋਂ ਬਰਾਬਰ ਮਗਣਤੀ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦਾ ਹਿੱਕਦਾਰ ਸੀ। ਕਰਦਾਮਤ ਦੇ ਭਰਾ ਨੇ ਕਰਦਾਮਤ ਦੇ ਹਿੱਕ ਮਵਿੱਚ 31,250 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚ ਆਪ੍ਣੇ ਅਮਧਕਾਰ ਛਿੱਡ ਮਦਿੱਤੇ, ਮਜਸ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਕਰਦਾਮਤ ਨੇ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਮਵਿੱਚ 62,500 ਸ਼ੇਅਰ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕੀਤੇ। ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦਾ ਭੁਗਤਾਨ ਰੁਪ੍ਏ ਦੀ ਦਰ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਸੀ। 16/8/- 1945 ਮਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀ ਸ਼ੇਅਰ। ਇਹ ਸ਼ੇਅਰ ਪ੍ਮਹਲਾਂ ਬੰਬੇ ਟਰਿੱਸਟ ਕਾਰਪ੍ੋਰੇਸ਼ਨ ਦੇ ਨਾਮ 'ਤੇ ਸਨ ਜੋ ਮਕ ਸਾਸੂਨ ਗਰੁਿੱਪ੍ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਈ ਗਈ ਕੰਪ੍ਨੀ ਸੀ।
Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
उस समय जब ऊपर उल्लिखित शेयरों का बड़ा समूह इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड के अधिग्रहण केलिए सहमति हो गई थी, अग्रवाल एंड कंपनी पांच लाख साधारण शेयरों के लिए जिसके रूपये 82,50,000 .भुगतान करने की स्थिति में नहीं थी, उन पांच लाख शेयरों को पोद्दार समूह के रामकुमार शिवचंद्राई ने अग्रवालएंड कंपनी में तीन लाख शेयरों की सीमा तक खरीदा था। शेष दो लाख। खेतान ग्रुप ऑफ पार्टनर्स ने शेयर खरीदेथे। दो समूह, अर्थात , पोद्दार और खेतान समूह के पास 1944 तक अग्रवाल एंड कंपनी की ओर से पाँच लाखशेयर थे। पोद्दार और खेतान समूहों के साथ समझ यह थी कि उन शेयरों को अग्रवाल एंड कंपनी के भागीदारोंद्वारा समान मूल्य पर लिया जाएगा। जनवरी 1945 में उपरोक्त पाँच लाख साधारण शेयरों को अग्रवाल एंड कंपनीने पोद्दार और खेतान समूहों से अधिग्रहण किया। निर्धारिती अपीलार्थी अग्रवाल एंड कंपनी में अपनी हिस्सेदारी केसंदर्भ में 31,250 शेयरों का हकदार था, यानी पाँच लाख शेयरों में से एक-छह दसवां हिस्सा। निर्धारिती का भाईउन पाँच लाख शेयरों में से बराबर संख्या में शेयरों का हकदार था। निर्धारिती के भाई ने निर्धारिती के पक्ष में उक्त31,250 शेयरों में अपने अधिकारों को त्याग दिया, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारिती ने इंडिया यूनाइटेड मिल्सलिमिटेड में 62,500 शेयर प्राप्त किए। शेयरों का भुगतान 1945 में प्रति शेयर 16/8/ रुपये की दर से कियागया था। ये शेयर पहले बॉम्बे ट्रस्ट निगम जो सासून समूह की कंपनियों द्वारा बनाई गई एक कंपनी थी, के नामपर थे। इंडिया यूनाइटेड की प्रबंध एजेंसी के बाद मिल्स लिमिटेड का अधिग्रहण अग्रवाल एंड कंपनी ने1 ,दिसंबर 1943 , में कर लिया था। उन शेयरों को मार्च और अगस्त 1944 के बीच जयपुर में रहने वाले विभिन्नव्यक्तियों के नाम पर हस्तांतरित किया गया था। उन व्यक्तियों ने 30 जनवरी, 1945 तक निर्धारिती के नाम परउन शेयरों को हस्तांतरित कर दिया । निर्धारिती ने अग्रवाल एंड कंपनी से उन शेयरों की कीमत का भुगतानकरने के लिए दस लाख रुपये उधार लिए।
निर्धारिती द्वारा प्राप्त किए गए 62,500 शेयरों में से उसके द्रारा 3 अप्रैल, 1946 से 19 जुलाई 1946की अवधि के दौरान 43,700 शेयर, सात लॉट में बेच दिए। शेष शेयर संबंधित वर्ष के दौरान निर्धारिती के कब्जेमें बने रहे। 43,700 शेयरों से की बिक्री के परिणामस्वरूप रुपये 1,80,220 निर्धारिती को लाभ हुआ। इसकेबाद बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग निर्धारिती द्वारा स्वदेश मिल्स लिमिटेड, कानपुर के शेयरों को खरीदने के लिएकिया गया ।
निर्धारिती ने रुपये 1,80,220 के लाभ का खुलासा प्रतिफल में नहीं किया गया। आयकर अधिकारीद्वारा जारी एक नोटिस के जवाब में, निर्धारिती ने 30 मार्च, 1949 को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने स्वयं कहा-
"मैं पहले ही मूल्यांकन कार्यवाहियों के दौरान ससम्मान आपके ध्यान में ला चुका हूँ, और इस बातकी करता मेरे पास शेयर लेन-देन थापुष्टि हूँ कि कुछ जिसके प्रतिफल स्वरूप 1,51,927 / 1 / 11 मिला। चूकि यह सामान्य आधार है कि निर्धारितीशेयरों की खरीद फरोख्त का व्यवसाय नही करता है। उक्त लाभ पूंजी में आयकर रिटर्न में पूंजीगत लाभके तौर पर सामान्यतः प्रकट किया गया है। परन्तु मुझे खेद है कि धनराशि नही दिखायी जा सकी।इसलिए दाखिल रिटर्न को ही तदनुसार संशोधित माना जाए। "
निर्धारिती में पत्र में संदर्भित रुपये 1,51,927 / 1 / 11 की राशि इंडिया यूनिट मिल्स लिमिटेड केशेयर विक्रय के परिणामस्वरूप प्राप्त अधिशेष धनराशि रू० 43,700 /- भी शामिल थी।
आयकर अधिकारी ने निर्धारिती की इस याचिका को खारिज कर दिया कि इंडिया यूनाइटेड मिल्सलिमिटेड के 43,700 शेयरों की बिक्री से होने वाला लाभ कर के लिए उत्तरदायी नहीं था, बल्कि केवल पूंजीगतलाभ था। पिछले वर्षेा में जिससे हमे कोइ सम्बन्ध नही है । वास्तव में, निर्धारिती को शेयरों में एक व्यापारी केरूप में नहीं माना गया था। आयकर अधिकारी ने निर्धारिती को संबंधित वर्ष के दौरान इस आधार पर शेयरों मेंविक्रेता माना कि निर्धारिती ने बहुत व्यापक पैमाने पर शेयर लेनदेन में प्रवेश किया। आयकर अधिकारी नेअधिनियम की धारा 10 के तहत रु. 1,80,220 पर कर लगाया जो शेयरों की बिक्री पर लाभ के रूप में। अपीलपर अपीलीय सहायक आयुक्त ने निर्णय लिया कि 62.500 शेयर व्यावसायिक भण्डारण थे। आयकर अधिकारी केनिष्कर्ष को काफी हद तक बरकरार रखा गया था। कर योग्य आय को कम करके कुछ राहत दी गई। आयकरअपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष निर्धारिती द्वारा पेश की गयी अपील में मामला दिनांक 1 मई, 1954 कोआयकर अधिकारी को वापस भेज दिया गया था। इसके बाद आयकर अधिकारी ने 12 जून, 1956 को एक
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At the time when the above mentioned large block of shares of the India United Mills Ltd. was agreed to be acquired, Agarwal & Co. was not in a position to pay for five lac ordinary shares E involving an outlay of Rs. 82,50,000. Those five lac shares were purchased by Ramkumar Shivchandrai of Poddar Group of part-ners in Agarwal & Co. to the extent of three lac shares. The remaining two lac shares were purchased by Khetan Group of · partners. The two Groups, viz., Poddar and Khetan Groups, held the five lac sha;·es on behulf of Agarwal & Co. till 1944. The understanding with Poddar and Khetan Groups was that those shares would be taken up by the partners of Agarwal & Co. at the same price. In January 1945 the aforesaid five lac ordinary shares were taken over by Agarwal & Co. from Poddar and Khe-tan Groups. The assessee appellant was entitled with reference to his holding in Agarwal & Co. to 31,250 shares, i.e. one-six-G teenth out of the five lac shares. The assessee's brother was like-wise entitled to an equal number of shares out of those five lac shares. The assessee's brother relinquished his rights in the said 31,250 shares in favour of the assessee, as a result of which the assessee obtained 62,500 shares in the India United Mills Ltd. The shares were paid for at the rate of Rs. 16/8/- per ~hare in H 1945. These shares had earlier stood in the name of Bombay Trust Corporation which was a company formed by Sasoon Group of companies. After the managing agency of the India Un.ited
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A~ Mills Ltd. had been taken over by Agarwal & Co. on December I, 1943, those shares were transferred between March and August 1944 in the name of various persons residing in Jaipur. Those persons transferred the said shares in favour of the asscssee on fonuary 30, 1945. The assessec borrowed rupees ten lacs from Agarwal & Co. in order to pay for the price of those shares.
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Out of 62,500 shares acquired by the assessee, he sold 43,700 shares during the period from April 3, 1946 to July 19, 1946 in seven lots. The rest of the shares remained in the pos-session of the assessee during the relevant ye~r. The sale of 43,700 shares resulted in a profit of Rs. 1,80,220 to the asses~ee. The sale proceeds were thereafter utilised by the assessee for pur-r.hasing shares of Swadesh Mills Ltd., Kanpur.
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The assessee did not disclose the profit of Rs. 1,80,220 in the turn. In response to a notice issued by the income tax officer, the assessee wrote Jetter dated March 30, 1949 in the course of which he stated :
"I have already brought to your honour's notice ir. the course of assessment proceedings and would like to confirm that I had certain share transac-tion in which there has been appreciation to the tune of Rs. 1,51,927/1/11. Since it is common ground that the assessee is not dealing in shares as busi-ness the said appreciation in capital should have been normally disclosed as capital gain in the return but I regret that the amount could not be shown, so the return already filed may be treated as amended accordingly."
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The amount of Rs. 1,51,927/1/11 ref11rred to in the assessee's letter included the surplus realised as a result of the sale of 43,700 shares of the India Unitd Mills Ltd.
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Case: RAMESHWAR PRASAD BAGLA versus COMMISSIONER OF INCOME-TAX, U.P., LUCKNOW [[1973] 2 S.C.R. 452] (1973)
ਕੰਪ੍ਨੀਆਂ. ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨੂੰ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੇ 1 ਦਸੰਬਰ, 1943 ਨੂੰ ਆਪ੍ਣੇ ਕਬ ੇ ਮਵਿੱਚ ਲੈ ਮਲਆ ਸੀ, ਉਹ ਸ਼ੇਅਰ ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਅਗਸਤ 1944 ਦੇ ਮਵਚਕਾਰ ਜੈਪ੍ੁਰ ਮਵਿੱਚ ਰਮਹਣ ਵਾਲੇ ਵਿੱਖ-ਵਿੱਖ ਮਵਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਨਾਮ ਉੱਤੇ ਤਬਦੀਲ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸਨ। ਇਨਹਾਂ ਮਵਅਕਤੀਆਂ ਨੇ 30 ਜਨਵਰੀ, 1945 ਨੂੰ ਇਨਹਾਂ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਨੂੰ ਕਰਦਾਮਤ ਦੇ ਹਿੱਕ ਮਵਿੱਚ ਤਬਦੀਲ ਕਰ ਮਦਿੱਤਾ ਸੀ। ਉਨਹਾਂ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਕੀਮਤ ਦਾ ਭੁਗਤਾਨ ਕਰਨ ਲਈ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਨੇ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਤੋਂ ਦਸ ਲਿੱਖ ਰੁਪ੍ਏ ਉਧਾਰ ਲਏ।
ਨੇ 3 ਅਪ੍ਰੈਲ, 1946 ਤੋਂ 19 ਜੁਲਾਈ, 1946 ਤਿੱਕ ਦੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ 62,500 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚੋਂ 43,700 ਸ਼ੇਅਰ ਸਿੱਤ ਲਾਟ ਮਵਿੱਚ ਵੇਚੇ। ਬਾਕੀ ਸ਼ੇਅਰ ਸਬੰਧਤ ਸਾਲ ਦੌਰਾਨ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੀ ਸਮਥਤੀ ਮਵਿੱਚ ਰਹੇ। 43, 700 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਰੁਪ੍ਏ ਦਾ ਮੁਨਾਫਾ ਹੋਇਆ। 1,80,220 ਮੁਲਾਂਕਣ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਨੂੰ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਵਕਰੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਆਮਦਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਵੈਦੇਸ਼ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ, ਕਾਨਪ੍ੁਰ ਦੇ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦਾ ਮਪ੍ਿੱਛਾ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤੀ ਗਈ।
ਕਰਦਾਮਤ ਨੇ ਰੁਪ੍ਏ ਦੇ ਲਾਭ ਦਾ ਖੁਲਾਸਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ। 1,80,220 ਵਾਰੀ ਮਵਿੱਚ. ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਵਿੱਲੋਂ ਜਾਰੀ ਇਿੱਕ ਨੋਮਟਸ ਦੇ ਜਵਾਬ ਮਵਿੱਚ, ਕਰਦਾਮਤ ਨੇ 30 ਮਾਰਚ, 1949 ਨੂੰ ਪ੍ਿੱਤਰ ਮਲਮਖਆ ਮਜਸ ਮਵਿੱਚ ਉਸ ਨੇ ਮਕਹਾਃ
“ਮੈਂ ਪ੍ਮਹਲਾਂ ਹੀ ਤੁਹਾਡੇ ਮਧਆਨ ਮਵਿੱਚ ਮਲਆ ਚੁਿੱਕਾ ਹਾਂ। ਮਜਸ ਮਵਿੱਚ ਪ੍ਰਸ਼ੰਸਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਰੁਪ੍ਏ ਦੀ ਰਕਮ. 1,51,927/1/11 . ਮਕਉਂਮਕ ਇਹ ਆਮ ਮੀਨ ਹੈ। ਮਕ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚ ਰੁਝੇਵੇਂ ਵਜੋਂ ਸੌਦਾ ਨਹੀਂ ਕਰ ਮਰਹਾ ਹੈ - ਪ੍ੂੰਜੀ ਮਵਿੱਚ ਮਕਹਾ ਮਗਆ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਸੀ ਆਮ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਵਾਪ੍ਸੀ ਮਵਿੱਚ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਵਜੋਂ ਖੁਲਾਸਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰ ਮੈਂ ਅਫ਼ਸੋਸ ਹੈ ਮਕ ਰਕਮ ਨਹੀਂ ਮਦਖਾਈ ਜਾ ਸਕੀ, ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਮਹਲਾਂ ਤੋਂ ਦਾਖਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਮਰਟਰਨ ਨੂੰ ਉਸ ਅਨੁਸਾਰ ਸੋਮਧਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ।”
ਰੁਪ੍ਏ ਦੀ ਰਕਮ। 1,51,927/1/11 ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੇ ਪ੍ਿੱਤਰ ਮਵਿੱਚ ਹਵਾਲਾ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਹੈ ਮਕ ਇੰਡੀਆ ਯੂਮਨਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ 43,700 ਐੱਫ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਹੋਇਆ ਸਰਪ੍ਲਿੱਸ ਸ਼ਾਮਲ ਹੈ।
ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਨੇ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੀ ਪ੍ਟੀਸ਼ਨ ਨੂੰ ਖਾਰਜ ਕਰ ਮਦਿੱਤਾ ਮਕ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੇ 43,700 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਨਾਲ ਹੋਇਆ ਲਾਭ ਟੈਕਸ ਲਗਾਉਣ ਯੋਗ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਬਲਮਕ ਮਸਰਫ ਪ੍ੂੰਜੀ ਲਾਭ ਸੀ। ਮਪ੍ਛਲੇ ਸਾਲ ਮਜਸ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਜੁਡੇ ਨਹੀਂ ਹਾਂ - ਯਕੀਨਨ, ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਡੀਲਰ ਵਜੋਂ ਨਹੀਂ ਮੰਮਨਆ ਮਗਆ ਸੀ। ਜੀ ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਨੇ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਨੂੰ ਸਬੰਧਤ ਸਾਲ ਦੌਰਾਨ ਇਸ ਆਧਾਰ ਉੱਤੇ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚ ਇਿੱਕ ਡੀਲਰ ਮੰਮਨਆ ਮਕ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਨੇ ਬਹੁਤ ਮਵਆਪ੍ਕ ਪ੍ਿੱਧਰ ਉੱਤੇ ਸ਼ੇਅਰ ਲੈਣ-ਦੇਣ ਕੀਤੇ ਸਨ। ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਨੇ ਇਸ ਅਨੁਸਾਰ ਟੈਕਸ ਟੈਕਸ ਮਵਿੱਚ ਮਲਆਂਦੀ ਰਕਮ ਰੁਪ੍ਏ. 1,80,220
ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 10 ਦੇ ਤਮਹਤ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਲਾਭ ਦੇ ਰੂਪ੍ ਮਵਿੱਚ। ਅਪ੍ੀਲ 'ਤੇ ਅਪ੍ੀਲ ਸਹਾਇਕ ਕਮਮਸ਼ਨਰ ਨੇ ਫੈਸਲਾ ਮਲਆ ਮਕ 62.500 ਸ਼ੇਅਰ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਸਨ। ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਦੀ ਖੋਜ ਨੂੰ ਕਾਫ਼ੀ ਹਿੱਦ ਤਿੱਕ ਬਰਕਰਾਰ ਰਿੱਮਖਆ ਮਗਆ ਸੀ। ਟੈਕਸਯੋਗ ਆਮਦਨ ਨੂੰ ਘਟਾ ਕੇ ਕੁਝ ਰਾਹਤ ਮਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ। ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਗਲੀ ਅਪ੍ੀਲ 'ਤੇ ਇਹ ਮਾਮਲਾ 1 ਮਈ, 1954 ਨੂੰ ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਅਪ੍ੀਲ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੂੰ ਭੇਜ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਸੀ। ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਮਧਕਾਰੀ ਨੇ 12 ਜੂਨ, 1956 ਨੂੰ ਇਿੱਕ ਮਰਪ੍ੋਰਟ ਪ੍ੇਸ਼ ਕੀਤੀ। ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀ ਦੀ ਮਰਮਾਂਡ ਮਰਪ੍ੋਰਟ ਦੇ ਨਾਲ ਅਪ੍ੀਲ ਨੂੰ ਸੁਣਵਾਈ ਲਈ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰਿੱਮਖਆ ਮਗਆ ਸੀ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਆਦੇਸ਼ ਅਨੁਸਾਰ ਮਮਤੀ 26 ਸਤੰਬਰ, 1956 ਮਵਿੱਚ ਮਕਹਾ ਮਗਆ ਸੀ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਵਾਧੂ ਆਮਦਨ ਆਮਦਨ ਨਹੀਂ ਸੀ ਜੋ ਆਮਦਨ ਟੈਕਸ ਲਈ ਮ ੰਮੇਵਾਰ ਸੀ। ਬੀ ਇਸ ਮਸਿੱਟੇ 'ਤੇ ਪ੍ਹੁੰਚਮਦਆਂ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਮਟਿੱਪ੍ਣੀ ਕੀਤੀਃ
“ਸਸੂਨ ਨਾਲ ਹੋਏ ਸਮਝੌਤੇ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੂੰ ਵਿੱਡੀ ਮਗਣਤੀ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਖਰੀਦਣੇ ਪ੍ਏ। ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਕੁਿੱਝ ਮਮਿੱਲਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਏਜੰਸੀ ਮਵਿੱਚ ਵੀ ਮਦਲਚਸਪ੍ੀ ਰਿੱਖਦੀ ਸੀ ਜੋ ਇਸੇ ਸਮਝੌਤੇ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ ਉਨਹਾਂ ਕੋਲ ਆਈ ਸੀ। ਅਸੀਂ ਸੋਚਦੇ ਹਾਂ ਮਕ ਪ੍ੇਸ਼ ਕੀਤੇ ਗਏ ਤਿੱਥਾਂ ਦੇ ਅਧਾਰ ਉੱਤੇ ਕਰਦਾਮਤਆਂ ਦੁਆਰਾ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਖਰੀਦ ਉਨਹਾਂ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਮਵਿੱਚ ਸੌਦਾ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਬਲਮਕ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦਾ ਮਨਯੰਤਰਣ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਸੀ। ਇਿੱਥੇ ਇਹ ਵੀ ਨੋਟ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਮਕ ਜੇ ਤਬਾਦਲੇ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕੀਮਤ ਦੇ ਮਨਯਮ ਨੂੰ ਮਧਆਨ ਮਵਿੱਚ ਰਿੱਖਣਾ ਸੀ, ਤਾਂ ਸ਼ਾਇਦ ਕੋਈ ਲਾਭ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਲਾਭ ਨੂੰ ਇਸ ਤਰਹਾਂ ਦਰਸਾਇਆ ਮਗਆ ਹੈ ਮਕ ਤਬਾਦਲਾ ਉਸ ਕੀਮਤ ਉੱਤੇ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਮਜਸ ਉੱਤੇ ਸ਼ੇਅਰ ਅਸਲ ਮਵਿੱਚ ਸਾਸੂਨ ਦੁਆਰਾ ਵੇਚੇ ਗਏ ਸਨ। ਅਸੀਂ ਸੋਚਦੇ ਹਾਂ ਮਕ ਆਮਦਨ ਕਰ ਅਮਧਕਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਪ੍ਮਹਲਾਂ ਦੇ ਤਿੱਥਾਂ 'ਤੇ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੀ ਮਹਿੱਸੇਦਾਰੀ ਵਪ੍ਾਰ ਮਵਿੱਚ ਸਟਾਕ ਦੀ ਖਰੀਦ ਨਹੀਂ ਸੀ ਮਜਵੇਂ ਮਕ ਮਵਭਾਗ ਦੁਆਰਾ ਰਿੱਖੀ ਗਈ ਸੀ। ਅਸੀਂ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਨੂੰ ਸਵੀਕਾਰ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਅਪ੍ੀਲ ਕਰੋ ਅਤੇ ਮਨਰਦੇਸ਼ ਮਦਓ ਮਕ ਇਨਹਾਂ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਵਕਰੀ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਵਾਧੂ ਆਮਦਨ ਆਮਦਨ-ਟੈਕਸ ਲਈ ਮ ੰਮੇਵਾਰ ਨਹੀਂ ਹੈ।
ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਮਵਿੱਚ ਕੇਸ ਪ੍ੇਸ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਜਵਾਬਦੇਹ ਵਿੱਲੋਂ ਇਿੱਕ ਅਰ ੀ ਦਾਇਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਪ੍ਰ ਉਸ ਅਰ ੀ ਨੂੰ ਰਿੱਦ ਕਰ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਸੀ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਚਾਅ ਪ੍ਿੱਖ ਨੇ
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रिपोर्ट प्रस्तुत की। आयकर अधिकारी की रिमांड रिपोर्ट के साथ अपील को सुनवाई के लिए न्यायाधिकरण केसमक्ष रखा गया । न्यायाधिकरण, आदेश के अनुसार दिनांक 26 सितंबर, 1956 में कहा गया कि शेयरों की बिक्रीसे प्राप्त अतिरिक्त आय वह आय नहीं थी जो आयकर के लिए उत्तरदायी थी। इस निष्कर्ष पर पहुँचते हुएन्यायाधिकरण ने कहा-
"सासून के साथ एक समझौते के परिणामस्वरूप अग्रवाल एंड कंपनी को बड़ी संख्या में शेयरखरीदने थे। अग्रवाल एंड कंपनी कुछ मिलों के प्रबंधन में रुचि रखती थी।जो उनके पास उसी करार के परिणामस्वरूप आयी थी। पेश किए गए तथ्यों के आधार पर हमारा माना है किनिर्धारिती के द्वारा शेयरों, को शेयर व्यापार में शामिल होने के आधार पर क्रय नही किए गए थे बल्कि प्रबंधनएजेन्सी प्राप्त कर कंपनियों पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए क्रय किए गए थे। यह भी ध्यान देने योग्य है किअन्तरण के समय प्रचलित मूल्य पर गौर किया जाए तो शायद ही कोइ लाभ हुआ हो। अन्तरण के परिणामस्वरूपजिस मूल्य पर लाभ दिखाया गया है वह मूल्य वह है, जिस पर शेयर सासून द्वारा मूल रूप से बेचे गए थे।आयकर के समक्ष पेश तथ्यों के आधार पर हमारा यह सोचना है कि निर्धारिती के द्वारा स्टाक् व्यापार में क्रयनही था , जैसा कि विभाग द्वारा पाया गया।। हम निर्धारिती की अपील स्वीकार करते है और निर्देशित करते है किउक्त शेयरो की बिक्री पर मिली अतिरिक्त राशि वह राशि नही है जो आयकर योग्य हो। "
इसके बाद उच्च न्यायालय को मामला बताने के लिए प्रतिवादी की ओर से एक आवेदन दायर किया गयाथा, लेकिन उस आवेदन को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद प्रतिवादी ने अधिनियम की धारा 66 (2) केतहत उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण को मामले का एकबयान तैयार करने और पहले पुनः प्रस्तुत किए गए प्रश्नों को उच्च न्यायालय को भेजने का निर्देश दिया। प्रश्नों कोसंदर्भित किए जाने के बाद, उच्च न्यायालय ने प्रश्नों के उत्तर दिए, जैसा कि इस निर्णय के प्रारंभ में उल्लेख कियागया था।
हमने अपीलार्थी की ओर से श्री भागीरथ दास को तथा प्रत्यर्थी की ओर से श्री सुकुमार मित्रा को सुना ।और यह राय है कि उच्च न्यायालय का फैसला बनाये रखने योग्य नहीं है। जिस प्रश्न के साथ उच्च न्यायालय कासंबंध था, वह यह था कि क्या न्यायाधिकरण के समक्ष इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सामग्री थी कि विचाराधीनशेयरों को निर्धारिती द्वारा इंडिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड की प्रबंध एजेंसी और नियंत्रण का अधिग्रहण करने कीदृष्टि से खरीदा गया था। उच्च न्यायालय के फैसले के अवलोकन से पता चलता है कि उच्च न्यायालय ने इस मामले
के इस पहलू पर कोइ चर्चा नहीं की थी। इसके विपरीत, उच्च न्यायालय इस मामले से निपटने के लिए सीधे आगेबढ़ा जैसे कि उसे इस मुद्दे पर एक स्वतंत्र निष्कर्ष पर पहुंचना था कि क्या विचाराधीन शेयरों को निर्धारिती द्वाराप्रबंध एजेंसी और कंपनी के नियंत्रण का अधिग्रहण करने की दृष्टि से खरीदा गया था। उच्च न्यायालय का यहदृष्टिकोण पूरी तरह से गलत था और विधि सम्मत नहीं था। यह न्यायाधिकरण है, जिसको तथ्य के प्रश्नों कानिर्णय करना था और उच्च न्यायालय अधिनियम की धारा 66 के तहत एक संदर्भ में न्यायाधिकरण के तथ्य केनिष्कर्षों के पीछे नहीं जा सकता है। उच्च न्यायालय केवल न्यायाधिकरण द्वारा पाए गए तथ्यों पर लागू कानूननिर्धारित कर सकता है। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय, अधिनियम की धारा 66 के तहत संदिभर्तलाफ इनअपील में दिए गए उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील में, न्यायाधिकरण के आदेश के खिअपीलीय न्यायालय का गठन नहीं किया गया है-ये अदालतें केवल ऐसे संदर्भों में सलाहकार अधिकार क्षेत्र काप्रयोग करें। हालाँकि, उच्च न्यायालय अधिनियम की धारा 66 के तहत संदर्भ में इस प्रश्न पर जा सकता है किन्यायाधिकरण का निष्कर्ष सुसंगत साक्ष्य पर आधारित है या नहीं। अगर उच्च न्यायालय यह पाता है किन्यायाधिकरण का तथ्यात्मक निष्कर्ष के समथर्न में कोइ साक्ष्य नही है तब यह परिस्थितयां विधि के प्रश्न कोजन्म देती है जो कि संदर्भ में उठायी जा सकती हैं। यह सुस्थापित है कि जब न्यायाधिकरण ऐसे सामग्री पर कार्यकरता है जो कि जांच के लिए अप्रासंगिक या ऐसी सामग्री पर विचार करता है जो आंशिक रूप से प्रासंगिक औरआंशिक रूप से अप्रासंगिक या आंशिक रूप से अपने निर्णय को अनुमान व संभावनाओ पर तथा आंशिक रूप सेसाक्ष्य पर आधारित करता है फिर ऐसी स्थिति में कानून का एक मुद्दा उत्पन्न होता है तथा न्यायाधिकरण केनिष्कर्ष में हस्तक्षेप किया जा सकता है। कि निष्कर्ष पर तभी हस्तक्षेप किया जा सकता है जब कि वह इतनाअनुचित पाया जाए कि कोइ भी व्यक्ति जो न्यायिकतः व विधि के अनुरूप काम कर रहा है, ऐसे निष्कर्ष पर न
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The amount of Rs. 1,51,927/1/11 ref11rred to in the assessee's letter included the surplus realised as a result of the sale of 43,700 shares of the India Unitd Mills Ltd.
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The income tax officer rejected the plea of the assessee that the profit made by the sale of 43, 700 shares of the India United Mills Ltd. was not profit liable to be taxed as such, but was only capital gain. In the previous year with which we are not con-cerned, the assessec had not been treated as a dealer in shares. The income tax officer held the assessee to b~ a dealer in shares during the relevant year on the ground that the assessee had· entered into share transactions on a very exh:nsive "·ale. The income tax officer accordingly brought to tax the sum of Rs. 1,80.220 under section IO of the Act as profits on the sale of shares. On appeal the Appellate Assistant Commissioner held that 62.500 shares were stock-in-trade. The finding of the income tax officer was substantially upheld. Some relief was granted by reducing the taxable income. On further appeal by the assessec·
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to the Income Tax Appellate Tribunal, the matter was remanded A to the inc0me tax officer on May 1, 1954. The income tax officer thereafter submitted a repo1t on June 12, 1956. The appeal along with the remand report of the income tax officer was put up before the Tribunal for hearing. The Tribunal, as per order dated September 26, 1956, held that the excess realised from the sale of shares was not income which was liable to income tax. B Jn coming to this conclusion the Tribunal observed : "A large number of shares had to be purchased by Agarwal & Co. as a result of an agreement with the Sassoons. Agarwal & Co. was interested in the manag-ing agency of some mills also which came to them as a result of the same agreement. We think that on the c facts produced the purchase of the shares by the asses,see was not with a view to deal in those shares but with a view to obtain the managing agency and control of the company. It may also be noted here rhat if the price ruling at tl~e time of the transfer was to be taken into account, perhaps, t)lere is no profit. The profit has been shown as the iransfer is made at the price at which the shares were originally sold by the Sassoons. We think that on the facts before the Income-tax auth'o-rities the assessee's holding of shares in the India United Mills Ltd. was not the purchase of a stock in trade as held by the Department. We accept the assessee's E appeal and direct that the excess realised on the sale of these shares is not income which is liable to income-tax."
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An application was thereafter filed on behalf of the respondent for s·tating a case to the High Court, but that application was rejected. The respondent then approached the High Court under section 66(2) of the Act. The High Court thereupon directed the Tribunal to draw up a statement of case and refer the ques-tions reproduced earlier to the High Court. After the questions were referred, the High Court gave answers to the questions, as mentioned at the commencement of this judgment.
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We have heard Mr. Bhagirath Das on behalf of the appellant and Mr. Sukumar Mitra on behalf of the respondent and are of the opinion that the judgment of the High Court cannot be sus-tained. The question with which the High Court was concerned was whether there was material before the Tribunal for arrivin n at the finding that the shares in question had been purchased by the assessee with a view to acquire the managing agency and control of the India United Mills Ltd. Perusal of the judgment of the High Court shows that the High Court did not discuss this
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ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਮਵਿੱਚ ਕੇਸ ਪ੍ੇਸ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਜਵਾਬਦੇਹ ਵਿੱਲੋਂ ਇਿੱਕ ਅਰ ੀ ਦਾਇਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਪ੍ਰ ਉਸ ਅਰ ੀ ਨੂੰ ਰਿੱਦ ਕਰ ਮਦਿੱਤਾ ਮਗਆ ਸੀ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਚਾਅ ਪ੍ਿੱਖ ਨੇ
ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 (2) ਤਮਹਤ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦਾ ਦਰਵਾ ਾ ਖਡਕਾਇਆ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਮਨਰਦੇਸ਼ ਮਦਿੱਤੇ ਹਨ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਕੇਸ ਦਾ ਮਬਆਨ ਮਤਆਰ ਕਰੇਗਾ ਅਤੇ ਪ੍ਮਹਲਾਂ ਪ੍ੇਸ਼ ਕੀਤੇ ਗਏ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਨੂੰ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੂੰ ਭੇਜੇਗਾ। ਸਵਾਲਾਂ ਨੂੰ ਭੇਜੇ ਜਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਮਦਿੱਤੇ, ਮਜਵੇਂ ਮਕ ਇਸ ਫੈਸਲੇ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਮਵਿੱਚ ਮ ਕਰ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਸੀ।
ਅਸੀਂ ਅਪ੍ੀਲਕਰਤਾ ਵਿੱਲੋਂ ਸਰੀ ਭਾਗੀਰਥ ਦਾਸ ਅਤੇ ਜਵਾਬਦੇਹ ਵਿੱਲੋਂ ਸਰੀ ਸੁਕੁਮਾਰ ਮਮਿੱਤਰਾ ਨੂੰ ਸੁਮਣਆ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਡੀ ਰਾਏ ਹੈ ਮਕ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਨੂੰ ਮੁਅਿੱਤਲ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਮਜਸ ਸਵਾਲ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਸੀ, ਉਹ ਇਹ ਸੀ ਮਕ ਕੀ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਇਸ ਮਸਿੱਟੇ 'ਤੇ ਪ੍ਹੁੰਚਣ ਲਈ ਸਮਿੱਗਰੀ ਸੀ ਮਕ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਦੇ ਅਮਧਐਨ ਤੋਂ ਪ੍ਤਾ ਚਲਦਾ ਹੈ ਮਕ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਇਸ' ਤੇ ਚਰਚਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਮਾਮਲੇ ਦਾ ਇਿੱਕ ਪ੍ਮਹਲੂ। ਇਸ ਦੇ ਉਲਟ, ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੇ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਨਾਲ ਮਸਿੱਧਾ ਨਮਜਿੱਠਣ ਲਈ ਇਸ ਤਰਹਾਂ ਅਿੱਗੇ ਵਮਧਆ ਮਜਵੇਂ ਮਕ ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਦ ਇਸ ਨੁਕਤੇ 'ਤੇ ਇਿੱਕ ਸੁਤੰਤਰ ਮਸਿੱਟੇ' ਤੇ ਪ੍ਹੁੰਚਣਾ ਹੈ ਮਕ ਕੀ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਕੰਪ੍ਨੀ ਦੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੇ ਮਦਰਸ਼ਟੀਕੋਣ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੀ ਇਹ ਪ੍ਹੁੰਚ ਪ੍ੂਰੀ ਤਰਹਾਂ ਗਲਤ ਸੀ ਨਾ ਮਕ ਜੰਗੀ - ਨੂੰ ਕਾਨੂੰਨ ਦੁਆਰਾ ਸ ਾ ਮਦਿੱਤੀ ਗਈ। ਇਹ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੂੰ ਤਿੱਥਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕਰਨਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 ਦੇ ਤਮਹਤ ਇਿੱਕ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਤਿੱਥਾਂ ਦੇ ਨਤੀਮਜਆਂ ਦੇ ਮਪ੍ਿੱਛੇ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦੀ। ਉੱਚਾ ਅਦਾਲਤ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੁਆਰਾ ਲਿੱਭੇ ਗਏ ਤਿੱਥਾਂ 'ਤੇ ਲਾਗੂ ਕਾਨੂੰਨ ਨੂੰ ਹੀ ਮਨਰਧਾਰਤ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਅਤੇ ਸੁਪ੍ਰੀਮ ਕੋਰਟ, ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 ਦੇ ਤਮਹਤ ਰੈਫਰੈਂਸ ਮਵਿੱਚ ਮਦਿੱਤੇ ਗਏ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਫੈਸਲੇ ਦੇ ਮਵਰੁਿੱਧ ਅਪ੍ੀਲ ਮਵਿੱਚ, ਇਹਨਾਂ ਅਦਾਲਤਾਂ ਦਾ ਗਠਨ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਮਗਆ ਹੈ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਆਦੇਸ਼ ਮਵਰੁਿੱਧ ਅਪ੍ੀਲ। ਇਹ ਅਦਾਲਤਾਂ ਅਮਜਹੇ ਹਵਾਮਲਆਂ ਮਵਿੱਚ ਮਸਰਫ਼ ਸਲਾਹਕਾਰੀ ਅਮਧਕਾਰ ਖੇਤਰ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ। ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਐਕਟ ਦੀ ਧਾਰਾ 66 ਦੇ ਤਮਹਤ ਇਿੱਕ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ, ਹਾਲਾਂਮਕ, ਇਸ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਮਕ ਕੀ ਤਿੱਥ ਦੇ ਸਵਾਲ ਉੱਤੇ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦਾ ਮਸਿੱਟਾ ਸਬੰਧਤ ਸਬੂਤ ਉੱਤੇ ਅਧਾਰਤ ਹੈ। ਜੇ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਨੂੰ ਪ੍ਤਾ ਲਿੱਗਦਾ ਹੈ ਮਕ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਤਿੱਥ ਡੀ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਦਾ ਸਮਰਥਨ ਕਰਨ ਲਈ ਅਮਜਹਾ ਕੋਈ ਸਬੂਤ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ
ਸਮਥਤੀ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਸਵਾਲ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦੇਵੇਗੀ ਅਤੇ ਇਿੱਕ ਹਵਾਲੇ ਮਵਿੱਚ ਭਡਕਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਵੀ ਚੰਗੀ ਤਰਹਾਂ ਸਥਾਮਪ੍ਤ ਹੈ ਮਕ ਜਦੋਂ ਕੋਈ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਅਮਜਹੀ ਸਮਿੱਗਰੀ 'ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਜਾਂਚ ਲਈ ਅਪ੍ਰਸੰਮਗਕ ਹੈ ਜਾਂ ਅਮਜਹੀ ਸਮਿੱਗਰੀ' ਤੇ ਮਵਚਾਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜੋ ਅੰਸ਼ਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਪ੍ਰਸੰਮਗਕ ਅਤੇ ਅੰਸ਼ਕ ਤੌਰ' ਤੇ ਅਪ੍ਰਸੰਮਗਕ ਹੈ ਜਾਂ ਆਪ੍ਣੇ ਫੈਸਲੇ ਨੂੰ ਅੰਸ਼ਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਸੰਕਲਪ੍ਾਂ, ਅਨੁਮਾਨਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ੰਮਕਆਂ ਅਤੇ ਅੰਸ਼ਕ ਤੌਰ' ਤੇ ਸਬੂਤਾਂ 'ਤੇ ਅਧਾਰਤ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਅਮਜਹੀ ਸਮਥਤੀ ਮਵਿੱਚ ਕਾਨੂੰਨ ਦਾ ਮੁਿੱਦਾ ਉੱਠਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਨਤੀਜੇ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਨਤੀਜੇ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇਹ ਇੰਨਾ ਤਰਕਹੀਣ ਪ੍ਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਮਕ ਕੋਈ ਵੀ ਮਵਅਕਤੀ ਮਨਆਂਇਕ ਅਤੇ ਸਹੀ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਸਬੰਧਤ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ 'ਤੇ ਨਹੀਂ ਪ੍ਹੁੰਚ ਸਕਦਾ ਸੀ। ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਮਵਿੱਚ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਤਿੱਥਾਂ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਨੂੰ ਜਾਇ ਠਮਹਰਾਉਣ ਵਾਲੇ ਹਾਲਾਤਾਂ ਮਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਮੌਜੂਦ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਅਮਜਹੀ ਮਕਸੇ ਵੀ ਸਮਥਤੀ ਦੀ ਅਣਹੋਂਦ ਮਵਿੱਚ, ਉੱਚ ਸਾਡੇ ਮਵਚਾਰ ਮਵਿੱਚ ਅਦਾਲਤ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਤਿੱਥਾਂ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਕਰਨਾ ਜਾਇ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਇਹ ਤਿੱਥ ਮਕ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਸਬੂਤਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ੇਸ਼ ਕਰਨ ਉੱਤੇ ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਤੋਂ ਵਿੱਖਰੇ ਤਿੱਥ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਉੱਤੇ ਪ੍ਹੁੰਚੀ ਹੋਵੇਗੀ, ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਦੇ ਮਸਿੱਟੇ ਮਵਿੱਚ ਦਖਲਅੰਦਾ ੀ ਦੀ ਗਰੰਟੀ ਨਹੀਂ ਮਦੰਦੀ।
ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਇਸ ਮਸਿੱਟੇ 'ਤੇ ਪ੍ਹੁੰਮਚਆ ਮਕ ਖਰੀਦ ਇੰਡੀਆ ਯੂਨਾਈਮਟਡ ਮਮਿੱਲ ਮਲਮਮਟਡ ਦੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ ਏਜੰਸੀ ਅਤੇ ਮਨਯੰਤਰਣ ਪ੍ਰਾਪ੍ਤ ਕਰਨ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ੁਿੱਛੇ ਗਏ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਮਗਣਤੀ। ਅਤੇ ਇਹ ਮਕ ਉਹ ਸ਼ੇਅਰ ਕਈ ਹਾਲਤਾਂ ਮਵਿੱਚ ਸਟਾਕ-ਇਨ-ਟਰੇਡ ਵਜੋਂ ਨਹੀਂ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸਨ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਪ੍ਾਇਆ ਮਕ ਸਵਾਲ ਮਵਿੱਚ ਸ਼ੇਅਰ ਸਸੂਨ ਦੁਆਰਾ ਅਗਰਵਾਲ ਐਡ ਕੰਪ੍ਨੀ ਨੂੰ ਵੇਚੇ ਗਏ ਲਾਟ ਮਵਿੱਚੋਂ ਸਨ। ਇਹ ਵੀ ਪ੍ਾਇਆ ਮਗਆ ਮਕ ਸ਼ੇਅਰ ਸਨ ਮੁਿੱਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਨੂੰ ਉਸ ਮੂਲ ਕੀਮਤ ਉੱਤੇ ਤਬਦੀਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਮਜਸ ਉੱਤੇ ਇਹ ਸ਼ੇਅਰ ਸਾਸੂਨ ਦੁਆਰਾ ਵੇਚੇ ਗਏ ਸਨ ਨਾ ਮਕ ਉਸ ਕੀਮਤ ਉੱਤੇ ਜੋ ਤਬਾਦਲੇ ਦੇ ਸਮੇਂ ਪ੍ਰਚਮਲਤ ਸੀ। ਮਟਰਮਬਊਨਲ ਨੇ ਹੋਰ ਇਹ ਪ੍ਾਇਆ ਮਗਆ ਮਕ 62,500 ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਨੇ ਅਸਲ ਮਵਿੱਚ ਅਗਰਵਾਲ ਅਤੇ ਅਗਰਵਾਲ ਦੁਆਰਾ ਖਰੀਦੇ ਗਏ ਸ਼ੇਅਰਾਂ ਦੀ ਕੁਿੱਲ ਮਗਣਤੀ ਮਵਿੱਚ ਮੁਲਾਂਕਣਕਰਤਾ ਏ ਦੇ ਮਹਿੱਸੇ ਦੀ ਨੁਮਾਇੰਦਗੀ ਕੀਤੀ। ਕੰਪ੍ਨੀ. ਇਨਹਾਂ ਨਤੀਮਜਆਂ ਦੀ ਰੋਸ਼ਨੀ
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